पूरे प्रदेश में लडख़ड़ायी चिकित्सा व्यवस्था

  • रेजीडेंट डॉक्टरों की वजह से मेडिकल कॉलेज में पसरा सन्नाटा
  • गरीब मरीज हैं बेहाल, प्राइवेट अस्पतालों की चांदी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों में रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से चिकित्सा व्यवस्था लडख़ड़ा गई है। मरीज बेहाल हैं और प्राइवेट अस्पतालों की चांदी है। सबसे ज्यादा परेशान गरीब मरीज हैं। राजधानी में तो कई सरकारी अस्पताल हैं इसलिए लोगों को थोड़ी राहत है लेकिन अन्य जिलों में स्थिति बहुत बद्तर हो गई है।
सोमवार से हड़ताल पर गए डॉक्टर
काउंसिलिंग से नाराज अभ्यर्थियों ने सोमवार को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के मेन गेट पर बैठकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और ट्रामा सेंटर के दोनों इंट्री गेट पर ताला जड़ दिया था। इतना ही नहीं उन लोगों ने ओपीडी भी बंद करा दी थी। इस दौरान मरीज बेहाल थे। कड़ी धूप में तीमारदार अपने मरीजों को लेकर घंटों इंतजार किया कि शायद सब ठीक हो जाये लेकिन रेजीडेंट डॉक्टर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। फिर मजबूरी में तीमारदार अपने मरीज को लेकर प्राइवेट अस्पताल और अन्य सरकारी अस्पतालों को चले गए। मंगलवार को भी डॉक्टर काम पर नहीं लौटे, जिससे मेडिकल कॉलेज में सन्नाटा पसरा रहा। सोमवार को इलाज के अभाव में 4 मरीजों की मौत हो गयी थी। इतना ही नहीं मंगलवार को राज्यपाल राम नाईक ने रेजीडेंट डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की लेकिन उन लोगों ने राज्यपाल की भी अपील पर ध्यान नहीं दिया और काम पर नहीं लौटे। उनका कहना था कि जब तक हमारी मांग नहीं सुनी जाएगी हम काम पर नहीं लौटेंगे।
रेजीडेंट चिकित्सकों की क्या हैं मांगें
कार्यबहिष्कार कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि दिनरात मेहनत की थी तब अच्छी रैंक आयी थी, लेकिन अचानक से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांउसिलिंग शुरू कर दी गयी। इसकी जानकारी भी हमको पहले से नहीं दी गयी थी। अब हमारे दाखिले पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। हमारा भविष्य अंधकार में हो गया है। हमें यदि पहले बता दिया गया होता तो हम कहीं और एडमिशन ले लेते। रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। न्यायालय को हमारी भी बात सुननी चाहिए। जब तक हमारी बात नहीं सुनी जायेगी तब तक हम भी हड़ताल पर रहेंगे।
सभी मेडिकल कॉलेजों के रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर
रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल केवल केजीएमयू तक ही सीमित नहीं रह गयी है बल्कि यह पूरे प्रदेश में चल रही है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से लेकर आगरा मेडिकल कॉलेज तक के रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल से मरीज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। वहीं प्रशासन है कि हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

क्या था मामला

उत्तर प्रदेश पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेस एग्जाम (यूपीपीजीएमई) की कांउसलिंग में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ग्रामीण क्षेत्रों में तीन साल काम कर चुके पीएमएस चिकित्सकों को 30 नम्बर अधिक देने तथा नयी सूची तैयार कर काउसलिंग करने को कहा था, जिसके बाद यूपी के मेडिकल कालेजों में एडमीशन लेने वाले छात्र-छात्राओं का एडमिशन निरस्त हो गया था। इस पर लगभग 400 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ तीन दिन धरना देने के बाद भी जब शासन की ओर से नेशनल पीजी कॉलेज में काउंसिलिंग शुरू करा दी गयी तो अभ्यर्थियों ने अपनी जिद मनवाने के लिए मरीजों की जान खतरे में डालने से भी गुरेज नहीं किया। पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। गोरखपुर मेडिकल कालेज से लेकर आगरा स्थित एसएन मेडिकल कालेज तक रेजीडेंट चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार किया तो मरीजों की जान खतरे में आ गयी।

केजीएमयू की इमरजेन्सी खाली

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से लेकर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों तक में इलाज के लिए कम ही मरीज पहुंच रहे हैं। इसका मुख्य कारण रेजीडेंट चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाना बताया जा रहा है। हालात ये हैं जहां पहले मरीजों की लाइन लगी रहती थी, वहां आज इलाज के लिए इक्का -दुक्का मरीज ही आ रहे हैं। मरीजों के तीमारदार इस बात से आशंकित हैं कि यहां पर इलाज तो मिलेगा नहीं उल्टा मरीज के जान पर बन आयेगी।

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