फुटपाथ पर आशियाना

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इसे गरीबों की मजबूरी कहेंगे या उनके द्वारा किया गया अतिक्रमण? दूर-दूर के शहरों से राजधानी में रोजी-रोटी कमाने के लिये आने वाले इन मजदूरों के लिये आशियाने का कही कोई इंतजाम नहीं है। जिसके चलते यह लोग जहां काम करते हैं वहीं अपने रहने का भी अस्थायी बंदोबस्त कर लेते हैं। इनकी दो वक्त की रोटी का इंतजाम, स्नान और कपड़े सुखाने का काम रोड के किनारे ही होता है।

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