पुलिस की किरकिरी

सूबे के गाजियाबाद जिले में गैंगवार का सीन अक्सर हमने फिल्मों में देखा है। इसमें दो गुट खुलेआम एक दूसरे पर असलहों से लैस होकर हमला बोलते हैं। गोलीबारी में दोनों तरफ से कुछ लोगों की मौत होती है, तो कुछ घायल हो जाते हैं। यह लड़ाई अक्सर वर्चस्व या बदले की नीयत से की जाती है।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में अपराधी बेखौफ हो गये हैं। आम आदमी से लेकर वीआईपी तक की सुरक्षा खतरे में है। जनता में भय का माहौल व्याप्त हो गया है। आंकड़ों की बाजीगरी में माहिर पुलिस विभाग के अधिकारी हर घटना के बाद अधीनस्थों को सस्पेंड करके मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश में जुट जाते हैं। लेकिन घटना के मूल कारण को मिटाने की कोशिश नहीं की जाती है। इसलिए न तो अपराध कम हो रहा है और न ही अपराधियों के हौसले। इसलिए जनता में अपनी सुरक्षा का डर बना हुआ है।
सूबे के गाजियाबाद जिले में गैंगवार का सीन अक्सर हमने फिल्मों में देखा है। इसमें दो गुट खुलेआम एक दूसरे पर असलहों से लैस होकर हमला बोलते हैं। गोलीबारी में दोनों तरफ से कुछ लोगों की मौत होती है, तो कुछ घायल हो जाते हैं। यह लड़ाई अक्सर वर्चस्व या बदले की नीयत से की जाती है। गैंगवार का सिलसिला फिल्म समाप्त होने से कुछ देर पहले तक चलता है, लेकिन फिल्म के आखिर में पुलिस की भूमिका निभाने वाला हीरो दोनों दलों का सफाया करने में कामयाब हो जाता है। जबकि हकीकत में होने वाली घटनाएं फिल्मी दुनियां से काफी अलग होती हैं। हां, इतना जरूर होता है कि आजकल अपराधी हाईटेक होने के साथ ही फिल्मी स्टाइल में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश करने लगे हैं। ऐसा ही कुछ गाजियाबाद में बीजेपी नेता बिजेन्द्र तेवतिया और उनके साथियों पर हमले के दौरान देखने को मिला। एके-47, कारबाइन और अत्याधुनिक पिस्टल से लैस बदमाशों ने ताबड़तोड़ 40-50 राउंड गोलियां चलाईं। कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। सडक़ खून से लाल हो गई। आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग दहशत में आ गये। पुलिस को घटना की सूचना मिली। वह हमेशा की तरफ विलंब से पहुंची। हत्या की नीयत से पहुंचे बदमाशों ने इत्मीनान से गोलियां बरसाईं और फरार होने में कामयाब रहे। ये अलग बात है कि पुलिस ने बदमाशों का पीछा करके असलहे और कार बरामद कर ली लेकिन जिस तरह से वारदात हुई। प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। इससे पहले बुलंद शहर में मां-बेटी के साथ हाईवे पर रेप हुआ था। उसने भी सूबे की पुलिस के रसूख की असलियत उजागर की थी। इसके बावजूद पुलिस सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
पुलिस के पास जनता के सुरक्षा की अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके बाद भी पुलिस वसूली, मारपीट, शराब पीकर गाली-गलौज करने का समय निकाल लेती है। जबकि पुलिस लॉ के अनुसार उनको आराम करने तक का समय नहीं दिया गया है। ऐसे में पुलिस को अपनी साख बचाने की खातिर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना होगा। जनता का भरोसा जीतना होगा और उसको सुरक्षा का विश्वास दिलाना होगा। ऐसा करने में कामयाब हो सके, तभी अपने बच्चों को सुरक्षा का विश्वास दिला सकेंगे।

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