बख्शे नहीं जायेंगे आतंकवादियों को शह देने वाले: मोदी

  • ऐशबाग रामलीला मैदान में रामायण के पात्रों के सहारे आतंकवाद पर साधा निशाना
  • सर्जिकल स्ट्राइक पर सेना की तारीफ न करने पर प्रधानमंत्री को विपक्ष ने घेरा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दशहरे पर ऐशबाग रामलीला ग्राउंड में भगवान श्रीराम के उद्घोष से भाषण की शुरूआत की व रामायण के पात्रों के जरिए आतंकवाद के सफाए की बात कही। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को शह देने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। इसके साथ ही उन्होंने गंदगी को भी रावण का एक रूप बताया और उसके सफाए को आवश्यक बताया। इस कार्यक्रम से मोदी ने श्रीराम के बहाने कई निशाने साधे लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक का बिल्कुल जिक्र नहीं किया, जिसको लेकर विपक्षी दलों ने उन पर जमकर निशाना साधा।
भाजपा ने दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर तैयारी तो बहुत की थी, मगर पीएम लखनऊ दौरे में उतना चुनावी माहौल नहीं बना पाए जितनी उम्मीद भाजपा कार्यकर्ताओं को थी। दरअसल, भाजपा के लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि पीएम मोदी लखनऊ की रामलीला में सर्जिकल स्ट्राइक पर बोलेंगे और उससे वह चुनावी लाभ उठाने में कामयाब हो जाएंगे, मगर विपक्ष ने पीएम मोदी पर पहले ही इतना जोरदार हमला बोल दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी को लगा कि अब रामलीला मैदान से सेना के इस ऑपरेशन पर बोलना खतरनाक हो सकता है, लिहाजा वह इस मुद्दे पर बोलने से बचते नजर आए। अलबत्ता सेना के बयान की जगह उन्होंने अपना भाषण जय श्रीराम से शुरू करके जय श्रीराम पर खत्म करके कुछ संकेत देने की कोशिश जरूर की, मगर विपक्ष इससे भी कहां खामोश रहने वाला था। बसपा प्रमुख मायावती ने मौके की नजाकत को देखते हुए कह ही डाला कि मोदी जी को जटायु का युद्ध तो याद रहा मगर सेना ने जो जान हथेली पर रखकर काम किया उसे वे भूल गए। इससे पहले सीएम अखिलेश यादव भी कह चुके थे कि रामलीला जैसे स्थानों को राजनीति से दूर रहना चाहिए। जाहिर है पीएम मोदी के लखनऊ दौरे को लेकर जो राजनीति शुरू हुई उसकी चर्चा दूर तलक जाएगी।
दशहरे के मौके पर लखनऊ की ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला में मंगलवार को शिरकत करने आए प्रधानमंत्री मोदी ने बेहद सतर्कता से भाषण दिया। उन्होंने कूट शब्दों में सियासी संदेश देने की कोशिश की। रामलीला के मंच से दिए गए मोदी के भाषण और जय श्रीराम के उद्घोष का विपक्षी दल अपने-अपने ढंग से मायने निकालने में जुटा है। बसपा समेत कई विपक्षी दलों ने रामलीला में उनकी शिरकत और भाषण दोनों को सियासी करार दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने तो उनको उपदेश न देने की सलाह तक दे डाली है। सर्जिकल स्ट्राइक पर सेना का नाम लिए जाने पर बसपा प्रमुख ने मोदी की जमकर आलोचना की है। वहीं सपा ने कहा है कि रामलीला जैसे कार्यक्रमों को सियासत से दूर रहना चाहिए। दरअसल, ऐशबाग रामलीला कमेटी के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी यहां पहुंचे थे। उन्होंने यहां जय श्रीराम का उद्घोष किया और फिर लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने मंच से पाकिस्तान में भारतीय फौज द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में एक शब्द नहीं कहा। बताते चलें कि इस मामले पर विपक्ष ने भाजपा और मोदी दोनों को निशाने पर ले रखा है। हालांकि मोदी ने रामचरित मानस के रावण-जटायु युद्ध को आतंकवाद से जोडक़र व्याख्यायित किया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहली लड़ाई जटायु ने लड़ी थी। हम राम नहीं बन सकते लेकिन जटायु बनने की कोशिश तो कर ही सकते हैं। आतंकवाद को परास्त किए बिना मानवता की रक्षा नहीं हो सकती। मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद को शह देने वालों को बख्शा नहीं जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हम वे लोग हैं जो युद्ध से बुद्ध की ओर चले जाते हैं। हमें बुद्ध की जरूरत है। अपने भाषण में उन्होंने लोगों से अपने भीतर 10 रावण रूपी बुराइयों को खत्म करने की अपील भी की। मोदी ने जातिवाद, वंशवाद, साम्प्रदायिकता, अंधविश्वास, भ्रष्टाचार, गरीबी और अशिक्षा बालिका भ्रूण हत्या आदि को रावण का रूप बताया और इसे खत्म करने की बात कही। मोदी के भाषण पर बसपा प्रमुख मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर ले लिया है। मायावती ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने रामलीला में शामिल होकर जिस परंपरा की शुरुआत की है, वह केवल चुनावी स्वार्थ साधने वाला कदम है। रामलीला मैदान के आसपास लगे बैनर-पोस्टरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें सर्जिकल स्ट्राइक की सफलता के लिए सेना की बजाय मोदी को श्रेय दिया गया था, यह गलत है। सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत करने का आरोप लगाने वाली मायावती ने अब मोदी पर आतंकी कैंपो को ध्वस्त करने के लिए सेना की तारीफ नहीं करने का आरोप लगाया है। युद्ध से बुद्ध तक के मोदी के बयान पर उन्होंने कहा कि बेहतर हो दुनिया पहले ही बुद्ध के रास्ते पर चलने का प्रयास करें ताकि युद्ध की जरूरत ही नहीं पड़े। उन्होंने मोदी को उपदेश न देने की सलाह दी और कहा कि केवल उपदेशों से देश व समाज की तकदीर नहीं बदलने वाली है। सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए केंद्र व भाजपा शासित राज्यों को इससे जुड़े कानूनों का सख्ती से पालन कराना होगा। वहीं विपक्ष ने मोदी के जय श्रीराम उद्घोष को लेकर भी सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी इसे वोटों के धु्रवीकरण करने की कवायद के रूप में देख रहे हैं। जेडीयू नेता केसी त्यागी का कहना है कि मोदी धर्म के लिए नहीं वोट के लिए लखनऊ गए। वहीं दूसरी ओर भाजपा के लोग भी मोदी के भाषण से बहुत संतुष्टï नहीं है। भाजपाइयों को उम्मीद थी कि विस चुनाव के पहले लखनऊ आए मोदी अपने भाषण से कुछ गुल जरूर खिलाएंगे। नहीं कुछ तो सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में ही बोलेंगे लेकिन मंच से प्रधानमंत्री द्वारा ऐसा भाषण न दिए जाने से वे भी मायूस हैं। विपक्ष मोदी के रामलीला में शिरकत करने और उनके जय श्रीराम के उद्घोष के सियासी मायने निकालने में जुटा है।

Pin It