पुलिस एक, संविधान एक तो चेहरे दो क्यों?

पत्रकार जागेंद्र के खिलाफ आत्महत्या का केस दर्ज तो अन्य मामलों में लीपापोती क्यों?

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। डीजीपी साहब! प्रदेश एक है, संविधान एक है, प्रदेश की पुलिस का मुखिया एक है तो कार्रवाई अलग-अलग क्यों है। आपकी पुलिस के दो चेहरे क्यों हैं? एक शाहजहांपुर पुलिस का चेहरा है तो दूसरी तरफ लखनऊ पुलिस का चेहरा है। यदि आप यह कहकर बचना चाहते हैं कि दोनों जनपद अलग-अलग हैं तो कोई बात नहीं, लेकिन दोनों जनपद क्या प्रदेश के सभी जनपदों में तैनात पुलिस और पुलिसिंग के मुखिया आप हैं। इस सच्चाई को आप नकार नहीं सकते। यही हकीकत भी है।
शाहजहांपुर जनपद में मंत्री राममूर्ति वर्मा के इशारे पर स्थानीय पुलिस पत्रकार जगेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करती है। जगेंद्र को गिरफ्तार करने पुलिस उसके घर पर पहुंचती है। जगेंद्र का आरोप था कि गिरफ्तार नहीं कर पाने पर पुलिस उसके ऊपर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। पुलिस को पता है कि जगेंद्र के पास मंत्री के खिलाफ और भी सबूत हैं जो जगजाहिर हो सकते है। तमाम कोशिशों के बाद भी जगेंद्र को चिकित्सक नहीं बचा पाते हैं और जगें्रद की मौत हो जाती है। इस मामले में काफी मशक्कत के बाद मंत्री सहित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होता है। लेकिन कुछ दिन बाद पता चलता है कि मामले को उल्टा करते हुए स्वयं जगेंद्र के खिलाफ ही आत्महत्या का मुकदमा दर्ज होता है। कुल मिलाकर शाहजहांपुर की पुलिस मृतक के खिलाफ यह कार्य इतनी आसानी से करती है कि जैसे इसी कार्य के लिये पैदा हुई है। वहीं दूसरी तरफ लखनऊ में घटित मामले में ऐसा कुछ भी नहीं करती है। मानकनगर थाना क्षेत्र में विगत दिनों ऑटो चाल रिंकू की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या की जाती है। पुलिस इस मामले का पर्दाफाश करती है। पर्दाफाश में पुलिस यह बताती है कि रिंकू की हत्या उसके साले ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर की थी। हत्या का मुख्य कारण यह था कि रिंकू अपनी साली से आये दिन छेडख़ानी करता था। सवाल उठता है कि जब रिंकू अपनी साली से छेडख़ानी करता था तो पुलिस क्या मृतक रिंकू के खिलाफ छेडख़ानी का मुकदमा दर्ज करेगी? यदि पुलिस ऐसा नहीं करती है तो स्वाभाविक है कि प्रदेश एक, संविधान एक लेकिन पुलिस के चेहरे दो हैं। यदि यह कहा जाये कि पुलिस आरोपियों की औकात देखकर उसके ऊपर डंडा चलाती है तो गलत नहीं होगा। फिलहाल इस संदर्भ में जब एएसपी पूर्वी रोहित मिश्रा से पूछा गया तो उन्होंने मामले को टाल दिया।

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