बर्खास्त सिपाही को बचाने में जुटे थे पुलिस अधिकारी

एमएलसी का रिश्तेदार ही नहीं सिपाही से बर्खास्त है ईनामी शैलेंद्र
नागेंद्र चौबे की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद पकड़ा अपराधी को

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। पांच हजार रुपये का ईनामी अपराधी शैलेंद्र प्रताप सिंह जहां एमएलसी का रिश्तेदार है वहीं पुलिस विभाग से भी बर्खास्त है। वह लगभग दो वर्षों से फरार चल रहा था। अपराधी शैलेंद्र को गिरफ्तार करने पर जहां कई पुलिस में कार्यरत अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे वहीं शैलेंद्र भी इन अधिकारियों के रहमोकरम पर बचते हुये उनको फायदा दिलाता रहा। फिलहाल पुलिस टीम सहित लखनऊ के कप्तान राजेश कुमार पांडेय ने सभी अधिकारियों को दरकिनार करते हुये शैलेंद्र को जेल भेज दिया।
सुल्तानपुर जनपद के थाना गोसाईगंज क्षेत्र के सिधौली निवासी शैलेंद्र प्रताप सिंह वर्ष 1991 में पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। लेकिन जमीनों पर अवैध कब्जा करना और कब्जा कराने में माहिर शैलेंद्र को अधिकारियों ने वर्ष 2005 में बर्खास्त कर दिया था। शैलेंद्र अपराधी भीम सिंह का साला है। जबकि एमएलसी अजीत सिंह का भीम सिंह ममेरा भाई है।
शैलेंद्र वर्ष 2000 में कृष्णानगर में तैनाती के दौरान जहां एक चिकित्सक को जहां गोली मरवाया था वहीं निरालानगर में पेट्रोलपम्प मालिक की हत्या में भी उसका नाम आया था। शैलेंद्र के खिलाफ एक दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज है। जिसमें हत्या, लूट, धोखाधड़ी सहित अन्य मामले शामिल है। वर्र्ष 2013 में मकान कब्जा करने के मामले में व्यवसाई करूणाशंकर शुक्ला पर शैलेंद्र ने कातिलापा हमला किया था। इस मामले की विवेचना सीबीसीआईडी कर रही है। इसी मामले में शैलेंद्र फरार हो गया जहां इसके ऊपर पांच हजार रुपये का ईनाम रखा गया। इसके साथ ही करोड़ों रुपये की जमीनों पर कब्जा करना और रुपये लेकर कब्जा दिलवाना इसका मुख्य धंधा हो गया था।
एसएसपी राजेश कुमार पांडेय को इस सिपाही के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने तेजतर्रार इंस्पेक्टर नागेंद्र चौबे को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी दी। जहां नागेंद्र चौबे ने अपनी टीम में शामिल सर्विलांस प्रभारी धीरेंद्र शुक्ला, एसआई धीरज सिंह, अनुराग मिश्रा, सहित अन्य सिपाहियों की मदद से शैलेंद्र को आलगबाग स्थित जेल रोड से गिरफ्तार किया।

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