पॉलीटेक्निक की प्रवेश परीक्षा में नकल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

  • प्राविधिक शिक्षा परिषद ने 28 आरोपियों के रिजल्ट पर लगाई रोक
  • केंद्र अधिकारी व जोनल अधिकारी के खिलाफ भी कराई जाएगी जांच

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्राविधिक शिक्षा परिषद में मई में आयोजित पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा के दौरान 28 कैंडीडेट्स को नकल करने का आरोपित माना है। इन सभी कैंडीडेट्स के रिजल्ट रोक दिये गये हैं। जबकि इसमें शामिल ज्यादातर कैंडीडेट्स टॉप 500 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे थे। साथ ही जून के फस्र्ट वीक में जारी प्रवेश परीक्षा की मेरिट लिस्ट में भी बदलाव किया गया है।
प्राविधिक शिक्षा परिषद के प्रमुख सचिव ने नकल करने वाले सभी आरोपियों के अलावा नकल कराने वाले सेंटर पर कार्रवाई करने की संस्तुति कर दी है। पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा में नकल करने वाले 28 आरोपितों की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। इन सभी ने गाजीपुर के बुद्धं शरणं इंटर कॉलेज में एक ही कमरे में बैठकर परीक्षा दी थी। इस मामले का खुलासा परिषद की ओर से नियुक्त सेंटर सुप्रिंटेंडेंट की रिपोर्ट में किया गया था, जिस पर परिषद ने उस कमरे में बैठे सभी 28 कैंडीडेट्स का परीक्षा परिणाम रोक कर जांच कमेटी गठित कर दी थी, जांच कमेटी ने इन सभी आरोपी कैंडीडेट्स को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसमें से केवल सात कैंडीडेट्स ही कमेटी के सामने प्रस्तुत हुए। ये सभी कमेटी के सदस्यों की ओर से पूछ गए साधारण सवालों के जवाब भी नहीं दे सके। इसके अलावा इन कैंडीडेट्स की ओएमआर शीट में भी हैंडराइटिंग मैच नहीं हो सकी। इसलिए डबल राइटिंग का मामला भी प्रकाश में आया। जांच टीम के मुताबिक इन कैडीडेट्स की ओएमआर शीट में अलग-अलग तरह की कई हैंडराइटिंग पाई गई। इसमें पेंसिल से गोले भरने में अलग-अलग राइटिंग का प्रयोग किया गया, जिसके बाद परिषद ने इन 28 कैंडीडेट्स का रिजल्ट निरस्त करने के साथ ही कॉलेज के केंद्र अधीक्षक (प्रिंसिपल) पारस सिंह कुशवाहा के खिलाफ गाजीपुर सदर थाने में एफआईआर दर्ज कराने केलिए एसएसपी का लेटर भेज दिया हैं।
मालूम हो कि पॉलीटेक्निक की प्रवेश परीक्षा बीते एक मई को प्रदेश के 1172 सेंटर्स पर आयोजित हुई थी, जिसमें करीब पौन पांच लाख कैंडीडेट्स ने एग्जाम दिया था। इन सभी कैंडीडेट्स का रिजल्ट दस जून को जारी किया गया था। रिजल्ट जारी करते समय संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद ने ग्रुप ए की मेरिट में आए 28 कैंडीडेट्स को संदिग्ध मानकर उनके रिजल्ट रोक दिए थे। ये सभी बुद्घं शरणं इंटर कॉलेज गाजीपुर एग्जाम सेंटर पर परीक्षा में शामिल हुए थे। मामले की जांच के लिए जेडी मनोज कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की गई थी। जांच टीम ने इन सभी 28 कैंडीडेट्स को 23 जून को उपस्थित होने केलिए कहा था, जिसमें से केवल सात ही कमेटी के समक्ष उपस्थित हुए। इस पूरे मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ ही कहीं न कहीं केंद्र अधिकारी व जोनल अधिकारी भी जिम्मेदार हैं, इनके खिलाफ भी जांच कराई जाएगी।

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