प्राइवेट अस्पतालों की गैलरी में भी भर्ती हैं मरीज

  • दर्जन भर से अधिक लोगों में डेंगू पॉजिटिव
  • अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा इलाज

 वीरेन्द्र पांडेय
6लखनऊ। राजधानी में बुखार के मरीजों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। मोहनलालगंज, चिनहट, फैजुल्लागंज, महानगर, रहीम नगर और इन्दिरा नगर के लोगों में डेंगू को लेकर काफी दहशत है। इस इलाके में कई लोगों की डेंगू की वजह से मौत हो चुकी है। हाल ही में दो स्टूडेंट्स की डेंगू से मौत होने की वजह से क्षेत्रीय लोग और अधिक डर गये हैं। महानगर से लेकर इन्दिरा नगर क्षेत्र में अब तक नगर निगम को ओर से फागिंग भी नहीं करायी गयी है। इसलिए लोग मच्छरों से फैलने वाले रहस्यमयी बुखार और डेंगू को लेकर काफी डरे हुए हैं।
परिवार कल्याण एवं मातृ शिशु कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रविदास मेहरोत्रा अधिकारियों को सुबह और शाम दोनों समय वार्डों में रोजाना छिडक़ाव का आदेश दे रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की तंद्रा नहीं टूट रही है। इन्दिरा नगर से लेकर महानगर क्षेत्र में ही 70 से ज्यादा लोग तेज बुखार की चपेट में हैं, जिसमें कुछ मरीजों में डेंगू की पुष्टिï भी हो चुकी है। वहीं कई लोग टाइफाइड और मलेरिया से भी पीडि़त हैं। महानगर तथा रहीम नगर में लगभग 40 लोग डेंगू की चपेट में हैं, जिनका फातिमा, शेखर और अन्य निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। वहीं इन्दिरा नगर के कुछ लोगों का इलाज शेखर अस्पताल और कुछ का इलाज महानगर स्थित एक निजी अस्पताल के साथ ही लोहिया तथा भाउराव देवरस अस्पताल में चल रहा है। इसके बावजूद एक महीने से ज्यादा का समय होने को आया नगर निगम से लेकर स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी मोहल्ले में झांकने तक नहीं आया। इन्दिरा नगर में नगर निगम के सफाई कर्मी बिना 100 रुपये लिये सफाई ही नहीं करते हैं।

अस्पतालों की ओपीडी में भी भर्ती हो रहे मरीज

डेंगू की ऐसी भयावह स्थिति इससे पहले कभी नहीं हुई। लेकिन उदासीन स्वास्थ्य महकमा डेंगू को महामारी बनता देख रहा है। आलम यह है कि शहर में डेंगू से 110 मौतें होने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकार गंभीर होने और उन मौतों से सबक लेने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ,नगर निगम तथा जिला प्रशासन के पास इस बीमारी से निपटने की कोई ठोस रणनिति नहीं है, जिसके चलते सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक में मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं बची है। हालात यह है कि अस्पतालों में मरीजों का इलाज स्टे्रचर पर चल रहा है। इसके अलावा निजी अस्पतालों, विशेषकर जिन अस्पतालों में ब्लड बैंक हैं, वहां पर रास्ते से लेकर ओपीडी तथा वेटिंग ऐरिया में भी मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसके बाद भी दर्जनों मरीज इलाज के लिए वेटिंग में है। इन्दिरा नगर के शेखर अस्पताल में आने-जाने वाले रास्तें में वेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं गोमती नगर के फोर्ड अस्पताल में मरीजों को चिकित्सक की ओपीडी में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। साथ ही यहां पर वेटिंग एरिया में लगे वेडों पर मरीजों को भर्र्र्ती कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

ट्रामा सेंटर फुल

केजीएमयू का ट्रामा सेंटर मरीजों से फुल है। गांधी वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के लिे बिस्तर ही नहीं बचे हंै। लोहिया अस्पताल में सिफ ारिश वाले मरीज भी वेंटिग में है। बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में चैनल गेट तक मरीजों को भर्ती कर लिटाया गया है। मरीज परेशान और तीमारदार बौखलाये है। रिजनों की समझ में नहीं आ रहा कि वे कहां क्या करें। वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन भी डेंगू और बुखार समेत अन्य बीमारी के मरीजों की बढ़ी संख्या से परेशान है। मरीजो की संख्या बढऩे के कारण डॉक्टरों को जमीन पर लेटा कर मरीज का इलाज करना पड़ रहा है। ब्लड बैंक में भी प्लेटलेट्स के लिए तीमारदार चक्कर लगा रहे है।

पैसा कमाने के चक्कर में मरीजों की जान के साथ हो रहा खिलवाड़

राजधानी के निजी अस्पतालों में पैसा कमाने के लिए मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन अस्पतालों में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। वहीं मरीज अच्छे इलाज के लिए यहां पर लाइन लगाये खड़ा है। ऐसे में इन अस्पतालों की चांदी है। जानकारों की माने तों शेखर तथा फोर्ड अस्पताल राजधानी के माने-जाने अस्पताल हैं। यहां पर डेंगू से पीडि़त मरीजों का इलाज मानकों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। यहां इन मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखने की बजाय खुले जगह पर इलाज किया जा रहा है। मरीजों के बेडों पर मच्छरदानी तक नहीं लगायी गयी है।

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