बंद होंगे राजधानी के 151 प्राइमरी स्कूल

बच्चों का दाखिला सहायता प्राप्त दूसरे स्कूलों में कराने को कहा गया
इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने सरकार पर लगाया ज्यादती का इल्जाम
निजी स्कूलों पर भी है दाखिले का दबाव

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने हाल ही में राजधानी के 151 स्कूलों को बंद करने का फरमान जारी किया है। इन प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को इन स्कूलों के बच्चों का दाखिला पास के सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में कराने को कहा गया है। इतना ही नहीं दाखिले के बाद सूचना तीन दिनों में देने का आदेश है। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
बेसिक शिक्षा विभाग से मिले आदेश के मुताबिक 151 प्राइमरी स्कूलों को अपने यहां पढ़ रहे बच्चों के लिए अब एक नया स्कूल खोजना होगा। शिक्षक इन बच्चों का दाखिला किसी परिषदीय मान्यता प्राप्त स्कूल में करा सकते हैं। इन स्कूलों ने सुबूत के तौर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी लखनऊ से भेजे गए पत्र की प्रति भी दिखाई। ऐसे में राजधानी के 151 प्राथमिक स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई मुश्किल में पड़ सकती है। एक तरफ सरकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के जरिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने की योजना बनाती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के फरमान सरकार की मंशा को गलत ठहराते दिख रहे हैं। मामले को लेकर इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने सरकार के रवैए पर अपनी नाराजगी जताई है। फेडरन के अध्यक्ष मधुसूदन दीक्षित का कहना है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निजी स्कूलों पर डाल रही है। उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ के 110 वार्डों में से 31 वार्डों में कोई भी सरकारी या सहायता प्राप्त विद्यालय नहीं हैं। जबकि हर वार्ड की औसत आबादी करीब 38 हजार है। इसलिए हमारी मांग है कि सरकार लखनऊ के इन स्कूलों को बंद करने से पहले स्कूलों में पढ़ रहे हर बच्चे की समुचित शिक्षा की व्यवस्था करे। इन बच्चों का दाखिला करीब के किसी सरकारी स्कूल या सरकारी सहायता प्राप्त परिषदीय या मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में दिलवाए। उन्होंने ने यह भी कहा कि आरटीई एक्ट 2009 में राज्य सरकारों को यह दायित्व दिया गया है कि वे इस एक्ट के आने के 3 साल के अंदर यानी 2013 तक पूरे प्रदेश में पर्याप्त स्कूल बनाए, लेकिन इस अधिनियम को पारित हुए 6 साल बीत गए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश शासन ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का पालन नहीं किया है। ऐसी स्थिति में सरकारी स्कूलों का बगैर इंतजाम किए सरकार निजी स्कूलों को बंद करके बच्चों को उनके शिक्षा प्राप्त करने के मौलिक अधिकार से ही वंचित कर रही है। सरकार खुद तो अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही है, दूसरी तरफ वह अपने दायित्वों का बोझ स्कूल प्रबंधन पर डालकर अपना दामन बचा रही है। ऐसे में शिक्षा विभाग हमारे साथ ज्यादती कर रहा है।
वहीं संस्था से जुड़े अन्य लोगों ने भी इस बात का विरोध करते हुए कहा है कि शासन अपनी जिम्मेदारियों को खुद ही उठाए नहीं तो हम लोगों को कोई अन्य कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

हम लोग तो चाहते हैं कि सभी बच्चों को शिक्षा मिले। हमारे यहां कर्मचारियों के बच्चे बिना किसी रोकटोक के पढ़ रहे हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह बच्चे अन्य बच्चों के साथ बैठकर हीन भावना के शिकार न हो जाए। इसलिए सरकार स्वयं ऐसे बच्चों के लिए उचित व्यवस्था करे।

-एसपी सिंह, मैनेजर, एलपीएस स्कूल।

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