प्रशासन के रडार पर खांसी-बुखार की दवा खरीदने वालों का ब्यौरा नहीं देने वाले मेडिकल स्टोर्स

प्रशासन के रडार पर खांसी-बुखार की दवा खरीदने वालों का ब्यौरा नहीं देने वाले मेडिकल स्टोर्स

शासन के नियमों का कर रहे हैं उल्लंघन
शहर में करीब 60 फीसदी मेडिकल स्टोर संचालक नोट नहीं कर रहे दवा लाने-ले जाने वालों का ब्यौरा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के मेडिकल स्टोर प्रशासन की रडार पर है। वे शासन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के आदेश के बाद भी मेडिकल स्टोर संचालकों ने नियम ताक पर रख दिए है। कई ऐसे मेडिकल स्टोर हैं जो बिना ब्यौरे के ही दवा बेच रहे हैं। विभाग के जानकारों की माने तो करीब 60 फीसदी मेडिकल स्टोर संचालक दवा लाने-ले जाने वालों का रजिस्टर में ब्यौरा नहीं दर्ज कर रहे हैं। जबकि ब्यौरा रखने के लिए तीन बार आदेश जारी हो चुके हैं।
कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्टï रूप से कहा था कि मेडिकल स्टोर संचालक सर्दी ,खांसी, बुखार की दवा लेने वालों का ब्यौरा रखे ताकि बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके। ब्यौरे से पता चल जाता कि मरीज लगातार कौन सी दवाइयों का सेवन कर रहा है। शक के आधार पर संक्रमितों की पहचान हो जाती मगर दवा संचालकों की लापरवाही के चलते ऐसे लोग ट्रेस नहीं हो रहे हैं। हर इलाके में संक्रमण बढ़ रहा है। अभी छह दिन पहले डीएम ने इंदिरानगर, गांजीपुर क्षेत्र सहित कर्ई इलाकों का दौरा किया था। अरावली में मेडिकल स्टोरों पर छापे मारे। दर्ज ब्यौरा मांगा, अधिकतर के पास रिकॉर्ड ही नहीं था। डीएम ने ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाया। साथ ही एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई भी की। बता दें कि कोरोना के लक्षण व बदलते मौसम में होने वाली समस्याओं के लक्षण एक जैसे हैं। इस कारण शासन ने निर्देश दिए थे कि मेडिकल स्टोर पर इन लक्षणों की दवा लेने वालों का पूरा ब्यौरा नोट किया जाए। तब भी संचालक गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं।

दवा खाकर घटा रहे शरीर का तापमान

नाम न बताने की शर्त पर एक मेडिकल संचालक ने बताया कि कई लोग दवा लेकर संक्रमण को छिपा रहे हैं। इससे अन्य लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया हैं, जो उचित नहीं है। कई बार हमने कई लोगों को टेस्ट कराने के लिए कहा लेकिन वह एक दो दिन की दवाएं लेते है और चलते बनते है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए शरीर का तापमान घटाने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। दवा खाने के बाद स्क्रीनिंग करने पर तापमान सामान्य आ जाता है। ये लोग अपना नाम पता भी नहीं बताते हैं।

सामान्य फ्लू समझकर लोग खरीद लेते हैं दवा
कोरोना संक्रमण व बदलते मौसम में बुखार, सर्दी, खांसी के एक जैसे लक्षण हैं, जिससे तय करना मुश्किल हो रहा है कि यह लक्षण किस संक्रमण के हैं। सामान्य फ्लू समझकर लोग मेडिकल स्टोर से दवाएं ले रहे हैं और घर से बाहर बेपरवाह घूम रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोरोना के फैलने का खतरा दस गुना बढ़ गया है। इसी के चलते शासन ने निर्देश दिए थे कि यदि कोई भी सामान्य संक्रमित व्यक्ति मेडिकल स्टोर से बुखार से लेकर सर्दी, जुकाम की दवा लेता है तो उसके नाम सहित पता आदि का ब्यौरा नोट किया जाए, जिससे उन लोगों का पता आसानी से चल सके और समय पर उनका टेस्ट कराकर इलाज उपलब्ध कराया जा सके। इससे संक्रमण के स्प्रेड की चेन पर भी रोक लगेगी।

फोर पीएम ने की पड़ताल तो सामने आई सच्चाई
फोर पीएम के रिपोर्टर ने जब बुखार और गला खराब होने की बात कहकर मेडिकल स्टोर पर दवा मांगी है तो स्टोर संचालक ने दो दवाओं के साथ उसे कफ सीरप भी थमा दिया। रुपए ले लिए पर ब्यौरा नहीं लिया। तीन से चार इलाकों के मेडिकल स्टोर में यही हाल दिखाई पड़ा। एक इलाके में संचालक ने 150 रुपये की दवा देने के साथ कहा कि यदि इन दवाओं का कोई असर नहीं हो तो बताइगा हम दूसरी दवा देंगे। यही नहीं मेडिकल स्टोर संचालक डाटा दिखाने से भी कतराते हैं। कईयों को तो सरकार के इस आदेश का ही पता नहीं है। अधिकांश का कहना है कि इसका सिस्टम पता नहीं है। कैसरबाग चौराहे पर स्थित खालसा मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि हमें लखनऊ मेडिकल एसोसिएशन की ओर से निर्देश नहीं मिले तो हम क्यूं सर्दी, खांसी, जुकाम की दवा खरीदने वालों का डाटा रखें।

कोरोना काल में लोग अस्पताल न जाकर मेडिकल स्टोरों से दवाइयां ले रहे हैं, जो कि ऐसे समय में ठीक नहीं है। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी शासन का आदेश मानना चाहिए। हमने कई बार इस बात को उठाया भी है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। कोरोना काल में सबको जागरूक होना पड़ेगा। दवा संचालकों को भी सरकार के बनाए गए नियम-कानून का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
गिरीराज रस्तोगी, अध्यक्ष, लखनऊ मेडिकल एसोसिएशन

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