बढ़ सकती है बाबा रामदेव की मुसीबत

जिला प्रशासन ने मुरब्बा मामले में भेजा नोटिस

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जिला प्रशासन ने मैन्युफैक्चरिंग डेट में गड़बड़ी के मामले को गंभीरता से लेकर पतंजलि को नोटिस भेजा है। इसमें गड़बड़ी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से संबंधित नियमों के अनुपालन में लापरवाही पर कानूनी प्रावधानों का विवरण भी भेजा गया है। इसलिए पतंजलि की तरफ से राजधानी में प्रशासनिक अधिकारियों पर मामले को चुपचाप निपटाने का दबाव डाला जाने लगा है। जिसको लेकर चर्चाओं का दौर गर्म हो गया है। हेमचंद्र जोशी ने 4 मार्च को गोमतीनगर स्थित पतंजलि स्टोर से आंवले के मुरब्बे का डिब्बा खरीदा था।
उस डिब्बे पर मैन्युफैक्चरिंग डेट 20 अक्टूबर 2016 और एक्सपायरी डेट 19 अक्टूबर 2017 लिखी हुई थी। जबकि अभी मार्च 2016 चल रहा है। इसलिए उन्होंने मुरब्बा बनने की तिथि से पूर्व बाजार में बेचे जाने के मामले को गंभीरता से लेकर पतंजलि स्टोर के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में गोमतीनगर थाने में तहरीर दी। इसकी जानकारी मिलने पर नगर मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी को मौके पर भेजकर मामले की जांच कर्रवाई। मुरब्बे के डिब्बे पर मैन्युफैक्चरिंग डेट को लेकर गड़बड़ी की शिकायत सही पाई गई। इसके अलावा आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी और औषधि निरीक्षक डॉ. शिव कुमार वर्मा ने भी पतंजलि स्टोर पहुंचकर आंवला मुरब्बा के तीन डिब्बे खरीदे और उनका नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया।
गौरतलब हो कि खाद्य एवं औषधि से जुड़े उत्पाद पर गलत मैन्युफैक्चङ्क्षरंग डेट लिखा होना ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन है। यह मुरब्बा उत्तराखंड में बनाया गया है। इसलिए लाइसेंसिंग अधिकारी उत्तराखंड को कार्रवाई के पत्र लिख दिया गया है। इसके साथ ही मामले को जिलाधिकारी लखनऊ के पास भी भेज दिया गया है। इसमें पतंजलि के खिलाफ नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा प्रयोगशाला रिपोर्ट आने का इंतजार हो रहा है। इसी के आधार पर कंपनी के खिलाफ कोर्ट में मामला चलेगा और कानूनी कार्रवाई की जायेगी।

पहले भी विवादों में रहे हैं पतंजलि के उत्पाद
बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड के उत्पाद पहले भी विवादों में रहे हैं। इसमें दिसंबर 2015 में तमिलनाडू के एक मुस्लिम संगठन ने उत्पादों में गोमूत्र मिलाये जाने की शिकायत की थी। इस मामले में फतवा भी जारी किया गया था। इसके अलावा नवंबर 2015 में पतंजलि आटा नूडल्स को बेचने की एफएसएसए से अनुमति न लेने की बातें सामने आई थीं। इसके अलावा पतंजलि की मैगी में कीड़े मिलने का मामले भी सामने आ चुका है। ऐसे में मैन्युफैक्चरिंग डेट का मामला रामदेव की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

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