पुलिस विभाग की रीढ़ माने जाने वाले एक लाख होमगार्ड ढूंढ रहे सहारा

  • खोखले साबित हुए अधिकारियों के वादे
  • अवैतनिक होमगार्डों को महंगी पड़ रही खाकी

 आमिर अब्बास
5लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग एक ऐसा विभाग है, जिसमें करीब एक लाख से अधिक होमगार्ड्स आज बेसहारा घूम रहे हैं। अवैतनिक होने के चलते उनके घरों में खाना-खाने के भी लाले पड़ गए हंै। यही कारण है कि बीते दिनों हजारों की संख्या में लखनऊ पहुंचे होमगार्ड्स ने हजरतगंज जाम कर धरना प्रदर्शन किया था। लेकिन उस धरने में उन्हें सिर्फ और सिर्फ खोखले आश्वासन दिए गये, जिससे उन्होंने आक्रोशित होकर पुन: धरना देने की ठान ली है।
होमगार्ड पुलिस विभाग की रीढ़ माने जाते हैं। उल्लेखनीय है कि बीते 08 अगस्त को हजारों की संख्या में होमगार्डों ने अपनी मांगों को लेकर जीपीओ पर एक विशाल धरना दिया था। उस दौरान पूरा हजरतगंज ब्लॉक हो गया था और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे थे। उत्तर प्रदेश होमगार्डस अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पर दर्ज मुकदमा वापस लिए जाने और उनकी रिहाई समेत कई मांगो को लेकर प्रदेश भर के होमगार्ड्स हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के सामने इकट्ठा थे। ये लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे थे। गांधी प्रतिमा और जीपीओ पार्क के आसपास सडक़ें एकदम चोक हो गई थी। इसलिए होमगार्डों के एक प्रतिनिधिमंडल को पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल से वार्ता करने के लिए भेजा गया था , जिसके बाद समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया गया था। तब होमगार्ड्स ने प्रदर्शन समाप्त किया था।
उत्तर प्रदेश होमगार्ड अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी एसोसिएशन के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने बताया संगठन लगातार 2008 से धरना प्रदर्शन के माध्यम से होमगार्ड जवानों की समस्याओं से अवगत करा रहा है। कई समस्याओं पर मुख्य सचिव वह मंत्रिमंडल सचिव व मुख्यमंत्री स्तर पर हुई वार्ता का आज तक अनुपालन नहीं कराया गया। इससे आक्रोशित होकर करीब 50 हजार से अधिक होमगार्डों ने राजधानी में प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारी संख्या में होमगार्ड बस और ट्रेन से लखनऊ आ रहे थे, लेकिन जिलों की पुलिस में उन्हें वहीं रोक दिया गया। होमगार्डों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमारी मांगे शीघ्र नहीं मानी जाएंगी तो होमगार्ड आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसके बाद मुख्य सचिव से वार्ता होने के बाद उन्होंने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। उन्होंने अपनी मांगों में सेवानिवृत्त होने पर कम से कम 20 लाख रूपय का एकमुश्त दिया जाए, किसी भी दशा में जवान की मृत्यु होने पर पारिवार को 20 लाख रुपए दिया जाये। डीआईजी द्वारा 25 जून 2016 तक जवानों को बहाल करने का लिखित पत्र दिया गया था, जो अभी तक हकीकत का रूप नहीं ले सका है। ऐसे जवानों की बहाली तत्काल करते हुए उनकी ज्वाइनिंग कराई जाये। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश कुमार दिवेदी के ऊपर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लिया जाये और उन्हें रिहा किया जाये। कार्यवाहक अध्यक्ष ने बताया 15 जून 2009 को मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन के आदेश का अनुपालन आज तक नहीं कराया गया। 21 जुलाई 2008 को मंत्रिमंडल के सचिव के स्तर पर संपन्न हुई बैठक में लिए गए निर्णयों का आज का अनुपालन नहीं कराया गया।

भ्रष्टाचार का विरोध किया तो हो गए बर्खास्त

उत्तर प्रदेश होमगार्ड के 1,17, 009 पद स्वीकृत हैं। होमगार्ड्स के अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी दिन रात पुलिस विभाग के मजबूत प्रहरी के रूप में काम करते हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश द्विवेदी ने बताया कि कई जिलों में थानेदार व अन्य अधिकारी होमगार्ड्स को वसूली के लिए प्रताडि़त करते हैं। विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जब 35 होमगार्डों ने प्रदर्शन किया, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। उन होमगाड्र्स की अब तक बहाली नहीं की गयी है। जबकि हजरतगंज धरने में आश्वासन दिया गया था कि 30 सितम्बर तक समस्या का समाधान कर दिया जायेगा। इस अवधि के पूरा होने में मात्र कुछ ही दिन बचे हैं। होमगार्ड्स ने कहा कि अगर 30 सितम्बर तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो अब लखनऊ में होमगार्डों का जनसैलाब दिखाई देगा। जो चार अक्टूबर से अनिश्चित कालीन तक धरना देंगे।

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