कब बनारस की हिंसा पर मन की बात करेंगे हमारे सांसद मोदी जी

  • 6 OCT PAGE-1 copy (1024 x 1516)प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में लगातार बिगड़ रहे हैं हालात
  • लोग हैरान हैं कि प्रतिकार यात्रा को किसने दी मंजूरी

लखनऊ। बाबा भोले का शान्त और प्यारा शहर बनारस जो अब प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है, किसी अनहोनी की आशंका से लगातार डर रहा है। गणेश प्रतिमा के विसर्जन के मुद्दे पर हुए हंगामे के बाद जब प्रतिकार यात्रा निकालने का निर्णय हुआ तभी समझ आ गया था कि एक बार फिर बनारस का माहौल खराब होगा। प्रतिकार का मतलब ही बदला होता है। हैरानी की बात यह है कि इस यात्रा को कुछ लापरवाह अफसरों ने कैसे अनुमति दे दी।
कल हुई घटना के बाद शहर में कफ्र्यू लगा दिया गया था। हालांकि आज बनारस के बाजार खुले तो मगर वहां की फिजाओं में अभी भी किसी अनहोनी का डर बना हुआ है। मगर सबसे हैरानी की बात यह है कि साधु-संतो का लाठी चार्ज को लेकर भाजपा और विहिप के कार्यकर्ता तो उत्तेजित हो रहे हैं मगर वहां के सांसद नरेन्द्र मोदी ने इस घटना पर अभी तक एक शब्द भी नहीं बोला है। अस्सी घाट पर लगातार गंगा आरती में शामिल होने आ रहे राजीव अग्रवाल सवाल करते हैं कि आखिर बनारस में इतना माहौल खराब हो जाने के बावजूद प्रधानमंत्री खामोश क्यों हैं जबकि यह उनका संसदीय क्षेत्र है, गुस्से से वह कहते हैं कि मोदी जी को चुनने के बाद हमको उम्मीद थी कि बनारस का विकास होगा। विकास तो नहीं हुआ, हां यह तोहफा जरूर मिल गया कि बनारस में पहली बार कफ्र्यू लग गया। बनारस के लोग लगभग इसी गुस्से का इजहार अलग-अलग ढंग से कर रहे हैं।

मोदी जी देश के प्रधानमंत्री और बनारस के सांसद भी है। प्रधानमंत्री देश की प्रत्येक घटना पर नजर बनाए रखे हैं। सही वक्त पर वह अपनी बात भी रखेंगे। बनारस की घटना के लिए यूपी सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।
-लक्ष्मीकान्त बाजपेई
(प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी )

उत्तर प्रदेश का माहौल सपा और भाजपा खराब कर रही है। मामला चाहे दादरी का हो या बनारस का। मोदी जी को इससे क्या मतलब, उनके तो अच्छे दिन आ ही गए। अब उनको इस मुद्दे पर बोलने की क्या जरूरत है।
-स्वामी प्रसाद मौर्या
(नेता, बीएसपी )

प्रदेश सरकार इस घटना पर सख्ती से पेश आ रही है और प्रशासन भी सख्त है। बनारस में जो हिंसा हुई है वह बीजेपी की प्लानिंग थी । साधुओं से अपील है की सिर्फ एक पार्टी की तरफ झुकाव ठीक नहीं हैं। साधु-संत को सहजता से काम लेना चाहिए।
-राजेंद्र चौधरी
(कैबिनेट मंत्री, यूपी सरकार)

मुजफ्फरनगर के दंगे पर न मोदी जी एक लफ्ज बोले थे और न ही मुलायम सिंह। बनारस में कल जो हिंसा हुई है, उससे यही लगता है कि मिनी पीएमओ कार्यालय अब धु्रवीकरण कार्यालय बन गया है। इस हिंसा से दोनों सरकारों का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है।
-अशोक सिंह,
(सदस्य आल इंडिया
कांग्रेस कमेटी)

 

यूपी में हैं सबसे ज्यादा अच्छे पर्यटन स्थल: अखिलेश

  • ट्रैवल राइटर्स कॉनक्लेव में सीएम ने कहा कि- आगरा में प्यार का संदेश पढऩे के लिए दुनिया भर से आते हैं लोग
  • यूपी सरकार लगातार बढ़ा रही है पर्यटन उद्योग को, लोगों से कहा कि यूपी आएं और जाने यहां के गौरवशाली इतिहास को

लखनऊ। ट्रैवल राइटर्स कॉनक्लेव में बोलते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भारत के ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए यूपी के पर्यटन को समझना बहुत जरूरी है। यूपी को जान-बूझकर उपेक्षित रखा जाता है। आगरा में प्यार का संदेश पढऩे के लिए पूरी दुनिया के लोग यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है।

पर्यटन विभाग ने उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ट्रैवल राइटर्स कॉनक्लेव का आयोजन किया है। इसमें कई जाने माने लेखकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के महत्व को समझते हुए अब पूरी दुनियां के लोग यूपी आ रहे हैं। मैं तो हमेशा कहता हूं कि अगर पीएम बनना है तो यूपी आइए। उन्होंने कहा कि यहां के महत्व को देखते हुए सरकार पर्यटन को लगातार बढ़ावा देने में जुटी है। उन्होंने कहा कि आगरा के ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, मथुरा वृंदावन, लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों से लेकर बनारस के घाट लोगों का आकर्षित करते हैं। प्रदेश में पर्यटन की असीमित संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि अगर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो प्रदेश का समुचित विकास होगा। सीएम ने कहा कि कुछ लोग जान बूझकर यह नहीं बताते कि आगरा यूपी में है। हमने पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए ताजमहल में बेंचे लगवाईं, जिस पर यहां आने वाले लोग बैठकर फोटो खिचवाते हैं। सीएम श्री यादव ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गाइड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सभी जरूरी उपाय करेगी।

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