पुराने लखनऊ में दिखने लगी ईद-उल-अज़हा(बकरीद) की रौनक

Captureलखनऊ। मुस्लिम समुदाय द्वारा हर वर्ष पैगंबर स्माइल की याद में बकरीद का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर खुदा की रज़ा पाने के लिये कुर्बानी दी जाती है। पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय में बकरीद का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बकरीद मनाने के पीछे हजारों साल पुरानी पैगंबर इब्राहिम द्वारा दी गई अपने बेटे पैगंबर स्माइल की कुर्बानी को याद करना असल मकसद होता है। कुरआन शरीफ के अनुसार जब पैगंबर इब्राहिम ने एक सपने के आधार पर मिना के मैदान में अपने बेटे स्माइल की कुर्बानी देने के बाद जब अपनी आंखें खोलीं तो स्माइल उनके सामने जीवित खड़े थे और नीचे एक दुम्बा की कुर्बानी हो चुकी थी। तभी से इस पर्व को मुस्लिम समुदाय मनाता चला आ रहा है। हर वर्ष हज जाने वाले सभी जायरीन मिना के मैदान में दुम्बे की कुर्बानी जरूर देते हैं। इस कुर्बानी के बगैर हज के दौरान की गई इबादत पूरी नहीं मानी जाती है।

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