पीएम मोदी की पाकिस्तान यात्रा…

पाकिस्तान का भारत के प्रति रवैया कैसा है इससे पूरी दुनिया वाकिफ है। पिछली घटनाएं इसका बड़ा उदाहरण है। जब भी भारत, पाकिस्तान से बातचीत की पहल करता है तो मामला आतंकवाद और कश्मीर के मुद््दे पर अटक जाता है। देश के भीतर सांप्रदायिक रंग की बातों और आंतरिक राजनीति में पाकिस्तान की बातों के बिना हम अपना राजनीतिक गुजारा नहीं कर पा रहे हैं।

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अचानक पाकिस्तान पहुंचना हर किसी के लिए हैरत भरा रहा। प्रधानमंत्री पाकिस्तान जा रहे हैं यह जानकारी भी ट्विटर पर दी गई। बिना किसी पूर्व सूचना के प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान पहुंचने पर आम देशवासियों के साथ-साथ भारतीय मीडिया भी भौचक दिखी। उस वक्त सभी के लिए मोदी की पाकिस्तान यात्रा रहस्यमयी लगी। राजनैतिक पंडित अपना-अपना अंदाजा लगा रहे थे। कोई दोनों देशों के संबंधों में गर्माहट देख रहा था तो कई इससे असहमत दिखे। यहां सवाल उठता है कि दो देशों के राष्टï्राध्यक्षों के बीच चाहे औपचारिक बात होनी हो या अनौपचारिक, उसके प्रोटोकॉल तय होते हैं। इस दौरे में प्रोटोकॉल गायब दिखा। बीजेपी के दिग्गज टीवी चैनल पर जब इस मुद्दे पर बात कर रहे थे तो इसे अनकन्वेंशनल प्रोटोकॉल का नाम दिया गया। ठीक है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा दोनों देशों के बीच खाई को पाटने का काम करेगी, लेकिन प्रधानमंत्री की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आगे पीएम मोदी औचक यात्रा करते हैं तो इससे कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मसलन राष्टï्राध्यक्षों की सुरक्षा इतना बड़ा मसला है कि बिना पूर्व निर्धारित या चुपचाप तरीके से राष्टï्राध्यक्षों के दौरे तय करने का चलन नई समस्याएं पैदा कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जो नए चलन की शुरुआत की और वह भी पाकिस्तान जैसे देश के साथ तो इसे सही नहीं कहा जा सकता। पाकिस्तान में दूसरे देशों के क्रिकेट खिलाड़ी नहीं जाते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी का अचानक जाना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं था।
पाकिस्तान का भारत के प्रति रवैया कैसा है इससे पूरी दुनिया वाकिफ है। पिछली घटनाएं इसका बड़ा उदाहरण है। जब भी भारत, पाकिस्तान से बातचीत की पहल करता है तो मामला आतंकवाद और कश्मीर के मुद््दे पर अटक जाता है। देश के भीतर सांप्रदायिक रंग की बातों और आंतरिक राजनीति में पाकिस्तान की बातों के बिना हम अपना राजनीतिक गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। जब से केन्द्र में भाजपा सत्ता मेंं आयी है कई बार प्रयास के बाद भी पकिस्तान से बातचीत नहीं हो पायी। भारत यह अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान हमारे बारे में क्या सोचता है और क्या चाहता है फिर भी उसकी चौखट पर प्रधानमंत्री का पहुंच जाना समझ से परे है। एक तरफ से कोशिश करने से रिश्तों को नहीं सुधारा जा सकता। भारत और पाकिस्तान के बीच की खाई पाटने की जिम्मेदारी भारत के साथ-साथ पाकिस्तान की भी है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि अब भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए पाकिस्तान पहल करेगा।

Pin It