बदलते मौसम में बढ़ा निमोनिया का खतरा

केजीएमयू में चल रहा है निमोनिया से पीडि़त बच्चों पर रिसर्च

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बदलते मौसम में बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में निमोनिया के बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बलरामपुर अस्पताल, सिविल अस्पताल सहित केजीएमयू में भी निमोनिया के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे मौसम में सावधानी आवश्यक हैै। केजीएमयू की रिसर्च सेल की ओर से पूरे प्रदेश में निमोनिया से ग्रस्त बच्चों की लिस्ट तैयार हो रही है। गौरतलब है कि पिछले चार सालों में पूरे प्रदेश में निमोनिया से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। इसलिए केजीएमयू में निमोनिया से मरने वाले बच्चों पर रिसर्च कर रहा है। केजीएमयू की रिसर्च टीम की ओर से लगातार निमोनिया से ग्रसित सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती बच्चों की जानकारी ली जा रही है।
सरकारी अस्पतालों में निमोनिया की वजह से निमोनिया से पीडि़त नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। बलरामपुर अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णु लाल का कहना है कि बालरोग विभाग की ओपीडी में रोज करीब 40 से अधिक बच्चे आ रहे हैं, इनमें से सात से आठ नवजात निमोनिया से पीडि़त पाए जा रहे हैं। सिविल, बलरामपुर, राममनोहर लोहिया और झलकारी बाई जैसे सभी अस्पतालों में भी ऐसा ही हाल है।
निमोनिया का कारण
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान ने बताया कि बदलते मौसम में वायरल,वैैक्टीरिया और प्रदूषण से निमोनिया फैलता है। फेफ ड़ों में मौजूद खास प्रकार का पंपिंग प्रोग्राम खून में ऑक्सीजन सप्लाई करता है, जो वायरल और बैक्टीरिया के कारण काम करना बंद कर देता है और निमोनिया हो जाता है।
निमोनिया से बचने के उपाय
डॉ. सलमान ने बताया कि निमोनिया से बचने के लिए नवजात को सही समय पर टीके लगने जरूरी होते हैं। खासकर खसरा से बचाव अधिक आवश्यक होता है। इसके अलावा ठंड के मौसम में नवजातों में इम्यून सिस्टम भी बहुत कमजोर हो जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि बच्चों का ठंड से बचाव किया जाए।
निमोनिया के लक्षण
सांस लेने में घरघराहट, सांस के तेज गति से चलना और सर्दी, खांसी और बुखार होना। ऐसा हो तो तुरंत बच्चे को किसी बालरोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

निमोनिया होने के कारण

– नवजात का लो बर्थ वेट होना
– शरीर में विटामिन ए की कमी
– बच्चों का मां का दूध न पिलाना
– धुएं और ज्यादा लोगों के संपर्क में आने
से भी निमोनिया होता है।

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