बच्चों की सेहत के साथ हो रहा खिलवाड़

जब से मीड-डे मील योजना शुरू हुई है तब से शायद ही कोई साल होगा कि इसमें अनियमितता न पायी गई हो। सरकार बच्चों को स्कूल से जोडऩे के लिए दिन प्रतिदिन मीनू में बदलाव कर रही है पर खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

स्कूsanjay sharma editor5ल खुलने के साथ ही मिड डे मील की समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। प्रशासन द्वारा तमाम जतन करने के बावजूद भी इस समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। आए दिन कहीं न कहीं प्राथमिक विद्यालय में खाने में कीड़े मिलने की सूचना मिलती है। बुधवार को लखनऊ के क्वींस इंटर कॉलेज में बच्चों को दोपहर में दिए गए कोफ्ते में कीड़ा मिला। सरकार-प्रशासन के अनेक बार चेतावनी देने के बाद भी स्थिति सुधर नहीं रही है। बच्चों के सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। कई बार मीड-डे का खाना खाने से बच्चे गंभीर रूप से बीमार पड़ चुके हैं।
जब से मीड-डे मील योजना शुरू हुई है, तब से शायद ही कोई वर्ष होगा कि इसमें अनियमितता न पायी गई हो। सरकार बच्चों को स्कूल से जोडऩे के लिए दिन प्रतिदिन मीनू में बदलाव कर रही है पर खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है। साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। घटिया राशन का इस्तेमाल हो रहा है। कहीं रसोई नहीं है तो कहीं बर्तन नहीं। कहीं राशन स्कूल तक तो पहुंचता है पर वह कहां जाता है इसका पता नहीं होता। ऐसी अनेक समस्याएं हैं जिससे यह योजना सही ढंग से नहीं चल रही है। इतना ही नहीं अधिकांश स्कूलों में तो बच्चों की शिकायत रहती है कि उन्हें भर पेट भोजन भी नहीं दिया जाता। कुछ स्कूलों में बच्चों को समय से गरम भोजन मिल रहा है पर दूर-दराज के गांवों में स्थिति ठीक नहीं है। कहीं-कहीं तो स्कूल में पूरा दिन बच्चों के लिये खाने की व्यवस्था करते ही गुजर जाता है, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। और तो और बच्चों को अच्छा खाना और मीनू के मुताबिक भी नहीं दिया जा रहा है।
केन्द्र सरकार तो इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पैसा देने में कोई कोताही नहीं बरत रही पर प्रदेश स्तर पर इसमें लापरवाही बरती जा रही है। पिछले वर्ष ही मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार के लिए हॉटकुक योजना शुरू की गई थी। इसका मकसद बच्चों को ताजा और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके अलावा 13 स्वयं सेवी संगठनों को भी इससे जोड़ा गया है ताकि बच्चों को समय से अच्छा भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इतना सब होने के बावजूद भी कई स्कूलों में मीड-डे मील योजना सही से क्रियान्वित नहीं हो पा रही है। इससे सुधार तो हुआ है पर बहुत ज्यादा सुधार की गुंजाइश अभी है, क्योंकि यह बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।

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