बलरामपुर अस्पताल में कर्मचारियों का खेल

डायलिसिस में चलता है पैसा, पैसा देने वालों का लगता है आगे नंबर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में डायलिसिस जल्दी कराना हो तो पैसे से कर्मचारियों की जेब गरम करिये और अपना काम कराइये। इससे नंबर के इंतजार में लगे मरीजों को कई बार चक्कर काटना पड़ता है। इसका खुलासा तब हुआ जब फोर पीएम की ओर डायलिसिस यूनिट में लगे एक कर्मचारी से एक मरीज की डायलिसिस कराने के लिए कहा गया। कर्मचारी ने बताया कि डायलिसिस कराने के लिए जो पैसा देता है, उसका काम पहले किया जाता हैै। 5 सौ से लेकर 1 हजार रूपये तक की वसूली की जाती है जिसमें कर्मचारियों के साथ डॉक्टर भी हिस्सा लेते हैं।
बलरामपुर अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के हेड खुद सीएमओ एसएनएस यादव हैं। इसके आलावा दो नेफ्रोलॉजिस्ट और तैनात हैं। ऐसे में डायलिसिस यूनिट में कर्मचारी मरीजों से वसूली करने से नहीं चूक रहे हैं। यहां के हालात तब ऐसे हैं जब इस यूनिट के इंचार्ज खुद सीएमओ हैं। ऐसे में अन्य जगहों का क्या हाल हेागा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

डाक्टरों की है चांदी
सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर एक तरफ सरकार से प्रॉइवेट प्रैक्टिस न करने की रकम भी ले रहे हैं दूसरी तरफ प्रैक्टिस करके लाखों रूपये अंदर कर रहे हैं। सरकारी डाक्टरों की ओर से दोबार मलाई मारी जा रही है। लोहिसया के मेडिसिन विभाग के एक डॉक्टर का क्लीनिक इंद्रानगर में है, वो जमकर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। उनके यहां मरीजों की लंबी लाइन लगती है। उनके यहां इलाज के लिए जाने वाले एक मरीज ने बताया कि शाम को मरीजों की लंबी भीड़ इक ट्ठी हो जाती है।
केजीएमयू के भी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में अव्वल हें। इसका खुलासा पहले ही हो चुका है। केजीएमयू के गांधी वार्ड में तैनात एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी के नाम से क्लीनिक खोल रखा है। मरीजों को केजीएमयू में बात करके वहीं इंडोस्कोपी के लिए बुलाता है और मोटी रकम वसूली जाती है।
रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल का एक नेत्र चिकित्सक ने निरालानगर में क्लीनिक खोल रखा है और जमकर प्राइवेट प्रैक्टिस करता है। सूत्रों के मुताबिक नेत्र चिकित्सक की ओर सरकारी चीजों लेंस, दवाइयंो आदि का प्राइवेट क्लीनिक पर से सप्लाई किया जाता है।

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