बिक गया भारतीय समाजवाद के माक्र्सवादी आचार्य का घर!

कम ही लोग जानते हैं कि 20 अगस्त, 1944 को श्रीमती इंदिरा गांधी पहली बार मां बनीं, तो दर्पपूर्वक खुद को माक्र्सवादी कहने वाले समाजवादी आचार्य ने पं. जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर उनके शिशु का नाम राजीव गांधी रखा। 1989 में यही राजीव गांधी थे, जिन्होंने केन्द्र के स्तर पर आचार्य की जन्मशती मनाने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के रूप में कोई उत्साह नहीं प्रदर्शित किया, प्रस्तावकों को शिक्षामंत्री शीला कौल के पास भेज दिया, जिन्होंने प्रस्तावकों से कह दिया कि बेहतर हो कि वे उत्तरप्रदेश सरकार से सम्पर्क कर लें।

 कृष्ण प्रताप सिंह
गत 31 अक्टूबर को भारतीय समाजवाद के पितामह और माक्र्सवादी आचार्य नरेन्द्रदेव की 127वीं जयंती आई और अननोटिस्ड सी चली गई। वैसे ही जैसे यह खबर कि उनकी कर्मभूमि फैजाबाद में स्थित उनका वह ऐतिहासिक घर, जिसमें रहकर अध्ययन व चिंतन करते हुए वे इस निष्कर्ष तक पहुंचे कि मनुष्यमात्र की मुक्ति का एकमात्र रास्ता समाजवाद से होकर गुजरता है, अब उनका नहीं रहा। एक बड़ी डील के बाद उसे ‘कोहनूर पैलेस’ में बदल दिया गया और नियम कायदों को धता बताकर तोड़े जाने की तैयारी चल रही है, ताकि उसकी जगह पर व्यावसायिक उद्देश्यों वाला काम्प्लेक्स निर्मित किया जा सके। ज्ञातव्य है कि 1939 में फैजाबाद में पुरुषोत्तमदास टंडन की अध्यक्षता में प्रतिष्ठापूर्ण प्रांतीय साहित्य सम्मेलन हुआ तो 15 नवम्बर की शाम यह घर सम्मेलन में आमंत्रित कवियों के काव्यपाठ के दौरान आचार्य से लम्बी चक-चक के बाद प्रतिष्ठित छायावादी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रात के कवि सम्मेलन के बहिष्कार का गवाह बना था और 19 फरवरी, 1956 को आचार्य के निधन के बाद भी लोग उसे ‘आचार्य जी की कोठी’ ही जानते थे। अब उसके भविष्य को लेकर विभिन्न समाजवादी खेमे यह कहकर निराशा जता रहे हैं कि जब आचार्य का समाजवाद ही वक्त के थपेड़े नहीं झेल पा रहा, तो किसी तरह लड़-भिड़ कर उनका घर बचा भी लिया जाए तो उससे क्या हासिल होगा?
यों, आचार्य के इस घर का ही नहीं, उनके जीवन, यहां तक कि नाम का भी, ऐसे बदलावों से गुजरने का इतिहास है। उनका माता-पिता का दिया नाम अविनाशीलाल था, जिसे नामकरण संस्कार के वक्त नरेन्द्रदेव में बदल दिया गया था। बाद में काशी विद्यापीठ में उनके अभिन्न रहे स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता व साहित्यकार श्री प्रकाश ने अपनी श्रद्धा निवेदित करने के लिए उन्हें आचार्य कहना शुरू किया तो वह आगे चलकर उनके व्यक्तित्व का पर्याय ही नहीं, नरेन्द्रदेव का स्थानापन्न भी बन गया। आचार्य पैदा भले ही 31 अक्टूबर, 1889 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में हुए थे, आगे चलकर फैजाबाद ही उनकी कर्मस्थली बना था, जहां उनके दादा बर्तनों के व्यवसायी थे। आचार्य दो ही साल के थे कि उनके दादा का निधन हो गया और वे पिता के साथ फैजाबाद चले आए। पिता वकील थे और चाहते थे कि बेटा भी वकालत पढ़े, लेकिन नरेन्द्रदेव को वकालत में ज्यादा रुचि नहीं थी। बाद में उन्होंने इस लिहाज से इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की कि वकालत करते हुए स्वतंत्रता संघर्ष में सुविधापूर्वक भाग ले सकेंगे। 1915 से पांच वर्षों तक उन्होंने फैजाबाद में वकालत भी की।
कम ही लोग जानते हैं कि 20 अगस्त, 1944 को श्रीमती इंदिरा गांधी पहली बार मां बनीं, तो दर्पपूर्वक खुद को माक्र्सवादी कहने वाले समाजवादी आचार्य ने पं. जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर उनके शिशु का नाम राजीव गांधी रखा। 1989 में यही राजीव गांधी थे, जिन्होंने केन्द्र के स्तर पर आचार्य की जन्मशती मनाने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के रूप में कोई उत्साह नहीं प्रदर्शित किया, प्रस्तावकों को शिक्षामंत्री शीला कौल के पास भेज दिया, जिन्होंने प्रस्तावकों से कह दिया कि बेहतर हो कि वे उत्तरप्रदेश सरकार से सम्पर्क कर लें।
यह और बात है कि स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान 1942 से 45 तक अहमदनगर किले में बंद रहे आचार्य ने उसी किले में बंद पं. नेहरू को ‘डिस्कवरी आफ इंडिया’ के लेखन में अपनी विद्वता का इतना ‘लाभ’ दिया था कि नेहरू ने भूमिका में इसका उल्लेख किया था। आचार्य ने अपना ‘अभिधर्मकोश’ भी इसी किले में पूरा किया, जिस पर उन्होंने 1932 में बनारस की जेल में रहते हुए काम शुरु किया था। आकाादी के बाद 1948 में उन्होंने कांग्रेस का नीतिगत विपक्ष निर्मित करने के उद्देश्य से उससे इस्तीफा दे दिया, साथ ही नैतिक आधार पर उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी, फिर उसी सीट से उपचुनाव लड़ा और हार गये तो नेहरू खासे व्यथित हुए थे। लेकिन शीला कौल की नकार में आचार्य प्रदेश स्तर के नेता थे। भले ही वे 1936 से ही देशवासियों से कहते आये हों कि हमारा काम ब्रिटिश साम्राज्य के शोषण के अंत मात्र से पूरा नहीं होने वाला। हमें जनता का शोषण करने वाले देसी शोषक वर्गों को भी काबू करके एक नई शोषणमुक्त सभ्यता निर्मित करनी होगी।

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