प्रतिदिन दो की मौत, तीन घायल

हादसों के बाद भी तेज रफ्तार से चलाते हैं वाहन, पुलिस बनी रहती है मूकदर्शक

बेखौफ हुये बाइक चालक, बिना हेलमेट के भरते हैं फर्राटे

यातायात कानून का नहीं रहता भय

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी में प्रतिदिन सडक़ हादसों में जहां दो लोगों की मौत हो रही है वहीं तीन लोग गम्भीर रूप से घायल हो रहे हैं, जबकि राजधानी की सडक़ों पर प्रतिदिन लगभग आधा दर्जन सडक़ हादसे हो रहे हैं। यह आंकड़ा यातायात विभाग का है, जबकि हकीकत कुछ और ही होगी, क्योंकि अस्पताल में सडक़ हादसों में मरने वालों की सूची पुलिस विभाग के पास नहीं है। लगातार हो रहे सडक़ हादसों के बाद भी सडक़ों पर लोगों के बेखौफ और तेज गति से वाहन चलने पर अंकुश नहीं लगा है।
लखनऊ में हर दिन कहीं न कहीं सडक़ हादसा होता ही है। इसके लिए बहुत हद तक हम लोग ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि लोगों में कानून का भय नहीं है। यातायात के नियमों का पालन भी राजधानी में बहुत कम होता है, क्योंकि लोगों में कानून का डर नहीं है। बाइक चालक को हेलमेट लगाना अनिवार्य है, पर सडक़ों पर बिना हेलमेट के लोग जाते हैं और तेज रफ्तार से वाहन भी चलाते हैं। बड़ी बात तो यह है कि पुलिस मूकदर्शक बनी देखती रहती है। लखनऊ में जगह-जगह यातायात पुलिस तैनात पर है पर लोग बाइक चलाते हुए बात करते हैं। बाइक पर तीन लोग बैठे रहते हैं और उनका कुछ नहीं होता। फर्राटा बाइकर्स के बारे में तो कुछ बताने की जरूरत नहीं। पुलिस की लापरवाही और कुछ लोगों की गलतियों की वजह से दूसरे बेकुसूर सडक़ हादसे में अपनी जान गंवाते हैं। कुछ मामलों में तो यह भी देखा गया है कि पुलिस लोगों को पकड़ती तो है पर लेन-देन करके छोड़ देती है।

राजधानी में हुये सडक़ हादसों का पांच वर्षों का आंकड़ा
वर्ष दुर्घटनाएं मौत घायल

2011 1228 525 747 2012 1209 525 811
2013 1230 516 794 2014 1303 546 805 2015 358 151 217
(15 अपै्रल तक)
अस्पताल में मरने वालों की सूची पुलिस के पास नहीं

सूत्रों की मानें तो सडक़ हादसों के दौरान घटनास्थल पर जितने लोगों की मौत होती है पुलिस अपने आंकड़ों में उतना ही दर्ज करती है। अस्पताल में हुई मौतों की सूची का आंकड़ा पुलिस नहीं दर्ज करती है। यदि पुलिस के पास अस्पताल का रिकॉर्ड होता तो हर वर्ष आकड़ों में वृद्धि होती।

चलाया जाता है जागरूकता अभियान

यातायात पुलिस सहित सामाजिक संगठन, एनसीसी कैडेट और सामाजिक लोगों द्वारा समय-समय पर यातायात के प्रति अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी आंकड़ों में कोई कमी नहीं हुई। अपर पुलिस अधीक्षक यातायात बृजेश मिश्रा का कहना है कि पुलिस के सामने लोग सही तरीके से वाहन चलाते है। पुलिस से दूर जाने के बाद चालक तेज गति के साथ लापरवाही भी करने लगते है। लगातार अभियान चलाने के साथ ही लोगों का चालान भी काटा जाता है।

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