पीएमएस चुनाव पर लटक रही पारदर्शिता की तलवार

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में हुआ प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के चुनाव तमाम उत्तेजक बहसों के साथ संपन्न हो गया। मतदाता सूची में नाम न होने से कई डॉक्टर वोट डालने से वंचित रहे। वोट डालने से वंचित डॉक्टरों की चुनाव अधिकारी डॉ एससी श्रीवास्तव से कई बार तीखी बहस हुई। जिसके चलते माहौल गर्म दिखा। कई डॉक्टरों ने चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठाये। लोकबंधु अस्पताल के एक डॉक्टर जो वोट डालने आये थे, उनका मतदाता सूची में नाम ही नहीं था।
डॉक्टर का चुनाव अधिकारी डॉ एससी श्रीवास्तव के साथ तीखी बहस भी हुई। गौरतलब है कि प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के चुनाव विवादों में है। संघ के जनरल सेक्रेटरी का चुनाव लड़ रहे डॉ राजेन्द्र कुमार सैनी चुनावों की पारदर्शिता को लेकर पहले ही हाईकोर्ट जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक तमाम डाक्टर्स गुपचुप तरीके से कराये गये चुनाव को लेकर असंतुष्टï हैं। सबसे पहले मतदाता सूची को लेकर ही विवाद सामने आया है। आरोप है कि आठ मई को नामांकन होने के साथ मतदाता सूची सभी प्रत्याशियों को दी जानी चाहियेथी। इसके आलावा 11 मई तक नाम वापसी होनी थी। लेकिन इस तारीख तक किसी के पास सूची नही गई। ऐसे में जानबूझकर देरी की गई ताकि पुराने प्रत्याशियों को लाभ मिल सके। सूची न होने से नये प्रत्याशियों के लिए सबसे ज्यादा आफत खड़ी हो गई क्योंकि नये प्रत्याशियों को संपर्क करने के लिए डॉक्टरों के नाम और मोबाइल नंबर नहीं मिल सके।
इस मामले को लेकर संघ के जनरल सेक्रे टरी पद के लिए चुनाव लड़ रहे डॉ राजेन्द्र सैनी ने हाई कोर्ट में चुनाव की पारदर्शिता को लेकर रिट दायर की है। बलरामपुर की इमरजेंसी के थर्ड फ्लोर पर हुए मतदान के दौरान चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई डॉक्टरों में आपसी मतभेद दिखे। हालांकि शाम तक छोटी-मोटी बहसों के साथ चुनाव संपन्न हो गया।
पीएमएस चुनाव शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न हो गया। विजेताओं की घोषणा 31 मई को की जायेगी। चुनाव पूर्ण रूप से पारदर्शिता के साथ संपन्न हुए हैं। विरोधियों के तर्क निराधार है।
-डॉ एससी श्रीवास्तव, चुनाव अधिकारी, पीएमएस
पड़ सकती है पीएमएस में दरार
सूत्रों के मुताबिक जिस प्रकार से पीएमएस के चुनाव में पारदर्शिता की कमी और संघ के सदस्यों को जानकारी के अभाव में रखा गया, उससे संगठन कमजोर हो सकता है।

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