पूर्व प्रधानमंत्री के सामुदायिक केन्द्र पर पशुओं का डेरा

  • अटल बिहारी वाजपेयी ने तकरोही के सामुदायिक केन्द्र का 18 वर्ष पहले किया था शिलान्यास
  • क्षेत्रीय निवासियों की मेहनत लायी रंग, फिर से आवास-विकास करवाएगा निर्माण

अंकुश जायसवाल

Captureलखनऊ। दो विभागों की आपसी खीचतान में एक सामुदायिक केन्द्र 18 सालों से जर्जर हालत में कूड़ा घर में तब्दील हो गया है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। आवास-विकास परिषद ने शहर के दीन दयाल पुरम तकरोही की आश्रयहीन कालोनी में वर्ष 1997 में सामुदायिक केन्द्र का निर्माण कराया था। इसका शिलान्यास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 जून 1997 को किया था। इसके बाद वक्त के साथ-साथ यह सामुदायिक केन्द्र बदहाली का शिकार होता चला गया। आवास-विकास परिषद का कोई भी अधिकारी यहां दोबारा झांकने नहीं आया। इतना ही नहीं परिषद के अधिकारी सामुदायिक केन्द्र के रख-रखाव की जिम्मेदारी डूडा के पास होने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि क्षेत्रीय लोगों ने गृहमंत्री के मुलाकात कर सामुदायिक केन्द्र का जीर्णोद्घार करने की अपील की, उन्होंने सामुदायिक केन्द्र का जीर्णोद्घार करने का निर्देश दिया। तब जाकर आवास-विकास परिषद के आला अधिकारी हरकत में आए। सामुदायिक केन्द्र के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सामुदायिक केन्द्र या कूड़ाघर
आवास विकास परिषद ने वर्ष 1997 में दीन दयाल पुरम तकरोही की आश्रयहीन कालोनी में सामुदायिक केन्द्र का निर्माण कराया था। इसका शिलान्यास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 18 वर्ष पहले 16 जून 1997 को किया था। उनके नाम का पत्थर आज भी इस कालोनी में लगा हुआ है। शिलान्यास के बाद इसकी तरफ आवास-विकास के अधिकारियों ने मुड़ कर भी नहीं देखा। तब से यह सामुदायिक केन्द्र कूड़ाघर में तब्दील हो गया है। आस-पास के लोग सामुदायिक केन्द्र के अंदर और बाहर कूड़ा डालते हैं, जिससे क्षेत्र की नालियां कूड़ों की वजह से सारा दिन बजबजाती रहती हैं। वहीं सामुदायिक केन्द्र की छत जर्जर हो चुकी है। छत में लगा सरिया दिखाई दे रहा है। ऐसे में कभी भी छत धराशायी हो सकती है।
आवारा पशुओं का डेरा
इस सामुदायिक केन्द्र को गरीबों को बेहतर सुविधा देने के लिए बनाया गया था। किन्तु अब आवारा पशुओं का डेरा जमा रहता है। जो दिन भर गंदगी फैलाया करते हैं। इस सामुदायिक केन्द्र का समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, जिससे इसकी हालत समय के साथ-साथ बदतर होती चली गई।
18 साल बाद भी नहीं लौटी रौनक
इस केन्द्र का निर्माण हुए 18 साल बीत चुके हैं। किन्तु इस केन्द्र को संजो कर रखने की जिम्मेदारी किसी विभाग ने नहीं ली। जिसका नतीजा है कि यह सामुदायिक केन्द्र आज खण्डहर बना हुआ है। इस संबंध में कई बार क्षेत्रीय लोगों ने नगर निगम, आवास-विकास परिषद और जिलाधिकारी तक से शिकायत की। अधिकारियों के सामने सामुदायिक केन्द्र की हकीकत बयां कर जीर्णोद्घार करवाने के लिए लिखित पत्र भी दिया। किन्तु सब लोगों ने केवल आश्वासन ही दिया। किसी ने बदहाल सामुदायिक केन्द्र को दुरुस्त करवाने में रुचि नहीं दिखाई।

ऐसा कुछ आवास-विकास परिषद द्वारा कराये जाने की सूचना नहीं मिली है। दीन दयाल पुरम, तकरोही की आश्रयहीन कालोनी में बनाये गये सामुदायिक केन्द्र का निर्माण कराने के बाद डूडा के हैण्डओवर कर दिया गया था। अब इसकी जिम्मेदारी डूडा की है। अगर मंडलायुक्त अवस्थापना निधि से इसे पुन: दुरुस्त करवाने के लिए आदेश करेेंगे, तो फिर करवाया जाएगा।
आरके अग्रवाल, मुख्य अभियंता,
आवास-विकास परिषद

गृहमंत्री के दखल के बाद हरकत में आया आवास विकास
क्षेत्रीय निवासियों की पहल पर अब इसे एक बार फिर से संवारा जाएगा। क्षेत्रीय लोगों ने इसके लिए गृहमंत्री राजनाथ ङ्क्षसह व बीजेपी सांसद कौशल किशोर को पत्र लिखा था। वह नगर आयुक्त से लेकर आवास आयुक्त तक सभी से सामुदायिक केन्द्र के संबंध में मिले। क्षेत्रीय निवासियों व नेताओं की पहल तथा प्रयास से सामुदायिक केन्द्र फिर से बनने की उम्मीद जगी है। अब उसका जीर्णोद्घार होगा। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो दीन दयाल पुरम तकरोही की आश्रयहीन कालोनी में बने इस सामुदायिक केन्द्र का जीर्णोद्घार आवास विकास परिषद कराएगा। इसके लिए परिषद ने 63 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अवस्थापना निधि से दुरुस्त कराया जाएगा। हालांकि इस पर आवास-विकास परिषद कुछ अलग ही राग अलाप रहा है। वह इसकी सूचना या इस संबंध में जानकारी न होने की बात कहते हुए सामुदायिक केन्द्र की जिम्मेदारी डूडा के पास है, कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।

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