बर्बाद होता सत्र…

जिस तरह से संसद की कार्यवाही प्रभावित की जा रही है उससे न केवल देश का नुकसान होगा बल्कि संसद की गरिमा पर भी असर पड़ेगा। लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है क्योंकि विपक्ष पिछले कई दिनों से केन्द्र सरकार से एक मुद्दे पर हंगामा मचाए हुए है। यही मुद्ïदा राज्यसभा में भी छाया हुआ है।

वर्तमान में संसद के दोनों सदनों में जो दृश्य दिख रहा है उससे साफ जाहिर है कि एक और सत्र हंगामे की sanjay sharma editor5भेंट चढ़ जाएगा
। शीतकालीन सत्र का भी वही हश्र होगा जैसा मानसून सत्र का हुआ था। यह बड़ी विडंबना है कि हमारे माननीय सांसदों ने संसद को अखाड़े में तब्दील कर दिया है। अब जनहित के मुद्दों पर बहस न होकर सिर्फ बदले की राजनीति को अंजाम दिया जा रहा है।

जिस तरह से संसद की कार्यवाही प्रभावित की जा रही है उससे न केवल देश का नुकसान होगा बल्कि संसद की गरिमा पर भी असर पड़ेगा। लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है क्योंकि विपक्ष पिछले कई दिनों से केन्द्र सरकार से एक मुद्दे पर हंगामा मचाए हुए है। यही मुद्दा राज्यसभा में भी छाया हुआ है।
कुल मिलाकर विपक्षी पार्टियों का एक ही काम है कि कोई न कोई मुद्दा तलाश कर कार्यवाही स्थगित कराई जाए। इससे यह स्पष्टï है कि अब राजनैतिक दलों को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता इतनी हावी हो गई है कि अब सांसदों को सही-गलत का अंतर समझ में नहीं आ रहा है। मानसून सत्र के बाद जिस तरह शीतकालीन सत्र में संसद की कार्यवाई सही तरह से नहीं चल पा रही है उससे संप्रग सरकार का वह दौर स्मरण हो आता है जब भाजपा विपक्ष में थी और कुछ मुद्दों को लेकर वह तत्कालीन सत्तापक्ष का सहयोग करने से इनकार कर रही थी। कांग्रेस अब भाजपा को उसके उसी रवैये की याद दिला रही है। कांग्रेस बार-बार यही कह रही है कि उनके समय में एनडीए ने उन्हें सहयोग नहीं किया था। यह नकारात्मक राजनीति वाला बयान है।
राजनीतिक दलों की अपनी विचारधारा होती है। वह विचारधारा कहीं न कहीं देश के विकास और जनता के हित में होती है। जनता सांसदों को इसीलिए चुनकर संसद में भेजती है कि वह उनकी समस्याओं के लिए आवाज उठाएंगे, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। सांसदों को जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें इससे कतई मतलब नहीं है कि जनता के खून-पसीने की कमाई संसद में निरर्थक बर्बाद किया जा रहा है। संसद देश का मंदिर है। जब संसद की कार्यवाही चलती है तो पूरे विश्व के मीडिया की निगाह लगी होती है। अब देखना होगा कि यह सत्र सार्थक सिद्ध होता है या फिर इसका भी परिणाम मानसून सत्र की भांति होगा।

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