बारूद के ढेर पर बाराबंकी, कौन बचा रहा है लापरवाह एसपी को

पुलिस की लापरवाही से बाराबंकी में हफ्ते भर में हुईं दो बड़ी घटनाएं

पुलिस के बड़े अफसर जमीनों के धंधे में लगे, किसी को नहीं कानून व्यवस्था की ङ्क्षचता

o1बाराबंकी में लगातार बढ़ रहा है तनाव, कभी भी हो सकती है इससे बड़ी घटना

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाराबंकी बारूद के मुहाने पर बैठा है। एक के बाद एक ताबड़तोड़ घटनाओं ने पूरे जिले में आतंक का माहौल बना दिया है। जिले के थानों में अराजकता का माहौल है। पुलिस खुले आम कप्तान के नाम पर वसूली कर रही है। निर्दोष लोगों को थाने पर हफ्तों बिठा लिया जाता है। कप्तान तक से शिकायत करने से कोई सुनवाई नहीं होती। मानवाधिकार आयोग भी ऐसे मामलों की जांच कर रहा है। सिद्धौर में मारपीट और आगजनी के बाद जबरदस्त तनाव बना हुआ है। देवा कोतवाली क्षेत्र में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के बाद उत्तेजित ग्रामीणों ने पूरी पुलिस चौकी ही फूंक दी। ताबड़तोड् घटनाओं के बावजूद बदनाम एसपी अब्दुल हमीद का न हटना लोगो में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग समझ नहीं पा रहे कि जिस कप्तान की लापरवाही के चलते पूरे बाराबंकी में अराजकता का माहौल बना हुआ है। आखिर उस एसपी को बचाने में किसका हाथ है। जाहिर है कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए पूरे बाराबंकी को आग में झोंकने के लिए तैयार बैठे हैं। मजे की बात यह है कि एसपी अब्दुल हमीद का एक बार तबादला हो चुका है। मगर अपने संबंधों के चलते अब्दुल हमीद अपना तबादला रूकवाने में कामयाब हो गए।
सिद्धौर में मामूली बात पर दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। पुलिस दोनों पक्षों पर कार्रवाई करने की जगह पैसे वसूल करने में जुट गई। नतीजा यह हुआ कि दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। इसके बाद जो हुआ उसने पूरे बाराबंकी को हिला दिया। लोग सडक़ो पर आ गए। शांत रहने वाला सिद्धौर बलवे की चपेट में आ गया और जमकर आगजनी हुई। शर्मनाक बात यह रही कि एक बार आगजनी होने के बाद दुबारा सिद्धौर कस्बे में फिर हिंसा हुई। जाहिर है यह इसलिए हुआ क्योंकि पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं रहा।
इस बीच 30 अगस्त को थाना देवा कोतवाली में पुलिस एक युवक को उठा लाई और उसे यातना देकर पैसे वसूली की मांग कर रही थी। ज्यादा यातना के कारण इस युवक की मौत हो गई। इससे उत्तेजित लोगों ने पूरी पुलिस चौकी ही फूंक दी। इसके बाद पुलिस निर्दोष ग्रामीणों पर कहर बरसा रही है।
कुछ दिन पहले ही बाराबंकी के कोठी थाने में वसूली के लिए बैठाए गए व्यक्ति को छुड़ाने के लिए गई महिला से पुलिसकर्मियों ने बलात्कार करने की कोशिश की और नाकाम रहने पर उसे पेट्रोल छिडक़र कर जला दिया।बाराबंकी में ही इंजीनियर शिखर श्रीवास्तव की हत्या का मामला आज भी सुलझा नही है। जनपद के थाना सफदरगंज व मसौली में करोड़ों रुपये कीमत की अष्टïधाुत की मूर्तियों चोरी हो गई, जिनका आज तक पता नहीं चल सका है।
बाराबंकी के ही थाना रामसनेही घाट पुलिस ने एक युवक प्रभाकर शर्मा को गाड़ी सहित थाने में बिठा लिया और उससे छोडऩे के एवज में 30 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। मामला प्रमुख सचिव गृह के संज्ञान में लाया गया। आईजी कानून व्यवस्था सतीश गणेश ने खुद बाराबंकी के एसपी को फोन किया तब जाकर इस युवक को छोड़ा गया। मामले की जांच मानवाधिकार आयोग ने शुरू की। दारोगा यशवंत सिंह यादव ने इस युवक के परिजनों पर दबाव बनाया कि वह अपनी शिकायत वापस ले लें। न मानने पर कुछ दिन पहले इस युवक पर एक फर्जी मुकदमा लगाकर पूरे गांव में उसकी गिरफ्तारी के नोटिस चिपका दिए गए। जाहिर है बाराबंकी जंगलराज का सबसे बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

कुछ लोग जान बूझकर बाराबंकी का माहौल खराब करने में जुटे हुए हैं। यह कोई नई बात नहीं है। प्रदेश का विकास इन लोगों को रास नहीं आ रहा। कभी डीजे बजाने की मांग को लेकर हंगामा किया जाता है, तो कभी किसी और बात लेकर, प्रशासन ऐसे लोगों से कड़ाई से निपटेगा। किसी को भी माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

-अरविंद सिंह गोप ग्राम्य विकास मंत्री

जो हाल बाराबंकी का है वहीं हाल पूरे प्रदेश का है। प्रदेश में जंगलराज स्थापित हो गया है। किसी को डर नहीं है कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। सभी जानते हैं कि बाराबंकी के एसपी खुलेआम रिश्वत लेते हैं। मगर ऐसे अफसर को अभी तक नहीं हटाया गया।
-आईपी सिंह  भाजपा प्रवक्ता

जिले के कप्तान का इकबाल होना जरूरी है तभी कानून व्यवस्था पर नियंत्रण हो सकता है। बाराबंकी में एक के बाद एक जिस तरह ताबड़तोड़ घटनाएं हो रही हैं, वो साफ बताती हैं कि जिले में कानून व्यवस्था पर एसपी का नियंत्रण खत्म हो गया है। यह चिंताजनक बात है।
-शलभमणि त्रिपाठी यूपी हेड ७

अपने कामों से हमेशा विवाद में रहे हैं अब्दुल हमीद

एसपी अब्दुल हमीद के कारनामों से पूरा यूपी भली-भांति परिचित है। जैसे कारनामें यह बाराबंकी में दिखा रहे हैं वैसे ही कारनामें ये शामली में दिखा चुके हैं। इनकी लापरवाही के चलते शामली में साम्प्रादयिक दंगा भडक़ गया था जिससे बाद आनन-फानन में अब्दुल हमीद को शामली से हटाया गया था। और कोई एसपी होता तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती मगर कुछ दिनों में अब्दुल हमीद अपने रसूख का इस्तेमाल करके बाराबंकी पहुंच गए और उसके बाद बाराबंकी के बुरे दिन शुरू हो गए। दुख की बात यह है कि इस एसपी की छवि आम लोगों के बीच भी महाभ्रष्टï अधिकारी के रूप में बन चुकी है। चाय की दुकानों से चौपालों तक अब्दुल हमीद के नाकारापन के किस्से सुने जा सकते हैं। अब्दुल हमीद कानून व्यवस्था भले ही न संभाल पाते हों मगर उन्हें नेताओं को साधना बहुत अच्छी तरह से आता है। यही कारण है कि इतने हंगामें के बाद भी आज तक अब्दुल हमीद का बाल भी बांका नहीं हो सका है और अब्दुल हमीद बाराबंकी में ही नया गुल खिलाने को तैयार है।

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