पीपली लाइव का ‘जादोपुर’ बना बुंदेलखंड

राजनीतिक पार्टियों के दौरे का केन्द्र बना बुंदेलखंड
किसानों को लुभाने की जुगत लगा रहे राजनीतिक दलों के नेता

Captureप्रभात तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड की स्थिति अनुषा रिजवी की फिल्म पीपली लाइव के जादोपुर गांव जैसी हो गई है। यह क्षेत्र राजनीतिक पार्टियों और मीडिया के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। सूखे का कहर झेल रहे किसान और क्षेत्रीय मतदाता सबके टारगेट पर हैं। इन किसानों की तकलीफों को भुनाने में जुटीं राजनीतिक पार्टियां लोगों को लोक-लुभावने आश्वासन देकर 2017 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीटें निकालने की फिराक में हैं। इसी वजह से राजनीतिक दलों में बुंदेलखंड पहुंचने की होड़ लगी हुई है।
भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा समेत अन्य सभी राजनीतिक पार्टियों के दिग्गज नेताओं का बुंदेलखंड में जमावड़ा लगने लगा है। इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के महासचिव मधुसूदन मिस्त्री, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री, प्रमोद तिवारी और रीता बहुगुणा जोशी समेत पार्टी के अनेक नेता बुंदेलखंड का सियासी लाभ लेने की जुगत में हैं। इसी मकसद से कांग्रेस ने बुंदेलखंड में पैदल यात्रा निकालने का फैसला किया है। इसमें किसानों के साथ दलितों की समस्याओं को भी उठाया जायेगा। इसकी प्रमुख वजह बुंदेलखंड में दलित वोटरों की संख्या अधिक होना है। इसलिए कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी पदयात्रा के माध्यम से देश के किसानों की बदहाली और दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार को रोकने में सरकारों की नाकामी को उजागर करेंगे। इसके साथ ही यूपीए के शासनकाल में किसानों और दलितों की बेहतर स्थिति का आंकड़ा प्रस्तुत किया जायेगा। पार्टी बुंदेलखण्ड में अपना जनाधार बढ़ाने और अन्य पार्टियों का वोट बैंक काटने की पूरी कोशिश कर रही है।

दलित वोटों के लिये ‘भीम ज्योति यात्रा’
कांग्रेस पार्टी फरवरी में नौ दिन की भीम ज्योति यात्रा निकालने की तैयारी जोर-शोर से कर रही है। इस यात्रा का नामकरण बुंदेलखंड के दलित वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया गया है। कांग्रेस पार्टी अपनी पैदल यात्रा में बुंदेलखंड के दलित बाहुल्य इलाकों को टारगेट कर रही है। इन क्षेत्रों में रोहित वेमुला की खुदकुशी का मुद्दा उछालकर वोटरों को तोडऩे की कोशिश करेगी। इसके अलावा पार्टी की तरफ से यूपीए शासन काल में दलितों के विकास और सुरक्षा संबंधी योजनाओं की सफलता का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया जायेगा।

अंबेडकर के बहाने दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी

हाल ही में लखनऊ दौरे पर आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की। एक मंच पर उन्होंने एक साथ कई हित साधे। रोहित वेमुला की खुदकुशी पर वेदना प्रकट किए और अंबेडकर महासभा में भी गए। इसके साथ ही दलितों के विकास से जुड़ी योजनाओं को संचालित किये जाने का हवाला देकर जनसमर्थन हासिल करने का प्रयास किया। भाजपा नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी समेत कई बड़े नेता यूपी में किसानों और दलितों का वोट हासिल करने की कोशिश में दर्जनों रैलियां और जन सभाएं कर चुके हैं। इसी प्रकार समाजवादी पार्टी के नेताओं का केन्द्र बिन्दु भी बुंदेलखंड क्षेत्र और सूबे के अन्य जिलों में सूखे की मार झेल रहे बहुसंख्यक किसान हैं, जिनको लुभाने में पार्टी नेता जुट गये हैं। ये सूखा राहत पैकेज देने के साथ ही गांवों में बिजली की सुविधा, पेंशन योजनाएं और बैंक से लिया गया कर्ज चुकाने में राहत दिलाने की प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी देकर समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। अब तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राजस्व मंत्री शिवपाल यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह समेत सपा के तमाम राजनेता बुंदेलखंड की यात्राएं कर चुके हैं। वहीं बहुजन समाज पार्टी दलितों के साथ होने वाली घटनाओं और किसानों की बदहाली के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बता रही है। बसपा के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दलितों के उत्पीडऩ पर घडिय़ाली आंसू बहाने की बजाय उनकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करना चाहिए। जहां तक प्रदेश में दलितों को लुभाने के मकसद से भाजपा, सपा और कांग्रेस की तरफ से दलितों को टारगेट करके चुनावी सभाएं की जा रही हैं।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड में दलितों की संख्या काफी अधिक है। यहां से 2012 में कांग्रेस के चार विधायक जीते थे। इसलिए कांग्रेस पार्टी के सामने अपनी सीटों को बचाना और किसानों की बदहाली को मुख्य मुद्दा बनाकर आस-पास के जिलों में और सीटें हासिल करने की चुनौती है। इसके अलावा सपा बुंदेलखंड के दलितों की भाजपा और बसपा से नाराजगी का लाभ उठाना चाहती है। इसलिए किस राजनीतिक पार्टी की रैलियां और सभाएं वोट बैंक हासिल करने में सफल होंगी, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन वर्तमान में सभी राजनीतिक पार्टियों और मीडिया का केन्द्र बिन्दु बुंदेलखंड है।

दलित प्रेम का चुनावी कनेक्शन

यूपी में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। इस समय दलित और किसान सभी राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं। बहुजन समाज पार्टी के अलावा भाजपा, सपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता अंबेडकर के नाम पर चुनावी रोटियां सेंकने में जुट गये हैं। इन नेताओं ने अचानक से दलितों के साथ होने वाली घटनाओं और बाबा भीमराव अंबेडकर को महत्व देना शुरू कर दिया है। इससे दलितों के अंदर अपनी स्थिति को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे हैं, जिनका उत्तर कहीं न कहीं आगामी 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। इसलिए दलितों को अच्छी तरह समझ आ गया है कि उनको अहमियत देने के पीछे राजनीतिक दलों की मंशा क्या है।

खास चेहरे की तलाश
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस पार्टी के पास यूपी में ऐसा कोई भी चेहरा नहीं है, जिसके बल पर आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने योग्य सीटें हासिल कर सके। ये पार्टी अब तक केवल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के नाम पर भीड़ जुटाने में कामयाब हो पाई है। पार्टी के महासचिव मधुसूदन मिस्त्री, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री और रीता बहुगुणा जोशी के नाम पर भीड़ बिल्कुल भी नहीं जुट पायेगी। इस बात को पार्टी के नेता अच्छी तरह जानते हैं। इसी वजह से राहुल गांधी को आगे करके यूपी में वोटरों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर सफल होते नहीं दिख रहे हैं।

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