पुलिस से अधिक सीसीटीवी कैमरों पर विश्वास

-अशोक चतुर्वेदी
Captureलखनऊ। सीसीटीवी कैमरा इस वर्तमान समय में सिर्फ कैमरा ही नहीं बल्कि लोगों के लिये सुरक्षा का विस्वास बनता जा रहा। आम जनता का कहना है कि चोरी के इरादों को लेकर आने वाले ज्यादातर लोग कैमरों की ओर नजर पड़ते ही अपने इरादों को बदल देते हैं। जिसका खुलासा बिना सीसीटीवी कैमरों के होना मुमकिन नहीं लग रहा था। यह मात्र कैमरा ही नहीं बल्कि पुलिस का सहयोगी भी कहा जा सकता है। अगर सही मायने में देखा जाये तो पुलिस के मुखबिर भले ही एक पल के लिए पुलिस विभाग को चकमा दे दें लेकिन सीसीटीवी कैमरा पुलिस ही नहीं बल्कि कोर्ट के लिये भी काफी विश्वसनीय है। अपराधियों को पकड़वाने मात्र के लिये ही नहीं, उनको सजा दिलाने में भी सीसीटीवी कैमरा अपना अहम योगदान दे रहा है। इतना ही नहीं दुकानों के साथ-साथ घरों पर भी लोग सुरक्षा के लिये इस तीसरी आंख का सहयोग ले रहे हैं। लोग अपने घरों पर लगे चौकिदारों से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों पर विश्वास कर रहे हैं।
आम जनता व पुलिस विभाग को चकमा देकर अपराध करने वाले शातिर अपराधियों के लिए सीसीटीवी कैमरा काल बनता जा रहा है। हालात यह हैं कि अपराध करने के बाद भी अपराधियों के दिल में सीसीटीवी कैमरों को लेकर खौफ बना हुआ है। हाल ही में राजधानी में चोरी की घटनाओं का खुलासा कैमारों की मदद से हुआ था। बीती 3 फरवरी को अमीनाबाद की रहने वाली कानून की पढ़ाई कर रही छात्रा की हत्या करके उसके शव को कई टुकड़ो में शहीद पथ में फेंक दिया गया था। पुलिस ने उसकी हत्या कर उसके उसके शव को शहीद पथ पर डालने वाले हत्यारे हिमांशु को पुलिस ने सीसीटीवी में आये हेलमेट के साथ मिले फुटेज व गाड़ी के दो नम्बरों के आधार पर उसके चेहरे का स्क्रेच बनवाया व गाड़ी के नम्बरों के आधर पर पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने हत्यारे हिमांशु को वृन्दावन के पास बनी आवास विकास कॉलोनी के पास बने उसके मकान से उसकी गाड़ी के साथ उसे गिरफ्तार कर लिया।
व्यापारियों को पूरा भरोसा
इस संदर्भ में निशतगंज के कपड़ा व्यवसायी तनमय गुप्ता ने बताया कि दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगने से किसी प्रकार की गड़बड़ी का डर नहीं होता है। दुकान में कार्यरत कर्मचारी कब क्या करता है इसकी जानकारी मिलने के साथ ही यदि वह झूठ बोल रहा है तो भी पकड़ा जा सकता है।
महानगर के सर्राफा व्यापारी कन्हैया लाल वर्मा ने कहा कि घर के सामने सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया है ताकि घर के अंदर कौन जा रहा है और कितने समय के लिए घर में अंदर है इसकी भी जानकारी मिलती है। इसके साथ ही चोरों से भी घर की सुरक्षा होती रहती है।
गोमतीनगर, विभूति खण्ड के एक दुकानदार सतेन्द्र गुप्ता ने बताया कि सीसीटीवी कैमरा वर्तमान में व्यापारियों के लिए सुरक्षा का कवच है। दुकान पर आने वाले प्रत्येक लोगों की जहां चेहरे से पहचान होती है वहीं हर किसी को डर रहता है कि वह सीसीटीवी कैमरे की नजर में है।
सर्वोदय नगर निवासी गायक सत्या सिंंह व उनकी पत्नी माधुरी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरा घर में लगवाने से कहीं भी कुछ दिनों के लिए घर को छोडक़र आराम से बाहर जाया जा सकता है। घर के अंदर और बाहर होने वाली प्रत्येक हरकतों को कैमरा कैद करके रखता है। बाद में आने पर कैमरे से पूरी गतिविधियां मिल जाती हैं कि घर के पास कौन कौन आया गया था।
फुटेज के आगे नहीं चलती किसी की
सीसीटीवी की फुटेज में सच्चाई सामने आ जाती है। इसमें किसी से पूछने की जरूरत नहीं होती है। सच्चाई सामने होती है। कार्रवाई करके अपराधियों को पकडऩे में आसानी रहती है। किसी भी राजनैतिक व्यक्ति का कोई दबाव नहीं होता है। व्यक्ति के अंदर लालच आ सकता है। लेकिन सीसीटीवी कैमरे के अंदर ऐसी कोई बात नहीं है।
– आर.के. चतुर्वेदी, डीआईजी रेंज-लखनऊ।
आलाधिकारियों को अपने सुरक्षाकर्मियों से अधिक सीसीटीवी पर विश्वास
आजकल पुलिस विभाग से लेकर अन्य विभागोंं के अधिकारियों को भी अपने सुरक्षा कर्मी जो कि हर समय उनके साथ में रहते है व हमेशा उनके जान माल की सुरक्षा के लिये तैयार रहते हैं उन्हे भी शायद अपने उन सुरक्षाकर्मिर्यों से ज्यादा विश्वास इन कैमरों पर है इस कारण से ही इन आला अधिकारियों ने अपने घरों व ऑफिसों मेंं सीसीटीवी कैमरों को जगह जगह पर सुरक्षा के नजरिये से लगवा रखा है जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर भय न रहे और अगर ऐसा हो तो वह कैमरों की नजर से पकड़ा जा सके।
‘पहले चोर पकड़ते हैं फिर दर्ज होगी एफआईआर’
-4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लापरवाही करने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगातार डीआईजी आरके चतुर्वेदी कार्रवाई कर रहे हैं। इसके बाद भी उनमें सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। हसनगंज में लाखों रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान चोरी होने के मामले में पुलिस पीडि़त को लगभग एक माह से थाने का चक्कर लगवा रही है। इतना ही नहीं पुलिस पीडि़त से यह कह रही है कि पहले चोर पकड़ लेंगे उसके बाद मुकदमा दर्ज करेंगे। जबकि हकीकत यह है कि चोर को पकडऩे के नाम पर पुलिस पीडि़त की गाड़ी पर सावार होकर रिश्तेदारी कर रही है। चोरी का मुकदमा भी दर्ज करने के लिए रुपये की मांग की जा रही है। ऐसे में चोरों का मनोबल तो बढ़ेगा ही। विगत दिनों हसनगंज में ही तीन गार्डों की हत्या करके लाखों रुपये लूटने का मामला भी सामने आया था जिसमें पुलिस को कोई सुराग आज तक नहीं मिला।
बता दें कि हसनगंज थाना क्षेत्र के बाबूगंज निवासी मनोज शुक्ला बाबूगंज में स्थित क्विक डेल लॉजिस्टिक प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी में एरिया मैनेजर के पद पर तैनात हैं। कम्पनी ऑन लाइन डिलेवरी का कार्य करती है। विगत एक माह के अंदर उसके कम्पनी से कई इलेक्ट्रॉनिक्स सामान एक-एक करके गायब हो गये। जिसकी कीमत लगभग 15 लाख रुपये है। इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों में मोबाइल, लैपटॉप सहित अन्य सामान है। इसकी जानकारी होने पर मनोज के पैरों तले जमीन खिसक गई। मनोज ने इसकी सूचना 17 अपै्रल 2015 को पुलिस को दी लेकिन पुलिस मुकदमा दर्ज करने के लिए टरकाने लगी। इसी बीच मनोज को पता चला कि उसकी कम्पनी में कार्य करने वाला कर्मचारी श्रवण कुमार सिंह गायब है। मनोज ने गायब हुए मोबाइल का आईएमईआई नम्बर निकालकर चेक किया तो पता चला कि उस मोबाइल में यूनिनॉर का सिम नम्बर 8423672080 संचालित हो रहा है। जिसकी लोकेशन बीकेटी की तरफ बताई जा रही है। जबकि श्रवण बीकेटी क्षेत्र का रहने वाला है। मनोज ने पुलिस को इसकी जानकारी दी तो पुलिस ने कहा कि थाने पर कोई गाड़ी नहीं है। एक गाड़ी आप किराये पर लेकर आइये तो हम पुलिस वालों को भेजते हैं। मनोज ने 2107 रुपये किराये में रैडियो टैक्सी तय की। टैक्सी में सवार होकर एसआई घनश्याम सिंह, सिपाही इफिलास अहमद, राजेश मिश्रा और कम्पनी का ब्रांच इंचार्ज आरिफ स्थानीय पुलिस को साथ लेकर श्रवण के घर महिंगवा पहुंचे लेकिन श्रवण घर पर नहीं मिला। इसके बाद वापस लौटते समय एसआई घनश्याम सिंह टैक्सी लेकर एक रिश्तेदार के यहां मुलाकात करने चले गये। मुलाकात करने वाला उस गांव का प्रधान बताया जा रहा है। कई घंटे गुजारने के बाद जब सभी लोग थाने पहुंचे तो घनश्याम सिंह और सिपाहियों ने आरिफ से कहा कि कल तहरीर लेकर थाने आ जाना। मुकदमा दर्ज हो जायेगा। दूसरे दिन थाने पहुंचने पर सिपाही ने बताया कि कुछ खर्च करो तो मुकदमा दर्ज करा दें। इसके बाद आरिफ वापस लौट आये और अपने एरिया मैनेजर को कॉल कर इसकी जानकारी दी। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक मुकदमा नहीं दर्ज हुआ था।
वेबसाइट बनवाने की कवायद में महाविद्यालय
लखनऊ। लविवि से सबद्घ कॉलेजों को विवि ने यह निर्देश जारी किया है कि अब महाविद्यालयों को अपनी वेबसाइट स्वयं बनवानी होगी। इन वेबसाइट पर महाविद्यालयों के साथ वहा पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता को भी आंका जा सकेगा। विवि की तरफ से जारी निर्देश के अनुसार महाविद्यालयों को अपनी वेबसाइट जल्द से जल्द बनवानी होगी। विवि से संबद्घ लगभग 144 महाविद्यालय हैं जिनमें से 73 के पास अपनी कोई वेबसाइट नहीं है। महाविद्यालयों की अपनी वेबसाइट न होने के कारण विवि को किसी भी प्रकार की जानकारी देने के लिए बड़ी कवायद करनी पड़ती है। अब यह 73 महाविद्यालय अपनी वेबसाइट बनावाने की कवायद में जुट गये हैं। वहीं विवि का निर्देश है कि जितनी जल्दी हो सके महाविद्यालय अपनी वेबसाइट बनवाकर विवि को सूचित करें।

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