बच्चों के बीमार होने की वजह तलाश रहा प्रशासन

  • प्रयोगशाला रिपोर्ट में दूध के नमूने फेल होने के बाद मामला गरमाया
  • डीएम ने पराग व अक्षयपात्र को नोटिस भेजकर सप्ताह भर में मांगा जवाब

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मध्यान्ह भोजन योजना में दूध पीने से कैण्ट क्षेत्र के दो स्कूलों में 60 बच्चों के बीमार होने का मामला एक बार फिर गरमाने लगा है। खाद्य सुरक्षा की प्रयोगशाला रिपोर्ट में दूध के दोनों नमूने फेल पाये गये हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दूध की पैकेजिंग में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है लेकिन बच्चे किस वजह से बीमार हुए, इसका पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में है।

जिलाधिकारी राजशेखर ने मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत स्कूलों में दूध पहुंचाने और वितरण की जांच करवाने का निर्णय लिया है। इसमें स्कूलों में दूध पहुंचाने वाली संस्थाओं की तरफ से फूड हैण्डलिंग के तरीकों की जांच करने का जिम्मा नगर मजिस्ट्रेट शत्रोहन वैश्य को सौंपा गया है। इसका मकसद खाने और दूध की गुणवत्ता की जांच करना और बीमारी के कारणों का पता लगाना है। प्रशासन नगर मैजिस्टे्रट की जांच पूरी होने के बाद चरणबद्ध ढंग से सुधारात्मक कदम उठायेंगे। गौरतलब हो कि प्रशासन ने 23 जुलाई को दोनों स्कूलों से लिए गए दूध का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। इसकी रिपोर्ट 18 जुलाई को आ गई। इसमें दूध के दोनों नमूने फेल पाये गये। इस मामले को गंभीरता से लेकर प्रशासन ने अक्षयपात्र और पराग संस्था के कर्मचारियों को नोटिस भेजा है। इसमें संस्था को सात दिनों के अंदर घटना के संबंध में मांगे गये सवालों का जवाब प्रस्तुत करना है। वहीं स्कूली बच्चों के बीमार होने की वजह मालूम करना भी प्रशासन के लिए चुनौती है। इसकी वजह प्रयोगशाला रिपोर्ट से भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

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