बंगाल में हिंसा के बावजूद बंपर वोटिंग जारी, दोपहर एक बजे तक 55 फीसदी मतदान

  • टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच झड़प हुई
  • चुनाव आयोग ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए किए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

17 APRIL PAGE11 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बंगाल। बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में रविवार को 56 सीटों पर बंपर वोटिंग चल रही है, लेकिन बंगाल में कई जगह हिंसा की खबरें भी आई हैं। बीरभूम में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में झड़प होने से 8 लोग घायल हो गए तो मालदा में सीपीएम और टीएमसी कार्यकर्ता भिड़ गए। मालदा में चुनावी हिंसा में 7 लोग घायल हुए हैं।
बंगाल में अलीपुर द्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा और बीरभूम में मतदान शुरू हो गया. कुल 56 विधानसभाओं के लिए वोटिंग चल रही है। 1 बजे तक बंगाल में 55.94 फीसदी मतदान हो चुका है। इनमें से पांच सीटें अलीपुर द्वार, 7 जलपाईगुड़ी, 6 दार्जिलिंग, 9 उत्तर दिनाजपुर, 6 दक्षिण दिनाजपुर, 12 मालदा और 11 बीरभूम में हैं।
कहीं भिड़े टीएमसी- बीजेपी समर्थक, तो कहीं ईवीएम बंद
चुनाव के दौरान बीरभूम जिले से झड़प की भी खबर आई है। बोलपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 78 पर सुबह टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच झड़प हो गई। समर्थकों के बीच हुई इस झड़प में तीन लोगों के घायल होने की खबर है। जलपाईगुड़ी में मल नगरपालिका के बूथ नंबर 20 पर वोटिंग मशीन काम नहीं कर रही है।
चुनाव आयोग की सुरक्षा कड़ी
चुनाव आयोग ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और चॉपरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। अलीपुर द्वार में सेंट्रल फोर्स की 68 कंपनियों को तैनात किया गया है जबकि 1302 पोलिंग बूथों(306 संवेदनशील बूथों समेत) पर प्रदेश पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।
पीएम मोदी की अपील
पीएम नरेंद्र मोदी ने सुबह ट्विटर पर लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोट देने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज वोटिंग का रिकॉर्ड बना दिया जाए।

सहम कर कहती रही पड़ोसियों से, चलो एक साथ मर जाते हैं

  • एक साल में इन गांवों में शादियां तो हुई हैं, लेकिन कहीं बाजा नहीं बजा। न ही खुशियां मनाई गई। किसी ने नए कपड़े नहीं बनवाए
  • भूकंप के बाद मांदरे गांव के 65 घरों में रहनेवाले लोगों को गांव खाली करना पड़ा भूकंप उनकी जमीन तक निगल गया

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
काठमांडू। पिछले साल 25 अप्रैल को आए भूकंप से नेपाल के तीन गांव बारपक, मांदरे और लाप्राक तबाह हो गए थे। भूकंप का केंद्र बारपक ही था। सबसे ज्यादा तबाही भी यहीं हुई। नेपाल के सबसे बड़े हादसे के एक साल बाद यहां क्या हाल है जहां मिट्टी के घर देखने आते थे टूरिस्ट…
जिन मिट्टी के घरों को देखने टूरिस्ट आते थे, वह नहीं रहे। स्टोन स्लेट की जो संकरी सडक़ गोरखा को बारपक से जोड़ती थी वो अब सिर्फ यहां-वहां फैले पत्थरों और उखड़ी चट्टानों का पगडंडीनुमा रास्ता रह गया है। काठमांडू से 145 किमी दूर है गोरखा। जिसे हम रास्ता कह भर सकते हैं, वहां से दिन में चार बसें गुजरती हैं।
यहां भूकंप ने छीन लिया बचपन
भूकंप ने सिर्फ घर नहीं छीने, बचपन भी छीन लिया है। बारपक उस दिन से ही दुनिया के नक्शे पर आ गया था जब पिछले साल 25 अप्रैल को आए भूकंप का एपिसेंटर बना था। बारपक में 1380 घर होते थे। भूकंप आया तो बमुश्किल 30-40 कॉक्रीट से बने घर खड़े रह पाए। नेपाल के सबसे घनी आबादी वाले बारपक में टूरिस्ट मिट्टी और पत्थर के बने पारंपरिक घर देखने ही आते थे। पहले कोई कॉक्रीट का घर बनाता था तो यहां के बुजुर्ग नाराज होते थे। भूकंप में सिर्फ सीमेंट के बने घर बचे रहे तो बुजुर्ग भी अब वैसे ही घर बनाने की हिदायत दे रहे हैं।
गांव की संतामाया तब 8 महीने प्रेगनेंट थीं। घर के मलबे में चार घंटे तक उनका पैर धंसा रहा। असर कोख में मौजूद उजल पसांग पर भी हुआ। जब उसका जन्म हुआ था तो उसके चेहरे पर चोट के निशान थे। उस वक्त 22 साल की गम्या गुरुंग भी गर्भ से थी। भूकंप में पति की मौत हो गई तो ससुराल वालों ने इसका इल्जाम गम्या पर मढ़ दिया। उसे घर से निकाल दिया।अब वो 11 महीने के बेटे के साथ किराए का कमरा लेकर रहती है। बेटे और पति की मौत का सदमा फूलदानी घानी सह न सकी।
वो ये सोचते हुए मानसिक रोगी हो गई कि उनके पास अब कुछ नहीं बचा। कांची गुरुंग तो कई दिनों तक अपने पड़ोसियोंं को कहती रही कि चलो सभी साथ चलकर मर जाते हैं।

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