प्रदेश में तेजी से बढ़ रही मानसिक रोगियों की संख्या

  • नशा करने की आदत लोगों को बांट रही गंभीर बीमारियां

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। आजकल की भागदौड़ भरी जिन्दगी और फैशन के दौर में आगे निकलने की कोशिश में जुटे लोग शुकून की चाहत में दर-बदर भटकते फिर रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोग शराब, सिगरेट और तम्बाकू का नशा करने लगते हैं। जिन लोगों ने नशे को अपना शौक बना लिया है, वह वक्त गुजरने के साथ ही तमाम तरह की खतरनाक बीमारियों की चपेट में आने लगते है। इनमें मानसिक बीमारी नशा करने वालों में सबसे तेजी से फैल रही है। जिसकी चपेट में उत्तर प्रदेश में नशा करने वालों लोगों की 50 फीसदी आबादी है।
उत्तर प्रदेश में बहुत ही कम उम्र में बच्चे सिगरेट और तम्बाकू का नशा करने लगते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक नशे की लत सामाजिक बुराई होने के साथ ही तमाम तरह की गंभीर बीमारियों का भी प्रमुख कारण बन रही है। नशे की लत को मानसिक रोगों को बढ़ावा देने का बड़ा कारण माना जाने लगा है। ये अलग बात है कि समाज में इस बात को बहुत ही कम लोग जानते हैं। नशे के कारण होने वाली मानसिक बीमारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानसिक बीमारियों की गाइड लाइन इंटरनेशनल स्टैटिस्टिकल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेस एंड रिलेटेड हेल्थ प्रॉब्लम्स के अंतर्गत शामिल किया है। इसके साथ ही लोगों में नशा करने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत महसूस की है।
25 प्रतिशत लोगों में नशे की आदत
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के वृद्धावस्था मानसिक विभाग की तरफ से तम्बाकू का सेवन करने वालों पर एक सर्वे किया गया। इसमें सरोजिनी नगर विकास खण्ड के अंतर्गत मीरानपुर पिनवट में 45 वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के 200 लोगों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में सामने आया कि 25 प्रतिशत लोग किसी न किसी मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। वहीं, 14.5 प्रतिशत लोगों को इसके सेवन से मानसिक रोग की समस्या पाई गई। इस अध्ययन के बारे में विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख अंवेषक प्रो. एस.सी. तिवारी ने बताया कि नशा करने वालों में 58 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी के शिकार हैं। अधेड़ यानी 45-55 की उम्र के लोगों में नशे के कारण मानसिक रोग की समस्या अधिक है। जबकि 60 साल से अधिक की उम्र के लोगों में मानसिक रोग फैलने की समस्या अधेड़ व्यक्ति के लोगों के मुकाबले काफी कम है।
तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या सबसे अधिक
चिकित्सकों की टीम के अध्ययन में तीन प्रकार के मादक पदार्थो का सेवन अधिक किया जाता है।, जिसमें शराब, तंबाकू एवं शराब के साथ-साथ गांजा, चरस और भांग मुख्य है। इसमें तंबाकू का नशा करने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। जबकि नशे के कारण मानसिक बीमारी के शिकार होने वाले लोगों में बहुमादक पदार्थ का सेवन करने वालों यानी शराब, गांजा और चरस का नशा करने वाले शामिल हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बहुमादक पदार्थ यानि एक से अधिक मादक पदार्थ का सेवन करने वाले 92 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी के शिकार हुए। केवल शराब का सेवन करने वाला हर दूसरा व्यक्ति एवं केवल तंबाकू का सेवन करने वाले 41.1 प्रतिशत लोग मानसिक रोगों से ग्रसित पाए गए। इसमें मध्यम वर्गीय परिवार के अधेड़ पुरुष सर्वाधिक खतरे में पाए गए।

नशे को बनाते हैं तन्हाई का साथी
केजीएमयू के वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग के रिसर्च स्टडी में पाया गया कि एक से अधिक मादक पदार्थो का सेवन करने वालों में 92 फीसद मानसिक रोगी पाए गए। नशे के संबंध में स्टडी में एक रोचक तथ्य उभर कर सामने आया है, जिसमें बुजुर्ग खाली समय गुजारने और अकेलेपन से बचने के लिए नशे का सेवन करते हैं। इंसान गम भुलाने के लिए भी मित्रों के दबाव में नशा करने लगता है। अधिकतर महिलाओं ने बताया कि वे दांतों के दर्द व पेट में गैस के कारण नशा करती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि गांव में नशे की वजह जानकारी का अभाव भी है, जो मानसिक रोग की वजह बन रहा है। डॉ. तिवारी ने बताया कि यह स्टडी प्रदेश सरकार द्वारा पोषित सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च, ट्रेनिंग एंड सर्विसेस काट्र्स के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस अध्ययन का विषय लखनऊ एल्डरली स्टडी इन एजिंग एंड जिरियाटिक मेंटल हेल्थ है। इससे नशे की वजह से लोगों को होने वाली मानसिक बीमारियों के बारे में और अधिक जानने में मदद मिलेगी।

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