पार्टी का झंडा और हाथ में डंडा… वाह नेता जी

सवाल एक सत्ता का नहीं है। सवाल हर सरकार का है। सत्ता में आते ही राजनेताओं का चरित्र बदल जाता है। सत्ता का अहंकार उनके सिर चढक़र बोलने लगता है। उन्हें लगता है कि उनकी हनक के आगे सबको नतमस्तक हो जाना चाहिए। जो वो करेंगे सिर्फ वही ठीक है। ऐसे लोग सत्ता का भरपूर दोहन करना चाहते हैं। उनके सामने सत्ता सिर्फ गुंडागर्दी करने का लाइसेंस है।

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार चलाने वाले लोग यह क्यों नहीं सोचते कि अगर सडक़ चलते लोगों को धमकाया जायेगा तो क्या दोबारा सत्ता में आने का सपना देखा जा सकता है। आगरा में एक नेता के गनर ने सडक़ चलती लडक़ी के साथ जो अभद्रता की उसने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा दिया है। आखिर सरकार इन गुंडों को गनर क्यों देती है? अगर यह गुंडे सडक़ चलते लोगों से इस तरह छेडख़ानी करेंगे तो आम आदमी के मन में पार्टी और सरकार के प्रति क्या छवि बनेगी?
सवाल एक सत्ता का नहीं है। सवाल हर सरकार का है। सत्ता में आते ही राजनेताओं का चरित्र बदल जाता है। सत्ता का अहंकार उनके सिर चढक़र बोलने लगता है। उन्हें लगता है कि उनकी हनक के आगे सबको नतमस्तक हो जाना चाहिए। जो वो करेंगे सिर्फ वही ठीक है। ऐसे लोग सत्ता का भरपूर दोहन करना चाहते हैं। उनके सामने सत्ता सिर्फ गुंडागर्दी करने का लाइसेंस है।
जब अखिलेश सरकार बनी थी तो लोगों के मन में यह सवाल उठा था कि यह सरकार भी पिछली सरकार की तरह क्या कानून व्यवस्था के मोर्चे पर फेल हो जायेगी। पिछली मुलायम सरकार में पार्टी पर इसी तरह के आरोप लगे थे जिसका भारी नुकसान उठाना पड़ा था। सभी का मानन था कि यही गुंडागर्दी सपा सरकार की विदाई का कारण भी बन गयी।
अखिलेश यादव ने सत्ता संभालने के कुछ दिन बाद ही समझ लिया था कि अगर इस तरह की गुंडागर्दी को नहीं रोका गया तो सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने देखा कि उनकी सरकार बनते ही गुंडों का यह कार्यक्रम फिर शुरू हो गया। अचानक लोगों की गाडिय़ों पर सपा के झण्डे नजर आने लगे तब सीएम ने कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों के अलावा कोई पार्टी का झण्डा नहीं लगायेगा। अफसोस कि मुख्यमंत्री के इस आदेश का पालन भी नहीं हो रहा।
आगरा के जिस नेता ने लडक़ी से अभद्रता की वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुका है। वह किस हैसियत से गनर लेकर घूम रहा था इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हां यह जरूर है कि गनर के साथ उसको गुंडागर्र्दी का लाइसेंस जरूर दे दिया गया था।
सरकार के पतन के लिए कोई बहुत बड़ी चीज हो यह जरूरी नहीं है। छोटे-छोटे गुंडों के यह कार्यक्रम पर्याप्त हैं सरकार की बदनामी करने के लिए।
अच्छा हो अखिलेश यादव इन गुंडों पर लगाम लगायें वरना जनता इन सब बातों का जवाब देना जानती है। उम्मीद है कि सीएम खुद इस तरह के गुंडों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखायेंगे।

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