बंटू यादव की हत्या में शामिल बिल्डर का नाम विवेचना के दौरान हटाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने जांच में लापरवाही की शिकायत पर दोबारा जांच कराने का दिया आदेश
नरही वार्ड में बंटू यादव की घर के बाहर गोली मारकर कर दी गई थी हत्या

captureआमिर अब्बास
लखनऊ। हजरतगंज थाना क्षेत्र के नरही वार्ड में बंटू यादव हत्याकांड में एक नया मोड़ सामने आया है। बंटू के परिजनों की तरफ से मामले की जांच में पुलिस पर लापरवाही और दोषियों के बचाने का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री से शिकायत की गई है,जिसमें विवेचना के दौरान मर्डर में शामिल बिल्डर का नाम हटवाने की आशंका व्यक्त की गई है। इस मामले की जानकारी होते ही मुख्यमंत्री ने बंटू मर्डर केस की जांच दोबारा करवाने का आदेश दिया है।
बंटू यादव हत्याकांड में पुलिस ने शिव यादव और वैष्णव को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन हत्या में शामिल कई अन्य लोगों के खिलाफ जांच के अदेश भी दिये गये थे। इस हत्याकांड में एक बिल्डर भी शामिल था, जिसका नाम विवेचना के दौरान हटाने का प्रयास किया गया। इस बात की जानकारी होते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की दोबारा जांच करने का आदेश दिया। ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो पुलिस रसूखदार लोगों के सामने बेबस नजर आती है, वह आम जनता को किस तरह से न्याय दिलाने में सहयोग करती होगी। यदि पुलिस की कार्यशैली ऐसी ही रही तो लोगों को पुलिस के ऊपर से विश्वास ही समाप्त हो जायेगा।
हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित नरही वार्ड से समाजवादी पार्टी के पार्षद अतुल यादव (40) उर्फ बंटू यादव को 1 नवंबर 2015 को उनके घर से कुछ दूरी पर दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी। वह अपने घर से कुछ ही दूरी पर पुताना यादव (70) की शव यात्रा में शामिल होने गए थे। इसी दौरान बाइक सवार दो युवकों ने बंटू पर फायर झोंक दिया। गोली चलने की आवाज सुनकर भगदड़ मच गई थी। खून से लथपथ बंटू को पहले सिविल अस्पताल और उसके बाद ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। गोली बंंटू की कनपटी को पार करती हुई निकली थी, इसलिए चिकित्सकों ने सर्जरी कर बंटू को बचाने का पूरा प्रयास किया लेकिन घटना के सांतवे दिन उसकी मौत हो गई थी।
इस हत्याकांड में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर शिव यादव को वारदात में इस्तेमाल तमंचे के साथ घटना के अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथ अन्य नामजद आरोपी को भी पकड़ा गया था। पुलिस के हत्थे चढ़े हिस्ट्रीशीटर ने अफसरों के सामने कहा था कि बंटू की हत्या के इरादे से चार महीने से तमंचा लेकर घूम रहा था। मौके की तलाश थी, गाली का जवाब गोली से दिया है। वहीं दूसरे आरोपी वैष्णव ने खुद को बेकसूर बताया और खुद को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में फंसाए जाने की बात कही थी। तब तत्कालीन एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने कहा था कि बंटू यादव पर हमले के मुख्य आरोपी शिव यादव को पुलिस, क्राइम ब्रांच व सर्विलांस सेल की टीम ने गिरफ्तार किया है। जबकि इस मामले में सामने आया एक नामचीन बिल्डर के नाम भी शामिल है लेकिन पुलिस ने उस नाम का खुलासा नहीं किया। इसके बाद से बंटू हत्याकांड की तफ्तीश सिर्फ और सिर्फ कागजों में ही कैद होकर रह गई। इस हत्या में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ जांच के अदेश भी दिये गये थे। पुलिस ने बंटू की हत्या में सिराज बिल्डर का नाम सामने आने की बात भी कही थी लेकिन उसका नाम पुलिस ने अपनी विवेचना से हटा दिया। इस बात की की जानकारी होते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एसएसपी मंजिल सैनी को मामले की दोबारा जांच करवाने के आदेश दे दिये है। इसलिए विवेचना से बिल्डर का नाम हटाने में पुलिस पूरी तरह से सफल नहीं हो सकी। जबकि हज़रतगंज थाना प्रभारी विजयमल यादव को हत्याकांड से पहले कई बार आरोपी बिल्डर के गंगा सागर अर्पाटमेंट में बैठे देखा गया था। लेकिन हत्या के बाद से ही उन्होंने उस अर्पाटमेंट में बैठना छोड़ दिया।

डीजीपी का आदेश ताक पर

हाल ही में डीजीपी ने आदेश दिया था कि पुलिस विभाग के सारे अधिकारी अपने सीयूजी नंबर पर आने वाली फोन काल्स रिसीव करेंगे। लेकिन बंटू हत्याकांड की अपडेट जानने के लिए एसएसपी मंजिल सैनी को लगातार फोन किया गया, तब जाकर पीआरओ ने फोन उठाया और मैडम के व्यस्त होने की जानकारी दी। लेकिन फोन किये जाने के चार घंटे बाद भी एसएसपी ने मामले की गंभीरता को जानने के बाद भी बात करने की जरूरत नहीं समझी। इसी तरह हजरतगंज थानाध्यक्ष को सीयूजी नंबर पर फोन किया गया लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं की। ऐसे में जब पुलिस विभाग के मुखिया के आदेश को ही लोग नहीं मानेंगे, तो आम जनता की सुनवाई कितनी होती होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

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