पैकफेड विभाग ने अब तक नहीं किया अस्पताल की बिल्डिंग का हस्तांतरण

  • महानगर क्षेत्र में 100 बेडों का अस्पताल एक साल से बनकर तैयार
  • करोड़ों खर्च होने के बावजूद मरीजों को नहीं मिल पा रहा अस्पताल बनने का लाभ

वीरेन्द्र पांडेय
Captureलखनऊ। महानगर क्षेत्र में 100 बेडों का अस्पताल पिछले एक साल से बनकर तैयार है, जिसका उद्ïघाटन भी किया जा चुका है। लेकिन अब तक भवन का लाभ मरीजों को नहीं मिल पाया है। पैकफेड तथा स्वास्थ्य विभाग की आपसी खींचतान में मरीजों का हित प्रभावित हो रहा है। मामला राजधानी के महानगर स्थित भाउराव देवरस अस्पताल का है। जहां पर पैकफेड ने इमारत तो बनाकर छोड़ दी है, लेकिन अभी तक अस्पताल प्रशासन को हस्तान्तरित नहीं किया है। इसलिए अस्पताल प्रशासन इस बिल्डिंग को उपयोग में नहीं ले पा रहा है। साथ ही देखरेख के अभाव में नवनिर्मित भवन अव्यवस्था का शिकार होता जा रहा है। सरकारी मशीनरी की कछुआ चाल के कारण एक साल से निष्प्रयोज्य पड़े इस भवन का कोई पुरसाहाल नहीं है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन भी बेबस नजर आ रहा है। सरकारी अधिकारियों के इस प्रबंधन से जनता की गाढ़ी कमाई का माखौल उड़ाया जा रहा है, वहीं सपा सरकार द्वारा लोगों के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे अच्छे कार्यों पर बट्ïटा साबित हो रहा है। इसके बाद भी पैकफेड के अधिकारी कुम्भकरणीय नींद से नहीं जाग रहे हैं।
अस्पताल में अधूरा पड़ा है काम
इस नवनिर्मित भवन में पैकफेड ने काम को पूरा ही नहीं किया है। इसी कारण अस्पताल प्रशासन इसे अपने इस्तेमाल में नहीं ले पा रहा है। नवनिर्मित भवन में कमरे तो बनकर तैयार हैं। लेकिन मरीजों तथा चिकित्सकीय स्टाफ के लिए रैक्स तथा नर्सिंग स्टेशन तक नही बनाये गए हैंं। जबकि पैकफेड विभाग को इसका पूरा भुगतान भी मिल चुका है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि भवन निर्माण के बाद कार्य को अधूरा क्यों छोड़ा गया।
सख्त रवैये के चलते आयी थी काम में तेजी
भाउराव देवरस अस्पताल को 100 बेड करने के लिए भवन का निर्माण पैकफेड ने तीन साल पहले ही शुरू कर दिया था। लेकिन 2014 में काम को बंद कर दिया था। काम बंद होने की वजह से अस्पताल में भवन निर्माण के बाद निकले कचरे से चारों तरफ गन्दगी होने लगी थी। इस कारण मरीज भी परेशान हो रहे थे। इसलिए यहां के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पैकफेड के इंजीनियरों की शिकायत की थी। तब जाकर एक साल बाद निर्माण कार्य पूरा हुआ। लेकिन मशीनें रखने के लिए रैम्प और कमरों में रैक बनाने समेत कई काम अभी भी लंबित हैं।
कार्य को पूर्ण कराने के लिए जल्द भेजा जायेगा प्रस्ताव
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया है कि भवन पैकफेड के द्वारा बनाया गया है। उसमें जो भी काम अधूरे रह गये हैं। उसको स्वास्थ्य महानिदेशालय के इंजीनियर द्वारा आकर निरीक्षण किया जायेगा। यहां पर जो भी काम बाकी बचा हुआ है ,उसका प्रस्ताव बनाकर पैकफेड विभाग को भेजा जायेगा। उसके बाद वह काम को पूरा करायेंगे।

नवनिर्मित भवन में जल्द शुरू होगा मरीजों का इलाज

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय के इंजीनियर का निरीक्षण होने के बाद इस भवन का इस्तेमाल मरीजों के उपचार के लिए किया जायेगा। 100 बेडों के इस अस्पताल के शुरू होते ही मरीजों को लाभ मिलने लगेगा। उसके लिए अस्पताल प्रशासन ने सारी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली है। 20 चिकित्सकों के साथ चिकित्सकीय स्टाफ की भी व्यवस्था चाक चौबन्द कर ली गई है।

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