बदलता मौसम और गरीबों की चिन्ता

बारिश और ठंड की वजह से गरीब लोगों के सामने दिन भर काम करने या काम के सिलसिले में भागदौड़ करने के बाद रात को चैन की नींद सोना किसी सपने से कम नहीं है। इन गरीबों को अपना सिर छिपाने के लिए रोजाना दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही दो दर्जन के अधिक रैन बसेरे हैं। इन रैन बसेरों में रोजाना सैकड़ों लोग रात गुजारते हैं।

sajnaysharmaसर्दी के मौसम में गरीबों के सामने अपने और परिवार के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल होता है। इस मौसम में गरीबों को न तो अच्छा काम मिलता है, न ही अपना सिर छिपाने के लिए छत नसीब होती है। गरीब परिवार सडक़ों के किनारे या पार्क में टाट पट्टी बिछाकर और प्लास्टिक डालकर गुजर-बसर करता है। ऐसे परिवारों के पास ओढऩे और बिछाने के लिए कंबल और बिछौने भी नहीं होते हैं। इसके बावजूद पूरा परिवार फटे कंबल, रजाई और कपड़ों में खुद को ठंड से बचाने और ठिठुरते हुए रात बिताने की कोशिश करता रहता है। ऐसे गरीबों के लिए बारिश कोढ़ में खाज के समान होती है, जिसकी वजह से न तो गरीब चैन से खाने का इंतजाम कर पाता है, न ही चैन से सो पाता है।
देश के उत्तर पूर्वी इलाकों में हल्की बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में पड़ रही बर्फ की वजह से भयंकर ठंड पडऩे लगी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब समेत कई हिस्सों में 24 घंटे के अंदर हल्की बारिश हुई। इसके अलावा देश के अन्य कई हिस्सों में भी बदली और हल्की बारिश की बूंदे पडऩे की वजह से सर्दी और अधिक बढ़ गई है। सरकारों ने मौसम में बदलाव और ठंड को देखते हुए बच्चों के स्कूलों में छुट्टी का आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन की तरफ से गरीबों को ठंड से बचाव के लिए कंबल बांटने, रैन बसेरे और अलाव का इंतजाम किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से काम की तलाश में शहर आने वाले लोगों को रात में ठहरने के लिए अस्थाई रैन बसेरों का इंतजाम किया गया है। इन सबके बावजूद शहरी क्षेत्रों में सैकड़ों गरीब खुले आसमान के नीचे रात गुजारते हैं। बारिश और ठंड की वजह से ऐसे लोगों के सामने दिन भर काम करने या काम के सिलसिले में भागदौड़ करने के बाद रात को चैन की नींद सोना किसी सपने से कम नहीं है। इन गरीबों को अपना सिर छिपाने के लिए रोजाना दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही दो दर्जन के अधिक रैन बसेरे हैं। इन रैन बसेरों में रोजाना सैकड़ों लोग रात गुजारते हैं। उसके बावजूद सैकड़ों लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ती हैं। ऐसे लोग उम्मीद करते है कि रात को कभी भी बारिश न हो, ताकि वह चैन से सो सकें।
इसलिए देश भर में गरीबों की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें सिर छिपाने के लिए छत मुहैया करवाने की जिम्मेदारी सरकारों की है। जब तक सरकारें गरीबों को सिर छिपाने के लिए छत और दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए रोजगार का इंतजाम नहीं करेंगी, गरीबों के लिए ठंड और बरसात हमेशा कोढ़ में खाज साबित होती रहेगी।

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