बसपा पर झूठा आरोप लगा रहे हैं मोदी: मायावती

  • प्रदेश की जनता को भाजपा और सपा की साजिशों से बचने की सलाह

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र में दो साल पूरे होने पर जश्न मनाने वाली भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा सरकार की तरफ से जगह-जगह जनसभाओं का आयोजन करके अपनी वाहवाही का ढिंढोरा पीटने पर करोड़ों रुपये खर्च करने को गलत बताया और उन पैसों को सूबे में सूखे और भुखमरी की समस्या से जूझ रहे लोगों पर खर्च करने की सलाह दी। इसके साथ ही कांग्रेस, सपा और भाजपा तीनों पार्टियों पर आम जनता की भावनाओं के साथ छलावा करने और प्रदेश की कानून व्यवस्था बदहाल होने के बावजूद राष्ट्रपति शासन न लगाने और सपा सरकार को तत्काल बर्खास्त कर चुनाव नहीं कराने को भाजपा और सपा की मिलीभगत बताया।
मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार दो साल के जश्न पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर चुकी है। यह धनराशि गरीबों और किसानों पर खर्च की जा सकती है। भाजपा ने राज्यसभा और विधानसभा चुनाव में जिस तरह वोटों की खरीद-फरोख्त की कोशिशें की हैं, उससे उसकी मंशा जगजाहिर हो गई है। इसके साथ ही हमारी पार्टी ने दोनों चुनावों में भाजपा को बुरी तरह हराकर अपने दबदबे को साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि कैराना से लोगों के पलायन करने का मामला मीडिया में गरम करके ऐसा प्रचार किया गया कि वहां के मुसलमानों ने लोगों को जबरन पलायन करने के लिए मजबूर किया। इस तरह हिन्दु-मुस्लिम के बीच विवाद कराने की कोशिश की गई। इस साजिश को प्रदेश सरकार और डीजीपी ने नाकाम नहीं किया लेकिन मीडिया ने विफल किया, जो कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।
जहां तक आजादी के बाद उत्तर प्रदेश से लगातार हो रहे पलायन का मामला है, तो उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस बीजेपी और सपा तीनों पार्टियों की सरकारों में बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ। इनमें अंतर इतना ही हुआ, कांग्रेस और बीजेपी के शासनकाल में लोग रोजी-रोटी की वजह से दिल्ली और मुंबई गये। लेकिन सपा सरकार में कैराना से लेकर बुंदेलखंड क्षेत्र से लोगों का पलायन हुआ है, जो गुंडागर्दी, भुखमरी और बेरोजगारी की वजह से हुआ है। देश की जनता को उम्मीद थी कि केन्द्र में बीजेपी की सरकार बनने से लोगों को रोजगार मिलेगा, महंगाई से राहत मिलेगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ है। उन्होंने गरीबों और किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी के 50 जिलों में सूखे की स्थिति के कारण लोग भुखमरी की कगार पर हैं। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाया है।

बसपा सुप्रीमो ने सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा की सरकार खासकर अराजकता के लिए जानी जाती है लेकिन इस बार सरकार में अपराधियों और गुण्डों का बोलबाला है। इस बार बहुमत में होने की वजह से प्रदेश भर में गुंडों और अपराधियों का बर्चस्व है। इससे प्रदेश में कोई भी सुरक्षित नहीं है। अपराध चरम पर है। इसके लिए वर्तमान सपा सरकार ही नहीं कांग्रेस भी पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। इन तीनों विरोधी पार्टियों ने प्रदेश की जनता से भितरघात कर सर्वजन हिताय वाली बसपा को हराने का काम किया था। इस वजह से लोगों को असुरक्षा और आतंक के माहौल में रहना पड़ रहा है। यहां केवल कोरी बयानबाजी और नाटकबाजी की जा रही है। जमीन स्तर पर जनता की हालत सुधारने की न तो कोशिश की जा रही है और न ही कोई काम किया है। भाजपा नेताओं के आंसू घडिय़ाली आंसू है। प्रदेश की बहुत अधिक स्थिति खराब होने के बाद भी राष्ट्रपति शासन नहीं लगा। सपा सरकार को बेलगाम छोडऩे का काम किया है। इस तरह मिली भगत करके अगला विधानसभा चुनाव लडऩे में अपना भला देख रही है। जबकि जनता की मांग है कि सपा सरकार को बरखास्त कर तत्काल चुनाव कराया जाए। इसकी लोग सचेत रहें, सपा और भाजपा के षड्यंत्र को समझें और बचने की कोशिश करें। 

मोदी पर पलटवार-मायावती ने कहा कि इलाहाबाद में नरेन्द्र मोदी ने सपा सरकार के भ्रष्टाचारों के खिलाफ बसपा शासनकाल में जो कार्रवाई न करने की बात कही है, वह हकीकत से परे है। बसपा सरकार ने पुलिस भर्ती घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करवाई थी, जिसमें पुलिस भर्ती बोर्ड के उच्चाधिकारी भी लपेटे में आये थे। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की जांच भी कराई गई थी। यह मामला भी कोर्ट में लंबित है। मेरी सरकार में सपा सरकार के हर बड़े घोटाले की जांच कराई गई है। यह मामले कोर्ट में लंबित होने और सरकार न होने की वजह से सही ढंग से पैरवी नहीं हो पाई है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर स्थल पर लाखों की संख्या में आई भीड़ के सामने पहले ही कहा था कि उनकी सरकार सपा सरकार के चुनावी वर्ष में किए जाने वाले आर्थिक फैसले और लोकार्पणों की सत्ता में आने पर जांच करायेगी। इन सबके बावजूद प्रधान मंत्री ने अपनी पार्टी के बचाव में कहा है, जो एक सोची समझी साजिश के तहत कहा गया है। सहारन पुर और इलाहाबाद मेें जुटी भीड़ यूपी की नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों की रही है।

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