पीजीआई पर बढ़ता जा रहा किडनी ट्रांसप्लांट का दबाव

 रोहित सिंह
लखनऊ । केजीएमयू के डॉक्टरों का वेतन तो एसजीपीजीआई के डॉक्टरों के बराबर हो गया है लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट करने में केजीएमयू पीजीआई की तुलना में फिसड्डïी है। केजीएमयू अभी तक मात्र 3 प्रत्यारोपण ही कर पाया है। इसके आलावा इस समय केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट का काम ठप हो गया है। कारण केजीएमयू में नेफ्रोलॉजिस्ट ही नहीं है। संविदा पर काम कर रहे नेफ्रोलॉजिस्ट संत कुमार पांडेय के इस्तीफे के बाद संकट गहरा गया है।

केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग बढ़ती ही जा रही है। सारा दबाव पीजीआई पर पड़ रहा है। अगर केजीएमयू की ओर से पीजीआई में एक साल में हो रहे ट्रांसप्लांट के आधे ही प्रत्यारोपण कर लिये जायें तो किडनी ट्रांसप्लांट की लंबी वेटिंग लिस्ट में कमी आ सकती है। केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में काम करने वाले नेफ्रोलॉजिस्ट के इस्तीफे के बाद डायलिसिस यूनिट को तो संभाल लिया गया लेकिन किडनी प्रत्यारोपण बंद हो गया।

पीजीआई पर सारा दबाव
एसजीपीजीआई प्रदेश का एक मात्र संस्थान है जहां किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा है इसके चलते यहां पर किडनी ट्रांसप्लांट की लंबी वेटिंग चलती है। संस्थान में दो-दो साल की वेटिंग चलती है। इसके चलते कई मरीजों की ट्रांसप्लांट से पहले ही मृत्यु हो जाती है। पीजीआई एक साल में 120 से 130 ट्रांसप्लांट कर पाता है। यहां पर चार से साढ़े चार सौ की वेटिंग हमेशा रहती है। ऐसे में अगर केजीएमयू में ट्रांसप्लांट व्यवस्था पीजीआई के बराबर हो जाये तो किडनी के मरीजों को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है।

लोहिया में भी शुरू होगा किडनी ट्रांसप्लांट
डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भी गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू होगा। एसजीपीजीआई और केजीएमयू के बाद यह प्रदेश का तीसरा चिकित्सा संस्थान होगा जहां ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। इसके लिए दो नेफ्रोलॉजिस्ट और दो यूरोलॉजिस्ट की टीम बन चुकी है। मॉड्यूलर ओटी, आईसीयू, डायलिसिस यूनिट भी लगभग तैयार है। सब कुछ ठीक रहा तो तीन-चार महीने में प्रदेश के एक और संस्थान में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो जाएगी। किसी भी संस्थान में गुर्दा प्रत्यारोपण में सबसे बड़ी बाधा नेफ्रोलॉजिस्ट का न मिलना है। लेकिन लोहिया इंस्टीट्यूट ने इस संकट से निजात पा ली है। संस्थान में दो नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. शिवेंद्र और डॉ. अभिलाष की नियुक्ति की गई है। प्रत्यारोपण के पहले और बाद में मरीज की देखभाल के लिए दो नेफ्रोलॉजिस्ट के साथ ही रेजीडेंट डॉक्टर भी संस्थान को मिल चुके हैं। ट्रांसप्लांट यूनिट और एमआईसीयू को तैयार किया जा रहा है। जिसमें लगभग दो महीने लगने की संभावना है। इसी के साथ लोहिया इंस्टीट्यूट में ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी सभी संसाधन पूरे हो जाएंगे। संस्थान प्रशासन ने शासन से ट्रांसप्लांट शुरू करने की अनुमति लेने के लिए पत्र भेज दिया है। संस्थान के निदेशक प्रो.नुजहत हुसैन ने बताया कि शासन से अनुमति मिलने के बाद प्रत्यारोपण शुरू कर दिया जाएगा।

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