फसलों के मुआवजे में भी खेल

जिले में 30 करोड़ 35 लाख रुपये मुआवजे पर खर्च, फिर भी किसानों में असंतोष

प्रभात तिवारी
लखनऊ। जिले में सूखा प्रभावित फसलों का मुआवजा देने के नाम पर 30 करोड़ 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें चारों तहसीलों के अंतर्गत आने वाले 308 गांवों को लाभान्वित किया गया है। खराब फसलों के अनुपात में मुआवजा बांटने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसके बावजूद हजारों किसान सहायता से वंचित हैं। लाभार्थियों के चयन पर भी सवाल उठा रहे हैं।

जिला प्रशासन की तरफ से सदर, मोहनलालगंज, मलिहाबाद और बीकेटी चारों तहसील क्षेत्रों में ओलावृष्टि से खराब होने वाली फसलों का सर्वे किया गया था। इसमें जिलाधिकारीअपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और लेखपाल स्तर के अधिकारियों की रिपोर्ट तैयार हुई, जिसमें 308 गांवों को ओलावृष्टि से प्रभावित माना गया। इन सभी गांवों में फसलों के नुकसान के अनुपात में किसानों को मिलने वाले मुआवजे की रकम तय कर दी गई। आपदा प्रबंधन विभाग ने जिले में ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान का मुआवजा बांटने के लिए प्रत्येक तहसील को सात करोड़ 58 लाख 75 हजार रुपये की धनराशि सौंप दी। इसके साथ ही तहसील क्षेत्रों में बांटी जाने वाली मुआवजे की धनराशि और लाभान्वित होने वाले व्यक्तियों की रिपोर्ट मांगाई जा रही है। 30 जून 2015 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो चारों तहसीलों में कुल मिलाकर 73 हजार 304 किसानों को ओलावृष्टि से खराब होने वाली फसलों का मुआवजा दिया जा चुका है। इसके साथ ही ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान के अनुपात में किसानों को मुआवजा बांटने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसलिए लाभान्वित होने वाले किसानों का सही आंकड़ा पता कर पाना भी मुश्किल लग रहा है।

सरकार की तरफ से तय मानक
प्रदेश सरकार ने ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान का मानक तय कर रखा है। इसमें सर्वप्रथम फसल का 25 प्रतिशत नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा देने का नियम बनाया गया लेकिन सर्वे के बाद सौंपी गई रिपोर्ट में चारों तहसीलों में पीडि़त किसानों की संख्या 500 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। इस मानक के खिलाफ किसान और जन प्रतिनिधि दोनों ने आवाज उठानी शुरू कर दी। आखिरकार सरकार ने 50 प्रतिशत फसलों का नुकसान होने पर मुआवजा देने का मानक तय कर दिया। इसके बाद गांवों का सर्वे करने का काम शुरू हुआ। सबसे पहले लेखपालों ने अपनी सर्वे रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद उपजिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व और जिलाधिकारी ने भी बहुत से गांवों का दौरा किया। आखिरकार ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान की जद में आने वाले किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू की गई। अब लाभान्वित होने वाली गांवों की संख्या 308 और लाभान्वित होने वाले किसानों का आंकड़ा 73 हजार 304 पहुंच चुका है। इसके बावजूद कुछ और किसान फसलों के नुकसान का आंकड़ा पेश कर मुआवजे की रकम मांग रहे हैं। मुआवजा मिलने से वंचित किसानों ने तो सरकारी सर्वे पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया है। इनका आरोप है कि लाभान्वित होने वाले किसानों का आंकड़ा तैयार करने में भी काफी खेल हुआ है, जिसकी वजह से लाभान्वित होने वाले किसानों का आंकड़ा 50 प्रतिशत फसलों के नुकसान का मानक निर्धारित होते ही 73 हजार 304 पहुंच गया। जबकि 25 प्रतिशत फसलों के नुकसान का मानक निर्धारित होने पर महज 500 किसान पीडि़त माने गये थे। ऐसे में सर्वे और मुआवजे के रूप में बांटी जा रही 30 करोड़ 35 लाख रुपये की धनराशि पर संदेह होना लाजमी है।

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