पुरानी रेडियोथैरेपी मशीन खा रही धूल, नई की मांग

केजीएमयू में कैंसर इलाज की लीनियर हाई एक्सीलरेटर मशीन पांच वर्षों से फांक रही धूल
राम मनोहर लोहिया संस्थान खरीदेगा एक और मशीन

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक तरफ किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में कैंसर के ईलाज के लिए आई करोड़ों की लीनियर हाई एक्सीलरेटर मशीन सालों से धूल फांक रही है। कैंसर के मरीजों को बेहतर ईलाज के लिए अभी कुछ और दिन इंतजार करना पड़ेगा। दूसरी तरफ लोहिया संस्थान की ओर से मरीजों की बढ़ती संख्या देखकर एक और मशीन खरीदी जायेगी। दरअसल केजीएमयू में स्थापित होने वाली लीनियर हाइएक्सीलरेटर मशीन के लिए तैयार किए जाने वाले खास बंकर अभी तैयार नहीं हो पाया है। वहीं पिछले चार सालों से मशीन लगने में हो रही देरी से यहां पर कैंसर का इलाज कराने आने वाले मरीज को बेहतर ईलाज नहीं मिल पा रहा है
9 करोड 60 लाख है मशीन की कीमत
9 करोड 60 लाख की कीमत से वर्ष 2010 में कैंसर के इलाज के लिए खरीदी गई लीनियर हाइएक्सीलरेटर मशीन की अब तक पैकिंग भी नहीं हटाई गई है। कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए रखी इस मशीन की खासियत यह है कि यह सीधे उन कोशिकाओं पर अपना प्रभाव छोडती है जो कैंसर से ग्रसित हैं। इस मशीन से टï्यूमर चाहे कितनी भी गहराई में क्यूं न हो आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर इस मशीन से जल्द इलाज की सुविधा मिलना प्रारम्भ हो जाए तो कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से मरीजों को छुटकारा मिल सकेगा। बंकर न बन पाने के कारण एयरकंडीशनिंग का कार्य पूरा होने के बाद तक लगने वाले समय के अलावा कम्पनी भी मशीन को स्थापित करने में दो कम से कम तीन माह का समय लेगी; यानि यह तय है कि कैंसर के बेहतर इलाज के लिए मरीजों को अभी इतने दिन और इंतजार करना पड़ेगा। लीनियर हाइएक्सीलरेटर मशीन के प्रारंभ हो जाने के बाद कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से मरीजों को निश्चित तौर पर बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी। मशीन में इंटेसिटी मॉड्यूलेटर रेडियोथेरैपी और इमेज गाइडेड रेडियोथेरैपी की सुविधा है। जिसके माध्यम से टयूमर के आकार के आधार पर दवा की डोज निर्धारित की जाती है। मशीन की एक विशेष खासियत यह भी है कि ट्यूमर चाहे कितनी ही गहराई में क्यों न हो इस मशीन के जरिए आसानी से उस तक पहुंचा जा सकेगा; जिससे मरीजों को कैंसर के इलाज में सुविधा मिलेगी।

रोजना आते हैं 150 मरीज

केजीएमयू में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के इलाज के लिए रोजना 150 से 170 के बीच मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि कभी-कभी यह संख्या और भी ज्यादा हो जाती है जिससे दबाव बढता है। सभी की रेडियोथेरैपी की जाती है जिसमें काफी समस्या आती है। मरीजों की दिन प्रतिदिन बढती संख्या से आलम यह है कि
रेडियोथेरैपी की दो से तीन महीने तक की वेटिंग चल रही है।

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