बदलती जीवन शैली से युवाओं में बढ़ रहा है हृदय रोग का खतरा

मेडिकल कॉलेज, पीजीआई और लोहिया इंस्टीट्यूट में मिलाकर रोजाना आते हैं करीब 800 मरीज

4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। हृदय रोग कितना घातक है यह बताने की जरूरत नहीं है। दिन-प्रतिदिन हृदय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजधानी में भी हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन रोगियों की संख्या के मुकाबले डॉक्टरों की संख्या बहुत ही कम है। बड़े चिकित्सा संस्थानों से लेकर छोटे अस्पतालों तक में कुल मिलाकर मात्र 20 हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। जबकि केवल केजीएमसी में प्रतिदिन 200 नए मरीज आते हैं। इसके अलावा एसजीपीजीआई और राम मनोहर लोहिया जैसे संस्थानों में प्रतिदिन भारी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि आने वाले मरीजों में युवाओं की संख्या ज्यादा रहती है।

केजीएमयू समेत बड़े चिकित्सा संस्थानों में मात्र 20 हृदय रोग विशेषज्ञ हैं तैनात
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है हृदय रोग का खतरा

एक वक्त था कि हृदय रोग केवल अधेड़ और बूढ़े लोगों में होता था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। असंयमित जीवन शैली और खानपान की वजह से युवाओं में यह रोग तेजी से फैल रहा है। राजधानी के केजीएमयू से लेकर पीजीआई और लोहिया इंस्टीट्यूट तक में हृदय रोग विभाग में युवाओं की संख्या ज्यादा देखने को मिल रही है। लखनऊ में हृदय रोग के मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन डॉक्टरों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है। इसका नतीजा है कि लोगों को डॉक्टरों को दिखाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और साथ ही सर्जरी के लिए लंबी वेटिंग भी लग जाती है। मेडिकल कॉलेज से लेकर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और पीजीआई में भारी संख्या में हृदय रोगी आ रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों में 35 से 40 वर्ष के बीच के ज्यादा मरीज आ रहे हैं। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है।
केजीएमयू के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ.आर. के. सरन ने बताया कि राजधानी में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दिल के मरीजों की संख्या हर दो साल में दोगुनी हो जाती है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें हर 5 व्यक्तियों में एक हृदय रोगी होता है। यानी 40 से कम उम्र के 20 फीसदी लोग हृदय रोग से पीडि़त हैं। करीब 70 फीसदी लोग ऐसे हैं जिन पर हृदय रोग की गिरफ्त में जाने का खतरा मंडरा रहा है। डा. सरन ने बताया कि हमारे यहां आउटडोर में रोजाना करीब 350 मरीज आते हैं। इनमें से औसतन 100 से 120 नए मरीज होते हैं। इससे हृदय रोगियों की बढ़ रही संख्या का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लारी के अलावा एसजीपीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी संस्थान हैं। इन संस्थानों में भी काफी मरीज पहुंच रहे हैं। पुराने मरीजों को मिला लें तो प्रमुख चिकित्सालयों की ओपीडी में रोजाना करीब 800 हृदय रोगी पहुंच रहे हैं। इसमें युवाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ रहा है जो कि ठीक नहीं है। हृदय रोग एक गंभीर बीमारी है। इसमें सावधानी और बचाव बहुत जरूरी है। डा. सरन ने कहा कि हमारे देश में हृदय रोग को लेकर बहुत से मिथक व्याप्त है। जब मरीज इलाज के लिए आते हैं तो उनका मिथक तोडऩे की कोशिश करते हैं। हृदय रोग से बचने की खातिर सबको सुबह व्यायाम करना चाहिए। इसके साथ ही खानपान में भी अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए।

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