पैरोकारों को नहीं सुनाई देती पीडि़ताओं की चीख

सैकड़ों हजारों संगठन व मिशन साबित हो रहे बेअसर, महिला सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

 श्रवण के. शर्मा
Captureलखनऊ। सूबे में महिला पैरोकारों की संख्या हजारों में है, पर पीडि़त महिलाओं की चीख किसी को सुनाई नहीं देती। न थाना सुनता है, न ही महिला अधिकारों की बात करने वाले गैरसरकारी संगठन। राजधानी में तमाम आयोग गठित है, वो भी उनकी सुध नहीं लेते। हालत यह है कि एक एफआईआर दर्ज करानेे के लिए पीडि़ताओं को महीनों थाने का चक्कर लगाना पड़ता है।
राजधानी की ही बात करें तो पिछले एक महीने में कई पीडि़ताओं को एक एफआईआर दर्ज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी हैं, जबकि लखनऊ में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय दिलाने के नाम पर काम करने वाले हजारों एनजीओ हैं। किसी ने इन पीडि़ताओं की सुध लेने की जरूरत नहीं समझी। अम्बेडकरनगर की गरिमा हो या अमेठी की सुनीता। महानगर की अनीता हो या चिनहट की कमला (सभी नाम काल्पनिक)। किसी पीडि़ता की गुहार नहीं सुनी गई। ये कुछ नाम तो बस बानगी हैं। हर दिन सैकड़ों महिलाएं न्याय की गुहार में भटकती हैं और इनकी फरियाद साहब लोग नहीं सुनते।
सरकार भी नहीं है गंभीर
सपा सरकार महिला सुरक्षा की बात तो करती है पर उस पर अमल नहीं करती। इस बात की गवाही सरकारी आंकड़े देते हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था कितनी ध्वस्त है। पुलिस ने 1 जनवरी से 30 अप्रैल यानी 120 दिन में हुए अपराधों का जो ब्यौरा पेश किया है उसमें बलात्कार की 849 घटनाएं तथा दहेज हत्या की 634 हैं। ये तो वो घटनाएं हैं जो कागजों में दर्ज हैं। ऐसे बहुत से मामले हैं जो या तो सुने नहीं जाते या समझौते से निपटा दिए जाते हैं, जिनका कोई रिकार्ड नहीं है। अगर हकीकत और जाननी है तो वूमेन पावर लाइन 1090 में दर्ज शिकायतों के आंकड़ों से पता लग सकती है। अब तक कुल 3 लाख 80 हजार 899 केस दर्ज हो चुके हैं। सूबे में हर जिले में परिवार परामर्श केन्द्र के भी आंकड़े इसकी पुष्टिï करते हैं। यहां प्रतिदिन चार से पांच मामले आते हैं।
राज्यपाल भी जता चुके हैं चिंता
प्रदेश में महिला सुरक्षा पर राज्यपाल रामनाईक भी चिंता जता चुके हैं। दो दिन पहले ही गोरखपुर के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि प्रदेश के अभिभावक अपनी बेटियों को लेकर चिंतित रहते हैं। यह केवल राज्यपाल की ही चिंता नहीं है, प्रदेश के हर अभिभावक की चिंता है। एक लडक़ी या महिला के लिए सडक़ ही असुरक्षित नहीं है, वह अपने घर से लेकर ससुराल भी असुरक्षित है। इसकी गवाही दहेज हत्या और बलात्कार के मामले देते हैं।

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