प्रयोगशाला बनकर तैयार होने से पहले खरीदी गई दो दर्जन फोरेंसिक वैन

  • महानगर स्थित मुख्यालय के बाहर पांच महीने से फांक रही हैं धूल
  • प्रदेश के 18 मंडलों में फोरेंसिक लैब बनाने का काम अब तक नहीं हो सका पूरा

धनंजय शुक्ला
Captureलखनऊ। प्रदेश सरकार ने फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में विलंब और साक्ष्यों के अभाव में खुलेआम घूमने वाले अपराधियों पर नकेल कसने के लिए मंडल स्तर पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला खोलने का निर्णय लिया था। इसके लिए संबंधित मंडलों को बजट भी आवंटित कर दिया गया है। प्रदेश के विभिन्न मंडलों में प्रयोगशाला का निर्माण कार्य अभी अधूरा ही है। लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों ने प्रयोगशाला बनकर तैयार होने से पहले ही दो दर्जन फोरेंसिक वैन खरीद ली। ये सभी वैन महानगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला मुख्यालय के सामने करीब पांच महीने से धूल फांक रही हैं। इस वैन का कोई पुरसाहाल नहीं है।
प्रदेश के 18 मंडलों में फोरेंसिक प्रयोगशाला बनाने का काम चल रहा है। इसमें कई मंडलों में प्रयोगशाला के लिए भूमि चिन्हित करने का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जबकि कई मंडलों में प्रयोगशाला का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। वहां फोरेंसिक लैब में काम करने के लिए अलग-अलग कैडर के कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। ये लैब कब तक खुलेगी, इस पर अभी भी संदेह बरकरार है। लेकिन सूबे के कुछ अधिकारियों ने कमीशनखोरी के चक्कर में करीब दो दर्जन फोरेंसिक वैन खरीद लीं। ये सभी वैन पिछले पांच माह से महानगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मुख्यालय में खुले आसमान के नीचे खड़ी हैं। इतना ही नहीं कमीशन के फेर में खरीदी गयी वैन के रख-रखाव का भी उच्चाधिकारियों ने अबतक कोई इंतजाम नहीं किया है। बताया जा रहा है कि यह फोरेंसिक वैन हाई टेक्नोलॉजी से लैस हैं। कमीशनखोरी के चक्कर में प्रयोगशाला बनने से पहले खरीदी गई वैन की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। लेकिन रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये कीमत की दो दर्जन वैन कंडम गाडिय़ों की तरह खुले आसमान के नीचे खड़ी धूल फांक रही हैं। यू भी कह सकते हैं, कि ऐसा ही रहा तो, जब तक प्रयोगशाला बनकर तैयार होगी, तब तक शायद वैन चलने-फिरने की स्थिति में ही न रहें।

प्रदेश में फोरेंसिक की 18 नई लैब बन रही हैं। उन लैब से महानगर लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला मुख्यालय के बाहर खड़ी वैन का कोई मतलब नहीं है। मुख्यालय के बाहर जितनी भी वैन खड़ी हैं, वह अलग-अलग डिस्ट्रिक के एसपी को एलॉट की गई है। इन गाडिय़ों में फोरेंसिक इंस्ट्रूमेंट रखने के लिए रैक बनाने का काम चल रहा है। काम पूरा होते ही रवाना कर दिया जायेगा।
राजकुमार विश्वकर्मा
एडीजी, टेक्निकल

तीन श्रेणियों में खुलेंगी प्रयोगशालाएं
प्रदेश में मण्डल स्तर पर खोली जा रहीं 18 प्रयोगशालाएं ए, बी और सी तीन श्रेणी की होंगी। इसमें कन्नौज, गाजियाबाद और वाराणसी में ए श्रेणी की प्रयोगशालाएं प्रस्तावित हैं। इन प्रयोगशालाओं में लाई डिटेक्शन जांच की सुविधा होगी। बी श्रेणी की प्रयोगशाला में डीएनए, मेडिकल लीगल फोरेंसिक और क्राइम मैनेजमेंट की जांच होगी। सी श्रेणी की फोरेंसिक लैब का निर्माण भौगोलिक व आपराधिक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा।

प्रदेश में तीन जगहों पर काम कर रही हैं फोरेंसिक लैब

उत्तर प्रदेश में इस समय लखनऊ, आगरा व वाराणसी तीन जगहों पर विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं संचालित हो रही हैं। यहां पूरे प्रदेश से लिए गए सैंपल जांच के लिए आते हैं। इसलिए लैब में सैकड़ों की संख्या में आने वाले सैंपल की जांच और उसकी रिपोर्ट तैयार करने में काफी वक्त लगता है। ऐसा भी होता है कि एक सैंपल की रिपोर्ट आने में लगभग एक साल तक का समय लग जाता है, या यूं कहें, इससे भी अधिक समय लग जाता है। इसलिए सरकार की तरफ से 18 नई फोरेंसिक लैब खोलने का निर्णय लिया गया है।
केस नं.-एक-
10 फरवरी को जानकीपुरम से आरएलबी स्कूल के लिए निकली दसवीं की छात्रा गायब हो गयी थी। 15 फरवरी को उसका शव सीएम आवास के पास जंगल में मिला था। पुलिस ने फोरेंसिक टीम को सैंपल लेने के लिए बुलाया। वह सैंपल टीम ने कलेक्ट करके जांच के लिए भेज दिया लेकिन महानगर विधि प्रयोगशाला से सैंपल की रिपोर्ट आने में महीने भर से अधिक का समय लग गया।
केस नं.-दो-
मडिय़ांव इलाके में 4 दिसंबर को दो अलग-अलग स्थानों पर दो सिर कटी लाश मिली थी। उससे पहले सीतापुर में दो लड़कियों के सिर मिले थे। दोनों शव एक ही इंसान के हैं, इस बात की पुष्टि के लिए सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। प्रयोगशाला के डॉयरेक्टर डॉ. श्याम बिहारी उपाध्याय के अनुसार सितंबर तक जांच रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। मतलब साफ है कि रिपोर्ट तैयार होने में अभी करीब-करीब तीन महीने का समय और लगेगा।

भूमि हस्तांतरण व भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया भी अधूरी

जानकारों के अनुसार गाजियाबाद में फोरेंसिक प्रयोगशाला का निर्माण कार्य चल रहा है। जबकि मुरादाबाद में हस्तान्तरण का कार्य प्रगति पर है। अलीगढ़, इलाहाबाद, कन्नौज, गोरखपुर, झांसी, गोंडा और बरेली में फोरेंसिक लैब के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं बस्ती, आजमगढ़, चित्रकूट, विंध्याचल धाम, फैजाबाद, सहारनपुर में अभी भूमि चिन्हीकरण की कार्यवाही चल रही है।

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