बच्चों से लेकर किशोरों तक में तेजी से फैल रही गठिया की बीमारी

  • समय से इलाज न होने पर कम उम्र में कराना पड़ सकता है कूल्हा प्रत्यारोपण

 वीरेंद्र पांडेय
captureलखनऊ। राजधानी में गठिया यानी अर्थराइटिस की बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। यह बीमारी छह महीने के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को अपना शिकार बना चुका है। एक हजार बच्चों में औसतन तीन-चार बच्चों में किसी न किसी प्रकार की गठिया की बीमारी पाई जाती है। केजीएमयू के पीडियाट्रिक अर्थोपैडिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अजय सिंह ने गठिया के ताजे आंकड़ों पर चिन्ता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि छह महीने के बच्चे से लेकर 17 साल तक के किशोरों में कई प्रकार की गठिया पायी जाती है। लेकिन उनमें से सबसे आम बीमारी जुवेनाइल रियूमैटॉइड अर्थराइटिस (जेआरए)होती है। जो बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है।
प्रो. अजय सिंह ने बताया कि उनके पास ओपीडी में हर महीने गठिया से पीडि़त दो से तीन बच्चे इलाज के लिए आते हैं, जो जेआरए से पीडि़त होते हैं। गठिया से पीडि़त बच्चों में जुवेनाइल रियूमैटॉइड अर्थराइटिस की समस्या होती है। यदि सही समय पर ऐसे लोगों को इलाज न मिले, तो आगे चलकर यह बीमारी विकराल रूप धारण कर सकती है। बीमारी का गम्भीर रूप लेने पर बच्चों का धीरे-धीरे उठना बैठना बंद हो सकता है। उनक ा लीवर, हृदय , आंख तथा किडनी खराब हो सकती है। कम उम्र में ही उनका कूल्हा या घुटना प्रत्यारोपण करना पड़ सकता है। सही समय पर इलाज न मिलने की सूरत में यह बीमारी लाइलाज भी हो सकती है और बच्चे की जान भी जा सकती है।

जोड़ों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा

प्रो. अजय के मुताबिक यदि जुवेनाइल रियूमैटॉइड अर्थराइटिस का विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा समय पर इलाज कराया जाए, तो जोड़ों को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है। उन्होने बताया कि गठिया से प्रभावित ज्यादातर बच्चों में जुवेनाइल रियूमैटॉइड अर्थराइटिस पाया जाता है। लेकिन इसके होने के कई कारण है,जिनमे से एक कारण अनुवांशिक होता है तथा दूसरा कारण शरीर के रोग-प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) में विकार आने से उत्पन्न होता है। चिकित्सक का कहना है कि एक या एक से अधिक जोड़ों में दर्द और सूजन का होना, बुखार आना, आंखों में सूजन और लालिमा का होना जेआरए के लक्षण हो सकते है। उन्होंने बताया कि यदि यह लक्षण कई दिनों तक बने रहे तो तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

गठिया में भ्रान्तियों से बचना जरूरी

प्रो. अजय सिंह के मुताबिक गठिया के शुरुआती लक्षणों में बुखार आना , जोड़ों मे दर्द और सूजन होने की समस्या आती है। उसको बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। साथ ही बीमारी का घरेलू इलाज करने के बजाय सीधे विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके पास इलाज के लिए बच्चों को लेकर आने वाले अभिभावक पूछते हैं कि इस बीमारी में दवा खाने से कोई दुष्परिणाम तो नहीं होगा। ऐसे अभिभावकों को यह बताया जाता है कि दवा से नहीं बीमारी के कारण शरीर के अंग खराब होते हैं। जब बीमारी शुरुआती दौर में होती है। तो दर्द निवारक दवायें नहीं खानी पड़ती है, जिससे कोई समस्या नहीं आती है। यदि बीमारी अन्तिम स्टेज में होगी तो दर्द निवारक दवाओं तथा बीमारी की वजह से शरीर के अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ता है।

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