प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश को भी चुनौती दे रहे दिग्गज, ‘अपनों’ के लिए टिकट की जिद पर अड़े

पुत्र मोह में जकड़े सांसदों और अन्य दलों से बीजेपी में आए नेता अपनों के लिए मनमुताबिक सीटों पर मांग रहे टिकट
प्रदेश की एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर भाजपा को विरोधियों के साथ ही भीतरघात से भी पड़ेगा लडऩा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील पर देशवासी अपनी सारी परेशानियों को भूल कर उनके साथ खड़े हो गए। केंद्र सरकार के तमाम अभियानों में जनता अपना पूरा समर्थन देती है। इसके इतर प्रधानमंत्री के निर्देशों को उन्हीं की पार्टी के कुछ नेता और सांसद मानने को तैयार नहीं हैं। सुर्खियों में रहने वाले कई सांसद और हाल ही में अन्य दलों को छोडक़र भाजपा में आए तमाम नेता अपनों के लिए टिकट की मांग को लेकर जिद पर अड़े हुए हैं। इसके चलते प्रदेश की करीब एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर टिकटों के बंटवारे को लेकर पार्टी नेतृत्व पेशोपेश में पड़ा हुआ है। इसलिए यूपी में होने वाले चुनाव के दौरान बीजेपी को विरोधियों के संग अपनों से भी जूझना पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी में सबको महत्व देने और सबको साधने की कोशिश भाजपा के लिए मुसीबत बन गई है।

मनमुताबिक सीटों से टिकट की डिमांड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सांसदों व पार्टी नेताओं को अपने पुत्रों या रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने के लिए दबाव न बनाने के निर्देश दिए थे। वहीं केंद्रीय से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक अपनी पत्रकार वार्ताओं के दौरान गैर दलों से भाजपा में आ रहे नेताओं से कोई भी ‘वादा’ करने से इंकार करता रहा है। हमेशा परिवारवाद को लेकर कांग्रेस व सपा को निशाना बनाने वाली भाजपा में भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। पार्टी के केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और कलराज मिश्र के अलावा राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त, ओम प्रकाश सिंह और विधायक रीता बहुगुणा जोशी पुत्र मोह में जकड़ी हुई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपने बेटे पंकज सिंह के लिए लखनऊ की किसी भी विधानसभा से टिकट मांग रहे हैं। ऐसा करके राजनाथ क्षत्रिय होने का लाभ उठाने के साथ ही अपने संसदीय क्षेत्र से बेटे को भी चुनाव जिताकर विधानसभा पहुंचाने का कारनामा एक ही तीर से दो निशाने लगाकर करना चाहते हैं। वहीं राजस्थान के राज्यपाल और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अपने नाती और एटा से सांसद राजवीर सिंह के पुत्र संजू के लिए बुलंदशहर डिबाई से टिकट मांग रहे हैं जबकि पार्टी संजू को मरहरा और एटा से चुनाव लड़वाना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्त के बेटे डॉ. राजीव लोचन ने भी लखनऊ से टिकट की दावेदारी पेश कर सनसनी फैला दी है। उनका वीआरएस भी लगभग मंजूर हो गया है। वहीं कलराज मिश्र भी अपने बेटे अमित मिश्र के लिए लालजी टंडन के पुत्र गोपाल जी टंडन की सीट से टिकट का दावा कर चुके हैं। कांग्रेस से भाजपा में आने वालीं रीता बहुगुणा जोशी भी अपने बेटे अमित जोशी के लिए लगातार टिकट का दावा कर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण के पुत्र सांसद राजवीर एटा शहर सीट से अपने दो परिचित में से किसी एक के लिए टिकट चाह रहे हैं। इसी सीट पर बसपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य भी अपने समर्थक अजीत यादव के लिए टिकट की मांग कर चुके हैं। माना जा रहा है कि इस सीट पर किसी एक की भी नाराजगी भाजपा को भारी पड़ सकती है। ये दोनों ही दिग्गज यूपी में पिछड़़ों की अगुवाई करने वाले माने जाते हैं। इसके साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी बेटी संघप्रिया गौतम के लिए मैनपुरी तो बेटे के लिए रायबरेली से टिकट की मांग कर चुके हैं। कासगंज सीट पर भी कल्याण सिंह अपना तो संघ वाले अपना उम्मीदवार उतारने की कोशिश में लगे हुए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह भी अपने पुत्र के लिए टिकट मांग रहे हैं।

वरुण गांधी भी करीबियों के लिए मांग रहे टिकट
सुलतानुपर सांसद वरुण गांधी यहां की लंभुआ विधानसभा से अपने करीबी सुशील त्रिपाठी के लिए टिकट चाहते हैं। प्रदेश की करीब एक दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर भाजपा अपने सांसदों व दिग्गज नेताओं के दबाव के कारण पशोपेश में पड़ी हुई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से साफ शब्दों में उत्तर प्रदेश की किसी भी विधानसभा सीट से दबाव के चलते गलत प्रत्याशी न खड़ा करने की बात कही है। इसके चलते पार्टी नेतृत्व कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है। लेकिन यह भी तय माना जा रहा है कि यदि पार्टी के दिग्गजों को निराश किया गया तो आने वाले चुनाव में भाजपा को विपक्षियों के साथ-साथ पार्टी में भीतरघात करने वालों से भी लडऩा पड़ सकता है, जो कि पार्टी के लिए किसी भी सूरत में फायदेमंद नहीं हो सकता है। इसका खामियाजा चुनाव परिणामों में उठाना ही पड़ेगा।

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