बंद करो थानों की राजनीति: सीएम

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि कुछ कार्यकर्ता थाने और तहसील की राजनीति करते हैं साथ ही इशारों-इशारों में ही कार्यकर्ताओं के जमीन के कारोबार में जुड़े होने की बात कही। इसे लेकर बीजेपी और कांग्रेस अब सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री को पता है कि कार्यकर्ता थानों पर क्या कर रहे हैं तो उनके ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
सीएम अखिलेश ने लखनऊ में पार्टी दफ्तर में जिस अंदाज में कार्यकर्ताओं के जमीन के कारोबार में शामिल होने और थानों की राजनीति करने की बात कही उसे लेकर बीजेपी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने अब सीएम से सवाल पूछे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अब मुख्यमंत्री को ये याद आ रहा है कि कार्यकर्ता क्या कर रहे हैं जबकि पार्टी के मुखिया कितनी बार बैठकों में अपनी ही पार्टी के नेताओं, मंत्रियों पर जमीन जायदाद के कारोबार में शामिल होने की बात कह चुके हैं, लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि ये लोग कहते तो हैं लेकिन कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं होती।
वहीं कांग्रेस ने भी सीएम के इस बयान को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के नेता दुजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को ये पता है कि उनके कार्यकर्ता क्या कर रहे हैं तो उनके खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जब-जब प्रदेश में कानून व्यवस्था का मुद्दा गर्माता है तो सबका ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बात पार्टी के मुखिया और मुख्यमंत्री की ओर से की जाती है।
गौरतलब है की ये पहला मामला नहीं है जब सीएम अखिकेश यादव ने अपने पार्टी और कार्यकर्ताओ पर सवाल उठाये हों सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भी कई मौकों पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से लेकर सरकार के मंत्रियों तक पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब सपा सुप्रीमो से लेकर सीएम तक ये जानते हैं तो फिर उनके ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं होती दरअसल इसके पीछे भी एक सियासत है। माना जाता है अपने कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा कर मुद्दा विपक्ष के हाथ में जाने से रोकने की कोशिश होती है। जाहिर है पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव भी कई बार कार्यकर्ताओं को नसीहत दे चुके हैं और अब खुद मुख्यमंत्री ने भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिदायत दी है लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लगता है कि इन हिदायतों का कोई असर नहीं होता है।

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