पानी के लिए मचता हाहाकार

विश्व बैंक की एक रपट में बताया गया है कि संसार की चालीस फीसद से भी अधिक जनसंख्या पानी का संकट झेल रही है। यह संकट दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में है। इतना ही नहीं अनेक देशों में शुद्ध पानी विलासिता की वस्तु के तौर पर सामने आ रहा है। रपट यह भी बताती है कि आदमी के लिए पानी की मांग हर साल ढाई फीसद की दर से बढ़ रही है।

sanjay sharma editor5अभी गर्मी की शुरुआत में ही पानी की किल्लत से लोगों का कई इलाकों में जीना मुहाल हो गया है। महाराष्ट्र का मराठवाड़ा और प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके सहित कई दूसरे राज्यों में पानी को लेकर लोगों का बुरा हाल है। पानी की समस्या को अक्सर हम गर्मी के मौसम के बाद भूल जाते हैं। लेकिन हर साल हमें इसी समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसे में पानी बचाने और इसके सही इस्तेमाल पर काम करना चाहिए। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब देश के ज्यादातर इलाकों में गर्मियों में पानी के लिए हम तरसते नजर आएंगे।
जल है तो कल है कि कहावत और इसके मायने हमें गर्मी के मौसम में सही से समझ में आते हैं। पानी का सही इस्तेमाल और इसके स्रोतों के सही रखरखाव की बात अक्सर हमारे लिए चर्चा का विषय रहते हैं। जल के सामान्य स्रोतों में नल, कुआं, तालाब , नदियां आती हैं। लेकिन इनके जल का हम कितना सही से इस्तेमाल करते हैं यह हम सभी जानते हैं। आज लातूर जैसे इलाके में लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। पर जिन इलाकों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है, क्या उन इलाकों में इसका उचित इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सवाल पर हमें थोड़ा मंथन करने की जरूरत है। विश्व बैंक की एक रपट में बताया गया है कि संसार की चालीस फीसद से भी अधिक जनसंख्या पानी का संकट झेल रही है। यह संकट दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में है। इतना ही नहीं अनेक देशों में शुद्ध पानी विलासिता की वस्तु के तौर पर सामने आ रहा है। रपट यह भी बताती है कि आदमी के लिए पानी की मांग हर साल ढाई फीसद की दर से बढ़ रही है। लेकिन जल की उपलब्धि की दर में कोई इजाफा नहीं हो रहा है। भूजल लगातार नीचे गिर रहा है। स्टाक होम एनवायरमेंट इंस्टीट्यूट की रपट चेताती है कि यदि पानी की बर्बादी नहीं रोकी गई तो साल 2025 तक विश्व की दो तिहाई आबादी बूंद-बूंद को तरसेगी।
देश में एक अध्ययन में सामने आया है कि हजार नवजात शिशुओं में से करीब 127 बच्चे हैजा, डायरिया और गंदे पानी से पैदा होने वाले रोगों से मर जाते है।
यदि पानी की धरती पर मौजूदगी की बात करें तो पानी की कोई कमी नहीं है। हमारी पृथ्वी का तीन चौथाई भाग समुद्री जल से ढका है। लेकिन इसके खारेपन की वजह से इसका इस्तेमाल हम पीने, धुलाई करने, सिंचाई आदि के कार्यों में नहीं कर सकते। ऐसे में जरूरी है कि हम जल के महत्व को समझें और इसका सही इस्तेमाल करें। जाहिर है इसमें जल प्रबंधन और संरक्षण अहम भूमिका निभाएगा।

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