पाकिस्तान की गीदड़ भभकी

पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और यह बात पूरी दुनिया जानती है फिर भी पाकिस्तान, भारत से इस मुद्दे पर बात न कर कश्मीर राग अलाप रहा है। हाफिज सइद ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापा और कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता तभी होगी जब बातचीत का मुद्दा कश्मीर हो अन्यथा किसी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।

sanjay sharma editor5पाकिस्तान की गीदड़ भभकी बंद होने का नाम नहीं ले रही है। इधर कुछ दिनों से लगातार पाकिस्तान की तरफ से भारत को धमकी दी जा रही है। सोमवार को पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल राहील शरीफ ने भारत को चेतावनी दी है कि जंग होने पर उसे नाकाबिल-ए-बर्दाश्त नुकसान झेलना पड़ेगा। राहील की धमकी पर अभी भारत ने प्रतिक्रिया भी नहीं दी थी कि मंगलवार को पाकिस्तान के राष्टï्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने भारत को एक और धमकी दे डाली। अजीज ने कहा कि पाकिस्तान में अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और हाफिज सइद को पकडऩे के लिए अगर कोई गुप्त ऑपरेशन चलाया गया तो भारत को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।
दरअसल पाकिस्तान की तरफ से यह बयान केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन राठौर के उस बयान कि ‘दाऊद व हाफिज सइद को पकडऩे के लिए अभियान चलाया जाएगा’ के बाद आया है। दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में होने की पुष्टिï हो चुकी है। बावजूद इसके पाकिस्तान इस बात को नकार रहा है। इससे पहले इसी तरह की धमकी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और आर्मी चीफ भी दे चुके हैं। धमकी देना पाकिस्तान की आदत बन चुका है। इधर कुछ महीनों से पाकिस्तान की तरफ से लगातार सीमा पर सीज फायर का उल्लंघन किया जा रहा है। एक महीने केे भीतर दो जिंदा आतंकवादी पकड़े गए। दोनों आतंकी पाकिस्तानी थे। इन सबके बीच पाकिस्तान जानबूझकर इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए गीदड़ भभकी दे रहा है।
पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और यह बात पूरी दुनिया जानती है फिर भी पाकिस्तान, भारत से इस मुद्दे पर बात न कर कश्मीर राग अलाप रहा है। हाफिज सइद ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापा और कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता तभी होगी जब बातचीत का मुद्दा कश्मीर हो अन्यथा किसी बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने भी भारत से युद्ध की चेतावनी के साथ ही कश्मीर का भी जिक्र किया था कि भारत कश्मीरियों पर अत्याचार कर रहा है और कश्मीर को जीतना विभाजन का अधूरा छूट गया एजेंडा है।
अगर यह बयानबाजी सन 1965 की याद तक ही बनी रहे, तो अच्छा है और दोनों देशों की सरकारों को बातचीत के जरिए माहौल सामान्य करने की कोशिश करनी चाहिए। युद्ध न हो, इसके लिए पूरी शिद्दत से कोशिश की जानी चाहिए, लेकिन अगर ऐसी परिस्थिति आ ही जाए, तो उसके लिए भी तैयारी पूरी होनी चाहिए।

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