फर्जी डिग्री का खेल

sanjay sharma editor5पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से देश के अलग-अलग क्षेत्रों से फर्जी डिग्री के सहारे नौकरियां पाने के खुलासे हुये हैं उसने यह सोचने पर विवस कर दिया है कि फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले इन लोगों ने अपने-अपने संस्थानों में जो भी कार्य किये होंगे वह किस स्तर के होंगे।

देश भर से आये दिन आ रहीं सरकारी नौकरियों में फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल की खबरों ने इस बात पर सोचने को मजबूर कर दिया है कि बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों से जारी होने वाली सभी डिग्रियां असली हैं या फर्जी। एक तरफ कड़ी मेहनत कर घंटों पढ़ाई करने के बाद लाखों छात्र वास्तविक डिग्रियां पाने के बाद भी एक अदद नौकरी की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर के चक्कर लगाते रहते हैं तो वहीं जुगाड़ और पैसे के दम पर कुछ जालसाज फर्जी डिग्रियों के सहारे केंद्र एवं प्रदेश सरकारों के तमाम संस्थानों में आसानी से अच्छे-अच्छे पदों पर आसीन हो जाते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ फर्जी डिग्री के सहारे नौकरियों पर काबिज हुये लोग ही गलत हैं या फिर जिस माध्यम से और जिन संस्थानों से उन्हें यह फर्जी डिग्रियां हासिल हुईं वहां के जिम्मेदार उनसे भी बड़े गुनाहगार हैं।
फर्जी डिग्रियों का खेल सिर्फ निम्रस्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बड़े-बड़े लोगों की डिग्रियों पर आज सवाल उठ रहे हैं। चाहे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर का मामला हो या केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्रियों पर उठ रहे सवाल हों। ये सभी मामले बताते हैं कि फर्जी डिग्री का इस्तेमाल किस हद तक हो रहा है। पहले यदा-कदा फर्जी डिग्रियों की खबर सुनने को मिलती थी पर आज के इस आधुनिक दौर में फर्जी डिग्रियों का बोलबाला सा हो गया है। अफसोस! सरकारें ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं और फर्जी डिग्री के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। इसके अलावा देश की प्रतिष्ठिïत परीक्षाओं में भी फर्जी लोगों द्वारा परीक्षा दिये जाने के मामले भी प्रकाश में आते रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से देश के अलग-अलग क्षेत्रों से फर्जी डिग्री के सहारे नौकरियां पाने के खुलासे हुये हैं उसने यह सोचने पर विवश कर दिया है कि फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले इन लोगों ने अपने-अपने संस्थानों में जो भी कार्य किये होंगे वह किस स्तर के होंगे। अभी हाल ही में यूपी के लखीमपुर खीरी से अनुदेशक भर्ती के दौरान जिस तरह से सैकड़ों फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल का मामला प्रकाश में आया था उससे तो यही लगता है कि जो लोग फर्जी डिग्री के सहारे शिक्षक की नौकरी पाना चाहते थे अगर वह कामयाब हो जाते तो देश के भविष्य को क्या और कैसी शिक्षा देते।
यह अकेला मामला नहीं जहां फर्जी डिग्री के इस्तेमाल का खुलासा हुआ हो बल्कि दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री फर्जी डिग्री के चलते ही जेल की हवा भी खा चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में बिहार, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश में फर्जी डिग्री के कई मामले सामने आये हैं। उससे तो अब वास्तविक डिग्रीधारकों के भविष्य पर भी खतरा मडराता नजर आने लगा है। सरकारों को इस दिशा में सक्रियता दिखाने व शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर देना चाहिये।

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