बढऩे की बजाय कम हो गई चिकित्सकों की संख्या

बलरामपुर अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिये करना पड़ रहा लंबा इंतजार

अस्पताल प्रशासन ने कई बार शासन को लिखा पत्र, पर नहीं सुधर रहे हालात
यहां लखनऊ से ही नहीं अन्य जिलों से भी आते हैं मरीज
स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना बना चुनौती

4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के बलरामपुर चिकित्सालय में 1990 में 130 चिकित्सक तैनात हुआ करते थे। समय बदला अस्पताल का स्वरूप बदला, उस समय में अस्पताल में बेडों की संख्या 600 थी। आज के समय में बलरामपुर जिला अस्पताल है इस समय यहां बेडों की संख्या 756 है और चिकित्सक कम हो गये हैं। हालत यह है कि अस्पताल में मरीजों की दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टॉफ में 30 चिकित्सकों की कमी बनी हुयी है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन की तरफ से कई बार शासन को पत्र भी लिखा गया है पर हालात जस के तस हैं।
शासन की तरफ से जल्द ही इस कमी को पूरा करने का आश्वासन तो अस्पताल प्रशासन को दिया जा रहा है लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही। ऐसे में मरीजों को इलाज एवं सुविधा मुहैया कराना अस्पताल प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गया है। बेहतर इलाज और सुविधा का दावा करने वाला अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है, जिसके चलते मरीजों को इलाज के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। बेहतर इलाज व सुविधा देने की नियत से अस्पताल में मास्टर स्वास्थ्य स्कीम के तहत सेन्टर खोला गया है। जहां पर काफी कम कीमत में कोई भी व्यक्ति अपना पूरा स्वास्थ्य परीक्षण करा सकता है। इस सेन्टर को चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट से लेकर चिकित्सकों तक की अलग टीम की आवश्यकता होती है पर यह भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। इस सेन्टर के साथ ही अस्पताल में रीजनल डायग्नोस्टिक सेन्टर भी संचालित किया जा रहा है। इसमें भी चिकित्सकों की तैनाती अस्पताल प्रशासन को करनी होती है।

डायलिसिस यूनिट में चिकित्सकों की कमी
अस्पताल में रोजाना लगभग 8 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। इसके लिए एक टीम की जरूरत होती है। चिकित्सीय स्टाफ में तो लोग कम हैं ही साथ ही मरीजों की संख्या को देखते हुए मात्र दो ही चिकित्सक तैनात हैं, जिन पर रोजाना 8 मरीजों की डायलिसिस का जिम्मा होता है।

ब्लड बैंक के लिए एक भी पद सृजित नहीं
बलरामपुर चिकित्सालय राजधानी का जिला अस्पताल है। यहां पर ब्लड बैंक भी संचालित किया जाता है, लेकिन ब्लड बैंक में चिकित्सक का कोई पद ही सृजित नहीं है। अस्पताल प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर अस्पताल के ही चिकित्सकों की तैनाती ब्लड बैंक में की जाती है।

बाहर की ड्ïयूटी चिकित्सकों के जिम्मे
अस्पताल के चिकित्सकों के ऊपर बाहर की ड्ïयूटी का भी दबाव रहता है। एक तो अस्पताल में चिकित्सकों की कमी, उस पर से बाहर की ड्ïयूटी और इन सब के बीच मरीजों की भारी तादात बनी रहती है। ऐसे में बेहतर इलाज व सुविधा का दावा पूरा होता नहीं दिख रहा है।

प्लास्टिक सर्जन नहीं
अस्पताल में 11 बेडों का बर्न वार्ड बना हुआ है पर यहां एक भी प्लास्टिक सर्जन नहीं है। सामान्य सर्जन से ही अस्पताल प्रशासन काम चला रहा है। वहीं चर्मरोग विभाग में 25० से 3०० मरीज रोजाना इलाज के लिए आते हैं। इन मरीजों को देखने की जिम्मेदारी सिर्फ दो चिकित्सकों पर है।

बलरामपुर में चिकित्सक और बेडों की संख्या

बलरामपुर अस्पताल-
बेडों की संख्या-756
चिकित्सक-80
लोहिया चिकित्सालय-
बेडों की संख्या- 465
चिकित्सक- 93
सिविल अस्पताल –
बेडों की संख्या-401
चिकित्सक-72
अस्पताल में मरीजों की संख्या के हिसाब से चिकित्सकों की कमी है। जितनी संख्या हमारे पास है हम उसी से मरीजों के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। सभी अस्पतालों से रेफर किये गये मरीज हमारे यहां आते हैं। चिकित्सालय में 3० और चिकित्सकों की आवश्यकता है। शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही चिकित्सकों की कमी पूरी हो जायेगी।
-डॉ. राजीव लोचन
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बलरामपुर चिकित्सालय

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