पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग में गुपचुप तरीके से हो रही कर्मचारियों की नियुक्ति

  • संस्थान के निदेशक राकेश कपूर ने विभाग में ऐसी किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया से किया इंकार
  • रेडियोलॉजी विभाग में सफाई कोटे से चल रही तकनीशियनों को भर्ती करने की प्रक्रिया

Captureवीरेन्द्र पांडेय
लखनऊ। देश के नामचीन संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट में गुपचुप तरीके के कर्मचारियों की भर्ती करने का मामला सामने आया है। संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग में निदेशक की जानकारी के बिना सफाई कोटे से तकनीशियन की पोस्ट पर नियुक्ति की जा रही है। विभाग में करीब 60 लोग साक्षात्कार के लिए बुलाए गए हैं। इन लोगों का इंटरव्यू लेने के लिए विभाग में कोई भी विशेषज्ञ या प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं है। इस मामले को संदिग्ध और सफाई कोटे से होने वाली नियुक्ति में घोटाला करने की साजिश माना जा रहा है। इसलिए संस्थान के कर्मचारी संगठनों ने भी गुपचुप तरीके से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है।
पीजीआई की सुचिता और गुणवत्ता को दरकिनार कर रेडियोलॉजी में तकनीशियन के पदों पर मनमाने ढंग से भर्ती करने का काम खुलेआम चल रहा है। संस्थान में आज सुबह करीब 9 बजे से ही रेडियोलॉजी विभाग के बाहर हाथों में माक्र्ससीट और अन्य कागजात लिए लोगों का जुटना शुरू हो गया था। इस तरह रेडियोलॉजी विभाग में लोगों को जुटते देखकर वहां के कर्मचारियों ने पूछताछ की तो मालूम हुआ कि सब लोग सफाई कोटे के तहत चल रही तकनीशियनों की नियुक्ति का साक्षात्कार देने आये हैं। उन्हें फोन करके साक्षात्कार लेने के लिए बुलाया गया था। यह सूचना देखते ही देखते संस्थान के अन्य सभी विभागों में भी फैल गई। इस तरह बिना पूर्व अनुमति और विज्ञापन के सफाई कोटे से नियुक्ति होने की जानकारी मिलते ही कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गये।
दरअसल रेडियोलॉजी विभाग में सफाई कर्मियों के कोटे से आउटसोर्सिंग के तहत तकनीशियनों की भर्ती की जा रही है। इसमें संस्थान और विभाग का कोई भी विशेषज्ञ मौजूद नहीं है। इस भर्ती प्रक्रिया को बहुत ही गुपचुप तरीके से निपटाने की योजना बनाई गई थी। इसी वजह से संस्थान के अंदर चल रही भर्ती प्रक्रिया के संबंध में निदेशक राकेश कपूर को भी जानकारी नहीं दी गई। जबकि संस्थान में आने वाले मरीजों को एमसीआई के मानकों के अनुरूप ही जांच की सुविधा मिले, इस बात का जिम्मा संस्थान के प्रशासन का होता है। रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों की जांच करने वाला व्यक्ति संबंधित विधा का जानकार होना चाहिए।
उसके पास रेडियोलॉजी से संबंधित डिग्री और पोस्ट के अनुरूप अनुभव होना जरूरी होता है। ऐसे लोगों की नियुक्ति विषय विशेषज्ञों की कमेटी करती है। उस कमेटी के समक्ष गुणवत्ता का प्रमाण प्रस्तुत करने और उसमें सफल होने के बाद ही नियुक्ति होती है। लेकिन संस्थान में आउसोर्सिंग के तहत होने वाली नियुक्ति में तमाम मानकों को ताक पर रख दिया गया, जो संस्थान की गुणवत्ता के लिए खतरनाक है।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि यदि आउटसोर्सिंग के माध्यम से ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है, जो उक्त पद के लिए योग्य नहीं है, तो क्या मरीजों का परीक्षण और उसकी रिपोर्ट की गुणवत्ता सही मानी जायेगी। किसी मरीज की गलत रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक ने दवा लिखकर दे दी और उस मरीज को दवा खाने से नुकसान हुआ, तो ऐसे मामलों में जिम्मेदार कौन होगा। क्या तब भी संस्थान के निदेशक यही कहेंगे कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। मामला स्पष्ट है कि संस्थान के अंदर होने वाली हर तरह की गतिविधि के लिए वहां का प्रशासन जिम्मेदार है। ऐसे में अधिकारियों का कर्तव्य बनता है कि मामले को गंभीरता से लेकर कदम उठाएं। ताकि संस्थान में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापरक इलाज मिल सके और संस्थान की गरिमा पर भी आंच न आए।

Capture1मुझे रेडियोलॉजी विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर चल रहे साक्षात्कार की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। यदि संविदा कर्मियों की नियुक्ति को लेकर साक्षात्कार आयोजित किया जाता है, तो उसमें निदेशक को सूचना देना जरूरी नहीं माना जाता है। इससे पहले भी संविदा कर्मियों की नियुक्ति को लेकर होने वाले साक्षात्कार की सूचना नहीं दी गई थी। इसलिए यह कोई बड़ा मामला नहीं है।
राकेश कपूर, निदेशक, पीजीआई, लखनऊ

आउटसोर्सिंग से की जा रही है भर्ती

सफाई कोटे के तहत रेडियोलॉजी विभाग में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन 9000 रुपये है। इस विभाग में तकनीशियन के पद पर कुल 3 पदों पर भर्ती की जा रही है। सूत्रों की मानें तो आउटसोर्सिंग से होने वाली नियुक्ति में भी सांठ-गांठ का खेल चल रहा है। इस नियुक्ति प्रक्रिया को गुपचुप तरीके से कराने की कोशिश में जुटे लोगों ने अपने-अपने कैंडीडेट की सूची तैयार कर ली है। उसी आधार पर तकनीशियनों की नियुक्ति होना तय है लेकिन साक्षात्कार की औपचारिकता को पूरा करना भी जरूरी है। इसी वजह से गुपचुप साक्षात्कार करवाया जा रहा है।

Pin It