फेरबदल के बहाने नसीहत

प्रदेश सरकार के 8 मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया गया और 9 मंत्रियों के विभाग छीन लिए गए। प्रदेश की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल है। एक साथ इतने मंत्रियों पर कार्रवाई कभी नहीं हुई है। मंत्रिमंडल में कल जो फेरबदल हुई इसकी पृष्ठïभूमि 26 अक्टूबर को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के आवास पर हुई पंचायत में बनी थी।

sanjay sharma editor5त्तर प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सपा संगठन और अन्य मंत्रियों को नसीहत देने की कोशिश की है। कल प्रदेश सरकार के 8 मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया गया और 9 मंत्रियों के विभाग छीन लिए गए। प्रदेश की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल है। एक साथ इतने मंत्रियों पर कार्रवाई कभी नहीं हुई है। मंत्रिमंडल में कल जो फेरबदल हुई इसकी पृष्ठïभूमि 26 अक्टूबर को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के आवास पर हुई पंचायत में बनी थी। मुलायम ने अपने घर के सभी सदस्यों को इस पंचायत में तलब किया था। सपा महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव, शिवपाल यादव और खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी बैठक में मौजूद थे। उस दिन हुई बैठक के बाद से ही खबरें आने लगी थीं कि कई मंत्रियों की छुट्टïी होगी और कई लोगों को किनारे किया जाएगा। लेकिन बिहार चुनाव की वजह से यह कार्रवाई रुकी हुई थी। जैसे ही बिहार चुनाव खत्म हुआ मुख्यमंत्री ने अपना फैसला सुना दिया। इस बहाने सपा सरकार ने यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि वह कमजोर नहीं है।
इस खबर को सुनने के बाद सपा कार्यकर्ता भी चौंक गए होंगे। ऐसा नहीं है कि मंत्रियों पर कार्रवाई नहीं हुई है। मायावती के शासनकाल में भी कई मंत्री बर्खास्त किए गए थे लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मंत्री बर्खास्त पहली बार किए गए हैं। सरकार ने इस बहाने से बड़ा संदेश दिया कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनकी वजह से सरकार पर उंगली उठ रही थी। कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्षी पार्टियां गाहे-बगाहे घेरती ही रहती हैं। इसके साथ ही पार्टी में शामिल कई बड़े नेताओं की गतिविधियों की वजह से भी सरकार की काफी किरकिरी हो चुकी है। प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और बिगड़ती कानून व्यवस्था पर अनेकों सवाल उठ रहे हैं। जबकि मुलायम सिंह यादव से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल गाहे-बगाहे अपने मंत्रियों और सपा कार्यक्रताओं को थानों से दूर रहने और जनहित में राजनीति करने की नसीहत दे चुके हैं, फिर भी कई मंत्रियों के बड़बोलेपन की वजह से सरकार की किरकिरी हुई। सपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री के लाख समझाने के बावजूद भी कोई सुधार नहीं दिखा।
फेरबदल का एक और बड़ा कारण है, लोकसभा चुनावों में मिली हार। लोकसभा चुनाव में सपा को सिर्फ पांच सीटें मिली थीं, वह भी मुलायम सिंह के परिवार के लोगों को। लोकसभा चुनाव के बाद भी ऐसी खबरों को बल मिला था कि मंत्रिमंडल में बदलाव किया जाएगा लेकिन हुआ नहीं। फिलहाल अखिलेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाकर सपा कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं को नसीहत दी है।

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