पुलिस की जिम्मेदारी तय करना जरूरी

राज्य अपराध ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल यानी वर्ष 2014 से 2015 के बीच दुष्कर्म के मामलों में लगभग 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म की 3,467 घटनाएं हुई थीं। जबकि 2015 में ये घटनाएं बढक़र 9,075 हो गईं।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ रही आपराधिक घटनाओं का आंकड़ा चौंकाने वाला है। प्रदेश में पुलिस का रसूख खत्म होता जा रहा है। अपराधी बेखौफ होकर हत्या, लूट, बलात्कार और डकैती की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस बदमाशों पर नियंत्रण लगाने की बजाय बेबस नजर आ रही है। ऐसे में आम जनता के सामने अपनी सुरक्षा का मुद्दा बहुत ही गंभीर हो गया है।
राज्य अपराध ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल यानी वर्ष 2014 से 2015 के बीच दुष्कर्म के मामलों में लगभग 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म की 3,467 घटनाएं हुई थीं। जबकि 2015 में ये घटनाएं बढक़र 9,075 हो गईं। आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि पिछले एक वर्ष के दौरान दुष्कर्म के मामलों में 100 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। जबकि दुष्कर्म के प्रयास की घटनाओं में भी 30 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। इसके अलावा सूबे में अन्य आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ महिला उत्पीडऩ के मामले में अब लोग पुलिस के पास अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। इसलिए गत वर्षो की अपेक्षा थानों में दर्ज होने वाले महिला उत्पीडऩ और दुष्कर्म के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। इस बात को उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी ने भी स्वीकार किया है। उनका कहना है कि राज्य में महिलाओं के साथ होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं में इजाफा हुआ है, लेकिन अच्छी बात यह है कि पहले की अपेक्षा अब महिलाएं इस तरह के मामलों में पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराने लगी हैं। इससे महिलाओं के खिलाफ होने वाले आंकड़ों की काफी कुछ सही जानकारी मिलने लगी है, जो हम सबके लिए अच्छा संकेत है।
दरअसल महिलाओं के दुष्कर्म के मामलों को लेकर समाज का हर तबका परेशान है। हर व्यक्ति अपनी बहू-बेटी की सुरक्षा को लेकर चिन्तित है। इंसान घर के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है। उसके सामने अपनी और परिवार की महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। राज्य सरकार प्रदेश की जनता को सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण दिलवाने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में सरकार में शामिल नेताओं और मंत्रियों के उल्टे-सीधे बयान से प्रदेश का माहौल और अधिक खराब हो रहा है।
इसलिए जनता की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री को ठोस कदम उठाना होगा। पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी। यदि पुलिस अपना काम गंभीरता से नहीं करती है, तो बड़ी घटना होने पर उसको भी जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।

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